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बेडसोर बीमारी से पीड़ित शंकर का अब चंडीगढ़ पीजीआई में होगा इलाज, औपचारिकताएं हुई पूरी
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भिवानी। बेडसोर बीमारी से पीड़ित ढाणी चेजारान निवासी 18 वर्षीय शंकर का अब चंडीगढ़ पीजीआई में इलाज होगा। इसकी सभी औपचारिकताएं भी पूरी हो चुकी हैं। स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने भिवानी सिविल सर्जन डॉ. रघुबीर शांडिल्य से मुलाकात कर शंकर के उपचार की बात सिरे चढ़ा दी।
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन पदाधिकारियों ने चंडीगढ़ पीजीआई के सर्जन डॉ. सिद्धार्थ खरे से बात की, जिसके बाद पीजीआई के सर्जन ने शंकर के उपचार की स्वीकृति प्रदान कर दी। इसके बाद भिवानी सिविल सर्जन कार्यालय से शंकर के उपचार की सभी औपचारिकताएं पूरी करा उसे चंडीगढ़ पीजीआई रेफर करा दिया। जिसके बाद एंबुलेंस से उसे चंडीगढ़ पीजीआई में ले जाया जाएगा, जिसके तुरंत बाद उसका उपचार शुरू हो जाएगा।
फिलहाल शंकर अपने ढाणी चेजारान स्थित एक कमरे के घर में बिस्तर पर लाचार पड़ा है। स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन सदस्यों ने शंकर के लिए 40 हजार रुपये की मदद भी जुटाई थी। जिसकी राशि का चेक भी शंकर के जीजा कृष्ण व उसकी बहन को सौंप दिया था। बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि शंकर के इलाज के लिए रोहतक पीजीआई के चिकित्सकों ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए थे। जिसके बाद उसके पास चंडीगढ़ पीजीआई का ही विकल्प बचा था। यहां पर डॉ. सिद्धार्थ खरे से संगठन के माध्यम से बात की गई, जिन्होंने शंकर के इलाज की स्वीकृति दे दी। इसी के बाद उसे चंडीगढ़ पीजीआई ले जाने की तैयारी की जा रही है। संभव है उसे शनिवार सुबह चंडीगढ़ पीजीआई ले जाया जाएगा। जिसके बाद उसके शरीर में फैल रहे संक्रमण और बीमारी का सही उपचार शुरू होगा। चंडीगढ़ पीजीआई में शंकर का इलाज की सूचना पाकर उसके परिजनों की जान में भी जान आई है। दरअसल शंकर पांच बहनों में इकलौता भाई है जो पिछले एक साल से बेडसोर की वजह से पूरे शरीर पर जख्मों का संक्रमण का दर्द झेल रहा है। उसके दिमाग में ट्यूमर और रीढ़ में भी संक्रमण फैल चुका है। जिस वजह से वह बिस्तर पर पड़ा करवट भी नहीं बदल सकता है। शंकर की गंभीर बीमारी का दर्द देखकर उसकी पांचों बहनें भी बहुत दुखी हैं।
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वर्जन::
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के पदाधिकारियों ने शंकर को पीजीआई रेफर किए जाने की इच्छा जताई थी। जिसके बाद पीजीआई में शंकर के इलाज की बातचीत किए जाने के बाद उसे वहां के लिए रेफर कर दिया है। उसे एंबुलेंस से चंडीगढ़ पीजीआई भेजा जाएगा।
- डॉ. रघुबीर शांडिल्य, सिविल सर्जन भिवानी।
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स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन पदाधिकारियों ने चंडीगढ़ पीजीआई के सर्जन डॉ. सिद्धार्थ खरे से बात की, जिसके बाद पीजीआई के सर्जन ने शंकर के उपचार की स्वीकृति प्रदान कर दी। इसके बाद भिवानी सिविल सर्जन कार्यालय से शंकर के उपचार की सभी औपचारिकताएं पूरी करा उसे चंडीगढ़ पीजीआई रेफर करा दिया। जिसके बाद एंबुलेंस से उसे चंडीगढ़ पीजीआई में ले जाया जाएगा, जिसके तुरंत बाद उसका उपचार शुरू हो जाएगा।
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फिलहाल शंकर अपने ढाणी चेजारान स्थित एक कमरे के घर में बिस्तर पर लाचार पड़ा है। स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन सदस्यों ने शंकर के लिए 40 हजार रुपये की मदद भी जुटाई थी। जिसकी राशि का चेक भी शंकर के जीजा कृष्ण व उसकी बहन को सौंप दिया था। बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि शंकर के इलाज के लिए रोहतक पीजीआई के चिकित्सकों ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए थे। जिसके बाद उसके पास चंडीगढ़ पीजीआई का ही विकल्प बचा था। यहां पर डॉ. सिद्धार्थ खरे से संगठन के माध्यम से बात की गई, जिन्होंने शंकर के इलाज की स्वीकृति दे दी। इसी के बाद उसे चंडीगढ़ पीजीआई ले जाने की तैयारी की जा रही है। संभव है उसे शनिवार सुबह चंडीगढ़ पीजीआई ले जाया जाएगा। जिसके बाद उसके शरीर में फैल रहे संक्रमण और बीमारी का सही उपचार शुरू होगा। चंडीगढ़ पीजीआई में शंकर का इलाज की सूचना पाकर उसके परिजनों की जान में भी जान आई है। दरअसल शंकर पांच बहनों में इकलौता भाई है जो पिछले एक साल से बेडसोर की वजह से पूरे शरीर पर जख्मों का संक्रमण का दर्द झेल रहा है। उसके दिमाग में ट्यूमर और रीढ़ में भी संक्रमण फैल चुका है। जिस वजह से वह बिस्तर पर पड़ा करवट भी नहीं बदल सकता है। शंकर की गंभीर बीमारी का दर्द देखकर उसकी पांचों बहनें भी बहुत दुखी हैं।
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स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के पदाधिकारियों ने शंकर को पीजीआई रेफर किए जाने की इच्छा जताई थी। जिसके बाद पीजीआई में शंकर के इलाज की बातचीत किए जाने के बाद उसे वहां के लिए रेफर कर दिया है। उसे एंबुलेंस से चंडीगढ़ पीजीआई भेजा जाएगा।
- डॉ. रघुबीर शांडिल्य, सिविल सर्जन भिवानी।