{"_id":"618acdb102e5745381782c3d","slug":"shelter-away-from-night-administration-did-not-take-any-steps-to-prevent-winter-bhiwani-news-hsr6164610151","type":"story","status":"publish","title_hn":"रैन से दूर हुआ बसेरा : प्रशासन ने नहीं उठाए सर्दी से बचाव के लिए कोई कदम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रैन से दूर हुआ बसेरा : प्रशासन ने नहीं उठाए सर्दी से बचाव के लिए कोई कदम
विज्ञापन
देर रात रेलवे रोड पर नगर परिषद कार्यालय के बाहर ठिठुरती ठंड में सोता एक व्यक्ति। संवाद
- फोटो : Bhiwani
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संजय वर्मा
भिवानी। दिनभर पेट भरने के लिए खाने की जुगत भिड़ाने में ही बीत जाता है, लेकिन रात बैचेनी भरी गुजर रही है। यह हाल लावारिस लोगों का हैं जो सर्द रातों में शहर के डिवाइडरों या फिर फुटपाथों पर बिता रहे हैं। सर्दी के आगाज के साथ ही जिला प्रशासन को ऐसे लोगों के लिए रैन बसेरों का प्रबंध करना होता है, लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी ने कोई कदम नहीं उठाए हैं। नगर परिषद और रेडक्रॉस की रैन भी अभी बसेरे से काफी दूर है, क्योंकि इनकी तरफ से भी कोई जगह निश्चित नहीं की गई है। मुसाफिरों के ठहरने के लिए भी प्रशासन ने कोई रैन बसेरा नहीं बनाया है।
ठंड के दौरान किसी की मौत न हो यह सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन का दायित्व है। यह सर्वोच्च न्यायालय के भी आदेश हैं। इसके बावजूद हर साल ठंड में काफी लोग दम तोड़ देते हैं, जबकि कागजों में उनकी मौत की अन्य कई वजह भी दर्शाई जाती है। भिवानी में काफी लोग ऐसे हैं, जिनके पास न घर है न बाहर कोई ठिकाना है। ये लोग दिन भर खानाबदोश सी जिंदगी जीने पर मजबूर रहते हैं। इन्हें जहां खाने को मिला वहां खा लिया और जहां पर बैठ गए बस वहीं रैन बिता दी। ऐसे लोगों की मुश्किलें अब कड़ाके की ठंड में बढ़ने वाली हैं। अभी रात के समय तापमान लगातार गिरावट आने लगी है। ऐसे में फुटपाथ और सड़क के डिवाइडरों पर खुले आसमान के नीचे सोना किसी खतरे से खाली नहीं हैं, क्योंकि अकेले कंबल या चद्दर में ठंड रोक पाना भी नामुमकिन हो रहा है।
बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के नजदीक रैन के लिए बसेरा जरूरी
सर्दी के आगाज के साथ ही प्रशासन की तरफ से भी रैन बसेरों को लेकर तैयारियां शुरू हो जानी चाहिए थीं। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के नजदीक इस तरह के रैन बसेरे जरूरी हैं, क्योंकि कई बार देर रात तक अनजान शहर में आने वाले मुसाफिर भी अपने ठहरने का कोई इंतजाम नहीं कर पाते हैं। उन्हें भी इनमें शरण मिलनी जरूरी है, जबकि बेघर लोगों के लिए भी रात बिताने के लिए इंतजाम अनिवार्य हैं।
विज्ञापन
ऐसी होती है रैन बसेरे में व्यवस्था
रैन बसेरे में कड़ाके की ठंड से बचाव के लिए बिस्तर, कंबल, रजाई की व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा एक रैन बसेरे में कम से कम 20 से 25 लोगों के एक साथ ठहरने की व्यवस्था भी होती है। रैन बसेरा ऐसी जगह पर बनाया जाता है, जहां कोई भी व्यक्ति आसानी से इसके अंदर शरण ले सकता है। रैन बसेरे में कोई भी व्यक्ति एक दो या इससे अधिक दिन भी रात बिता सकता है। रैन बसेरे में आने जाने वालों के लिए प्रशासन की तरफ से हेल्थ सहित अन्य व्यवस्थाएं भी की जाती हैं।
12 डिग्री के पास पहुंचा रात का पारा
रात के समय ठंड बढ़ने से न्यूनतम पारा भी 12 डिग्री तक पहुंच रहा है, जबकि अधिकतम पारा 28 डिग्री के आसपास बना हुआ है। सर्द रैन में व्यवस्था सिकुड़ रही है तो खुले आसमान के नीचे रात बिताने वालों को चैन नहीं है। घुमंतू लावारिस लोगों के पास तो पूरी तरह तन ढकने के लिए ठीक से कपड़े तक नहीं हैं, ऐसे लोग सर्द रातों में खुले में रात बिताते हैं तो उनकी जान पर भी बड़ा जोखिम है।
अपना घर भी हुआ बेगाना
कुछ सामाजिक संगठन बेसहारा और लावारिस लोगों को आसरा देते हैंँ मगर ये संगठन भी सिर्फ उन्हीं लोगों को आसरा दे पाते हैं, जो उन्हें वहां तक लाता है। इनमें भी कुछ लोगों को ही रखने की व्यवस्था है। ज्यादातर दिव्यांग व मंदबुद्धि लोगों को आसरा नहीं मिल पाता है। ये लोग व्यवस्था और अवस्था दोनों का ही शिकार हो जाते हैं। (संवाद)
अधिकारियों के साथ बैठक कर करेंगे व्यवस्था
यह मामला मेरे संज्ञान में है। जल्द ही रैन बसेरे के लिए जगह निश्चित करने के लिए रेडक्रॉस और नगर परिषद सहित संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। जिसके बाद रैन बसेरे की व्यवस्था कराई जाएगी।
-संदीप अग्रवाल, एसडीएम, भिवानी।
विज्ञापन
भिवानी। दिनभर पेट भरने के लिए खाने की जुगत भिड़ाने में ही बीत जाता है, लेकिन रात बैचेनी भरी गुजर रही है। यह हाल लावारिस लोगों का हैं जो सर्द रातों में शहर के डिवाइडरों या फिर फुटपाथों पर बिता रहे हैं। सर्दी के आगाज के साथ ही जिला प्रशासन को ऐसे लोगों के लिए रैन बसेरों का प्रबंध करना होता है, लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी ने कोई कदम नहीं उठाए हैं। नगर परिषद और रेडक्रॉस की रैन भी अभी बसेरे से काफी दूर है, क्योंकि इनकी तरफ से भी कोई जगह निश्चित नहीं की गई है। मुसाफिरों के ठहरने के लिए भी प्रशासन ने कोई रैन बसेरा नहीं बनाया है।
ठंड के दौरान किसी की मौत न हो यह सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन का दायित्व है। यह सर्वोच्च न्यायालय के भी आदेश हैं। इसके बावजूद हर साल ठंड में काफी लोग दम तोड़ देते हैं, जबकि कागजों में उनकी मौत की अन्य कई वजह भी दर्शाई जाती है। भिवानी में काफी लोग ऐसे हैं, जिनके पास न घर है न बाहर कोई ठिकाना है। ये लोग दिन भर खानाबदोश सी जिंदगी जीने पर मजबूर रहते हैं। इन्हें जहां खाने को मिला वहां खा लिया और जहां पर बैठ गए बस वहीं रैन बिता दी। ऐसे लोगों की मुश्किलें अब कड़ाके की ठंड में बढ़ने वाली हैं। अभी रात के समय तापमान लगातार गिरावट आने लगी है। ऐसे में फुटपाथ और सड़क के डिवाइडरों पर खुले आसमान के नीचे सोना किसी खतरे से खाली नहीं हैं, क्योंकि अकेले कंबल या चद्दर में ठंड रोक पाना भी नामुमकिन हो रहा है।
विज्ञापन
बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के नजदीक रैन के लिए बसेरा जरूरी
सर्दी के आगाज के साथ ही प्रशासन की तरफ से भी रैन बसेरों को लेकर तैयारियां शुरू हो जानी चाहिए थीं। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के नजदीक इस तरह के रैन बसेरे जरूरी हैं, क्योंकि कई बार देर रात तक अनजान शहर में आने वाले मुसाफिर भी अपने ठहरने का कोई इंतजाम नहीं कर पाते हैं। उन्हें भी इनमें शरण मिलनी जरूरी है, जबकि बेघर लोगों के लिए भी रात बिताने के लिए इंतजाम अनिवार्य हैं।
विज्ञापन
ऐसी होती है रैन बसेरे में व्यवस्था
रैन बसेरे में कड़ाके की ठंड से बचाव के लिए बिस्तर, कंबल, रजाई की व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा एक रैन बसेरे में कम से कम 20 से 25 लोगों के एक साथ ठहरने की व्यवस्था भी होती है। रैन बसेरा ऐसी जगह पर बनाया जाता है, जहां कोई भी व्यक्ति आसानी से इसके अंदर शरण ले सकता है। रैन बसेरे में कोई भी व्यक्ति एक दो या इससे अधिक दिन भी रात बिता सकता है। रैन बसेरे में आने जाने वालों के लिए प्रशासन की तरफ से हेल्थ सहित अन्य व्यवस्थाएं भी की जाती हैं।
12 डिग्री के पास पहुंचा रात का पारा
रात के समय ठंड बढ़ने से न्यूनतम पारा भी 12 डिग्री तक पहुंच रहा है, जबकि अधिकतम पारा 28 डिग्री के आसपास बना हुआ है। सर्द रैन में व्यवस्था सिकुड़ रही है तो खुले आसमान के नीचे रात बिताने वालों को चैन नहीं है। घुमंतू लावारिस लोगों के पास तो पूरी तरह तन ढकने के लिए ठीक से कपड़े तक नहीं हैं, ऐसे लोग सर्द रातों में खुले में रात बिताते हैं तो उनकी जान पर भी बड़ा जोखिम है।
अपना घर भी हुआ बेगाना
कुछ सामाजिक संगठन बेसहारा और लावारिस लोगों को आसरा देते हैंँ मगर ये संगठन भी सिर्फ उन्हीं लोगों को आसरा दे पाते हैं, जो उन्हें वहां तक लाता है। इनमें भी कुछ लोगों को ही रखने की व्यवस्था है। ज्यादातर दिव्यांग व मंदबुद्धि लोगों को आसरा नहीं मिल पाता है। ये लोग व्यवस्था और अवस्था दोनों का ही शिकार हो जाते हैं। (संवाद)
अधिकारियों के साथ बैठक कर करेंगे व्यवस्था
यह मामला मेरे संज्ञान में है। जल्द ही रैन बसेरे के लिए जगह निश्चित करने के लिए रेडक्रॉस और नगर परिषद सहित संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। जिसके बाद रैन बसेरे की व्यवस्था कराई जाएगी।
-संदीप अग्रवाल, एसडीएम, भिवानी।