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Success Story: पहले चाय बेचते-बेचते शिक्षक, फिर IAS बने भिवानी के शीशराम, युवाओं के लिए बने नजीर

Mon, 05 Sep 2022 07:26 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, बहल, भिवानी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, बहल, भिवानी (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Mon, 05 Sep 2022 07:26 AM IST
सार

हरियाणा के भिवानी जिले के बहल कस्बे के शीशराम चंडीगढ़ में डिप्टी अकाउंटेंट जनरल के पद पर आसीन हैं। उन्होंने बेहद गरीब परिस्थितियों में शीशराम ने अपना बचपन गुजारा और मेहनत के बल पर शिक्षक सेवाकाल के दौरान ही सिविल सेवा के पद पर पहुंचकर क्षेत्र के उन युवाओं के लिए नजीर बने हैं।

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Sheeshram turned from tea seller to IAS after working hard
शीशराम वर्मा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

चाय बेचकर देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे नरेंद्र मोदी की कहानी तो देश में हर किसी की जुबान पर है लेकिन हरियाणा के भिवानी के बहल कस्बे के एक युवक की कहानी भी उनसे मिलती-जुलती है। जो चाय बेचते-बेचते अपनी मेहनत के मुकाम पर पहले शिक्षक बना और फिर आईएएस बनकर फिलहाल चंडीगढ़ में डिप्टी अकाउंटेंट जनरल के पद पर आसीन हैं। ऐसे प्रतिभाशाली शिक्षक का नाम है शीशराम वर्मा। 

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बेहद गरीब परिस्थितियों में शीशराम ने अपना बचपन गुजारा और मेहनत के बल पर शिक्षक सेवाकाल के दौरान ही सिविल सेवा के पद पर पहुंचकर क्षेत्र के उन युवाओं के लिए नजीर बने हैं जो गरीबी को सफलता में अड़चन मान लेते हैं। शीशराम के पिता नारायण राम ने बेहद कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते राजस्थान से आकर बहल में चाय की दुकान से परिवार का भरण-पोषण शुरू किया था।
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लेकिन, उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनका एक पुत्र ऐसा प्रतिभाशाली है जो उनका नाम क्षेत्र में रोशन करेगा। ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब बचपन में शीशराम वर्मा बहल कस्बे के बस स्टैंड पर अपने पिता की चाय की दुकान पर स्कूल टाइम के बाद हाथ बंटाते थे और अपने परिवार का गुजारा चलाते थे।
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20 साल तक शिक्षक बनकर शिक्षा की लौ जलाते रहे युवा शीशराम  
शीशराम वर्मा शुरू से ही प्रतिभाशाली थे जिनकी प्रारंभिक शिक्षा बहल के सरकारी स्कूल में हुई। वर्ष 1974 में जन्मे शीशराम अपने पिता नारायण राम व माता भगवती देवी की दस संतानों में सबसे छोटे हैं। शीशराम ने वर्ष 1993 में बारहवीं कक्षा पास करने के बाद वर्ष 1995 में ओढ़ा से जेबीटी कोर्स किया और वर्ष 1997 में वे बतौर जेबीटी अध्यापक नियुक्त हुए। उन्होंने वर्ष 1996 में स्नातक, वर्ष 1998 में पीजी, 2002 में पीजी इन पब्लिक एड, 2006 में एमफिल और वर्ष 2009 में नेट पास किया। उनका वर्ष 2010 में बतौर एसएस अध्यापक प्रमोशन हुआ और उन्होंनेे वर्ष 2013 व 2015 में एचसीएस एक्जाम क्वालीफाई किया। पर, उनका लक्ष्य तो आईएएस बनना था और इस मुकाम को उन्होंने पहले वर्ष 2016 में और बाद में वर्ष 2017 में पूरा किया। 

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परिवार ने साथ दिया, दो साल दूरी बनाई
बतौर शिक्षक, शीशराम वर्मा ने जहां विद्यार्थियों को बेहतरीन शिक्षा देने का काम किया वहीं अपने लक्ष्य को पाने के लिए कड़ा संघर्ष किया। पत्नी निर्मला देवी ने अपने पति का पूरा साथ दिया और दो वर्ष तक उनकी दिल्ली में मुखर्जी नगर में कोचिंग के दौरान पुत्र गौरव व पुत्री जया की अकेले ही देखभाल की। फिलहाल शीशराम वर्मा चंडीगढ़ में डीएजी (डिप्टी अकाउंटेंट जनरल) के पद पर कार्यरत है और जब भी बहल आते हैं तो किसी न किसी स्कूल में जाकर विद्यार्थियों को सिविल सर्विसेज में जाने के लिए प्रेरित करते हैं।

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