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लघु सचिवालय में जबरन घुसे कर्मचारी, 1026 गिरफ्तार

Wed, 06 Aug 2014 12:32 AM IST
भिवानी
भिवानी Updated Wed, 06 Aug 2014 12:32 AM IST
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मांगों के समर्थन में लामबंद कर्मचारियों को ना पुलिस का पहरा रोक पाया और न ही पानी की बौछारें। कर्मचारियों ने मंगलवार को सारी बंदिशें तोड़ दी। इंकलाबी नारों के साथ लघु सचिवालय में हल्ला बोल दिया। निषेधाज्ञा तोड़कर कर्मचारी जबरन अंदर घुसे और डीसी दफ्तर के बाहर धरना देकर सभा की।

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प्रशासन ने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन कर्मचारी जेल जाने पर अड़े रहे। अंत में एसडीएम के आदेश पर 1026 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया और फिर मौके से ही उन्हें रिहाई दे दी गई।
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सर्व कर्मचारी संघ के बैनर तले जेल भरो आंदोलन में सभी विभाग के कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कर्मचारी पहले हुडा पार्क में एकत्रित हुए और फिर विशाल जुलूस के रूप में लघु सचिवालय के लिए कूच कर गए। सैकड़ों की तादाद में शामिल कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लघु सचिवालय के पास पहुंचने पर सुरक्षा कर्मियों ने मुख्य गेट बंद कर दिया।
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कर्मचारी जबरन गेट खोलकर अंदर घुसने लगे तो फायर ब्रिगेड की गाड़ियों से उन पर पानी की बौछारें फेंकी गई। इसके बावजूद कर्मचारियों का जत्था अंदर बढ़ता गया। डीसी दफ्तर के पास पहुंचकर कर्मचारी धरने पर बैठ गए। प्रशासन की कार्रवाई से आक्रोशित कर्मचारियों ने डीसी-एसपी के खिलाफ भी जमकर नारे लगाए। उन्होंने अफसरों से गिरफ्तारी की मांग की, लेकिन प्रशासन के पास न तो वाहन थे और न ही जेल में जगह। करीब दो घंटे तक कर्मचारी डीसी दफ्तर के सामने धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी करते रहे।

जिला प्रशासन के अफसरों को मुख्यमंत्री के हाथों की कठपुतली बताते हुए जमकर खरी खोटी सुनाई। बाद में मौके पर पहुंचे एसडीएम संजय राय ने कर्मचारी नेताओं से वार्ता कर उन्हें आंदोलन खत्म करने को कहा, लेकिन वह गिरफ्तारी देने पर अडिग रहे। विवश होकर एसडीएम ने उन्हें सामूहिक रूप से गिरफ्तार करने और मौके पर रिहा करने के निर्देश दिए। संघ के मुताबिक कुल 1026 कर्मचारियों ने गिरफ्तारियां दी हैं।

प्रदर्शन में यह रहे शामिल
विरोध प्रदर्शन में संघ के जिला प्रधान जयप्रकाश परमार, सुखदर्शन सरोहा, हेमशा के प्रदेशाध्यक्ष संदीप संागवान, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के नेता ऋषि राम शर्मा, किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष मा. शेर सिंह, सीटू के नेता विनोद, जन सघर्ष समिति के ओमप्रकाश, हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के राज्य प्रधान वजीर सिंह, बिजली बोर्ड के नेता सुभाष कौशिक, नगरपालिका के नेता महेन्द्र सिंह, मिनी सचिवालय के नेता बालकृष्ण शर्मा, कृष्णा सिवाच, मिड-डे-मील वर्कर्स के प्रधान सुदेश, सहदेव सिंह, सुखदेव सिंह, लोकेश, महेन्द्र बडाला, अनिल मुझाल, जगरोशन, विजय जांगड़ा, अनिल श्योराण, राजकुमार घिकाड़ा, संदीप बवानीखेड़ा, राजेन्द्र झोझू, रविन्द्र धनाना आदि शामिल रहे।
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लघु सचिवालय में ऐसे घुसे कर्मचारी
कर्मचारियों को गेट पर ही रोकने के लिए प्रशासन ने पूरे इंतजार किए थे। महिला व पुरुष सुरक्षा कर्मियों को उपकरणों से लैस कर गेट पर तैनात किया गया था। फायर ब्रिगेड की दो गाड़ियां भी मौके पर खड़ी थी। मगर कर्मचारियों की एकजुटता के आगे सारी कोशिशें बेकार हो गईं। मुख्य गेट बंद होने के बाद कुछ कर्मचारी दीवार फांदकर अंदर घुस गए तो कुछ पिछले गेटों से अंदर जाकर डीसी दफ्तर के पास पहुंच गए।

उन्हें रोकने के लिए सुरक्षाकर्मी जब उस ओर बढ़े तब तक अन्य कर्मचारी मुख्य गेट खोलकर अंदर घुस गए। उन पर पानी की बौछारें लगातार जारी रही। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों में भरा पानी खत्म हो गया, लेकिन कर्मचारियों का हौसला नहीं डिगा।

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गुस्साए कर्मचारी तो अफसरों ने अंदर बुलवाया लाउडस्पीकर
जोर-जबरदस्ती करते हुए कर्मचारी लघु सचिवालय के अंदर घुसने में कामयाब रहे, लेकिन उनके लाउडस्पीकर लगे वाहन को बाहर ही रोक दिया गया। डीसी दफ्तर के बाहर नारेबाजी करते हुए कर्मचारियों ने जब गुस्सा दिखाते हुए वाहन को अंदर तक लाने की मांग की तो सुरक्षा में लगे अफसर बैकफुट पर आए। उन्होंने फोन कर खुद लाउडस्पीकर वाले वाहन को अंदर बुलवाया।
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यह थी प्रमुख मांगें :
* दो वर्ष की सेवा पूरा कर चुके सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाए।
* न्यूनतम वेतनमान 15 हजार रुपये लागू हो।
* सरकारी विभागों से ठेका प्रथा खत्म हो।
* लिपिकीय, चतुर्थ श्रेणी, वन व पुलिस के कर्मचारियों को पंजाब के समान वेतनमान लागू हो।
* राज्य कर्मचारियों को केन्द्र के समान ग्रेड-पे।
* सरकारी विभागों में आउट सोर्सिंग, निजीकरण, फ्रेंचाइजी की नीतियां रद्द की जाएं।
* पुरानी पेंशन प्रणाली लागू की जाए।
* 4, 9 व 14 वर्ष की सेवा पर एसीपी दी जाए।
*कच्चे कर्मचारियों को हड़ताल अवधि का वेतन मिले।

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