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Bhiwani News: ताक पर नियम, बच्चों की जोखिम में जान, शिक्षा अधिकारी अनजान
Tue, 11 Apr 2023 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 11 Apr 2023 11:18 PM IST
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लोहड़ चौपटा में स्थित धमऱशाला।
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भिवानी। बच्चों को शिक्षा का मंदिर न केवल बच्चों के बौद्धिक ज्ञान को बढ़ाने के लिए जरूरी है, बल्कि उनकी वहां पर सुरक्षा भी अहम जरूरी है। मगर शहर के बीचोंबीच लोहड़ चौपटा में एक ऐसा अजीबोगरीब स्कूल भी चल रहा है, जिसकी मान्यता की बात तो दूर बच्चों की कक्षाएं लगाने के लिए भी पौने पांच साल पहले कंडम घोषित हो चुकी धर्मशाला का इस्तेमाल किया जा रहा है।
धर्मशाला के गेट पर भी बड़ा सा बोर्ड लगाया हुआ है। जिस पर लिखा है कि 40 साल पुराना ये भवन कभी भी ढह सकता है। इसके अंदर प्रवेश करना जान जोखिम में डालना है। इसलिए प्रवेश बंद है। मगर ठीक इसी बोर्ड के नीचे निजी स्कूल का बोर्ड लगा है और अंदर बच्चों की कक्षाएं भी लगाई जा रही हैं। ताक पर नियम है तो बच्चों की जान पर भी बड़ा जोखिम मंडरा रहा है। वहीं शिक्षा अधिकारी अनजान बने हैं। खंडहर धर्मशाला में ये चेतावनी लगाए भी पौने पांच साल हो चुके हैं, मगर अभी न प्रशासन जागा है न शिक्षा विभाग के अधिकारी चेते हैं। जबकि शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा के मानकों को लेकर उच्चतम न्यायालय भी सख्त आदेश दे चुका है।
शहर के लोहड़ चौपटा में एक निजी स्कूल के नाम का बोर्ड एक जर्जर धर्मशाला के गेट पर लगा है। इस विद्यालय में करीब 70 बच्चों की नर्सरी से दसवीं तक की कक्षाएं भी संचालित हो रही हैं। बोर्ड पर स्कूल की मान्यता 1995 से मान्यता भी दर्शाई गई है। बताया जा रहा है कि जुलाई 2018 में इस धर्मशाला के गेट पर सार्वजनिक सूचना लगाई गई थी। जिस पर लिखा गया कि 40 साल पुरानी इस इमारत की हालत खस्ताहाल हो चुकी है और यह कभी भी ढह सकती है, इसलिए इसलिए इसका किसी भी प्रयोजन के लिए इस्तेमाल बंद कर दिया है। मगर इसी बोर्ड के ठीक नीचे स्कूल का नाम लिखा है। जबकि बच्चों के दाखिला प्रकिया भी चल रही है। इस विद्यालय का कुछ साल पहले शिक्षा विभाग की टीम ने गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को बंद कराने के दौरान भी निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण की रिपोर्ट भी कमेटी के अधिकारियों ने शिक्षा विभाग को दी थी। मगर आज तक इस विद्यालय पर कार्रवाई नहीं हुई। अब भी यहां बच्चों के सुरक्षा मानकों और नियमों को ताक पर रखकर जर्जरहाल धर्मशाला भवन में कक्षाएं लग रही हैं। जिसकी तरफ न तो जिला प्रशासन का कोई ध्यान है न ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अब तक कोई संज्ञान लिया है। ऐसे में अभिभावक भी अपने बच्चों के सिर पर मंडरा रहे खतरे को नजरअंदाज कर बच्चों को यहां पढ़ाई के लिए भेज रहे हैं। संवाद
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धर्मशाला के बाहर लगी सार्वजनिक सूचना
धर्मशाला की यह इमारत 40 साल पुरानी होने से खस्ता हालत में है। इमारत कभी भी ढह सकती है। इमारत को किसी भी प्रयोजन में इस्तेमाल बंद कर दिया है। हम जनता से विनती करते हैं कि आप अपनी जान जोखिम में डालकर इस इमारत में प्रवेश न करें। इससे आपकी जान एवं माल की हानि पहुंच सकती है। अगर कोई दुर्घटना होती है तो हम जिम्मेदार नहीं हैं। यह बोर्ड 16 जुलाई 2018 को लगाया था।
गली मोहल्लों में रिहायशी मकानों में भी चल रहे हैं प्ले और दसवीं तक के स्कूल
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में आया है कि गली मोहल्लों और रिहायशी मकानों के अंदर भी प्ले व दसवीं कक्षा तक के स्कूल बिना मान्यता के ही चलाए जा रहे हैं। अब ऐसे गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग निरीक्षण के लिए टीम गठित कर इन्हें बंद कराने का अभियान चलाएगा। जिसके लिए विभाग रिपोर्ट तैयार कराने में जुटा है। ऐसे स्कूलों की भी पहचान कराई जा रही है, जो नियमों व बिना किसी अनुमति के ही संचालित किए जा रहे हैं।
किसी भी धर्मशाला में कोई स्कूल का संचालन नहीं कर सकता है। ऐसे स्कूल जो गली मोहल्लों के रिहायशी मकानों व धर्मशाला में चल रहे हैं। उन पर तुरंत कार्रवाई कराई जाएगी। ऐसा करने वालों के खिलाफ विभाग कानूनी कार्रवाई भी कराएगा।
- नरेश महता, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी भिवानी।
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धर्मशाला के गेट पर भी बड़ा सा बोर्ड लगाया हुआ है। जिस पर लिखा है कि 40 साल पुराना ये भवन कभी भी ढह सकता है। इसके अंदर प्रवेश करना जान जोखिम में डालना है। इसलिए प्रवेश बंद है। मगर ठीक इसी बोर्ड के नीचे निजी स्कूल का बोर्ड लगा है और अंदर बच्चों की कक्षाएं भी लगाई जा रही हैं। ताक पर नियम है तो बच्चों की जान पर भी बड़ा जोखिम मंडरा रहा है। वहीं शिक्षा अधिकारी अनजान बने हैं। खंडहर धर्मशाला में ये चेतावनी लगाए भी पौने पांच साल हो चुके हैं, मगर अभी न प्रशासन जागा है न शिक्षा विभाग के अधिकारी चेते हैं। जबकि शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा के मानकों को लेकर उच्चतम न्यायालय भी सख्त आदेश दे चुका है।
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शहर के लोहड़ चौपटा में एक निजी स्कूल के नाम का बोर्ड एक जर्जर धर्मशाला के गेट पर लगा है। इस विद्यालय में करीब 70 बच्चों की नर्सरी से दसवीं तक की कक्षाएं भी संचालित हो रही हैं। बोर्ड पर स्कूल की मान्यता 1995 से मान्यता भी दर्शाई गई है। बताया जा रहा है कि जुलाई 2018 में इस धर्मशाला के गेट पर सार्वजनिक सूचना लगाई गई थी। जिस पर लिखा गया कि 40 साल पुरानी इस इमारत की हालत खस्ताहाल हो चुकी है और यह कभी भी ढह सकती है, इसलिए इसलिए इसका किसी भी प्रयोजन के लिए इस्तेमाल बंद कर दिया है। मगर इसी बोर्ड के ठीक नीचे स्कूल का नाम लिखा है। जबकि बच्चों के दाखिला प्रकिया भी चल रही है। इस विद्यालय का कुछ साल पहले शिक्षा विभाग की टीम ने गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को बंद कराने के दौरान भी निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण की रिपोर्ट भी कमेटी के अधिकारियों ने शिक्षा विभाग को दी थी। मगर आज तक इस विद्यालय पर कार्रवाई नहीं हुई। अब भी यहां बच्चों के सुरक्षा मानकों और नियमों को ताक पर रखकर जर्जरहाल धर्मशाला भवन में कक्षाएं लग रही हैं। जिसकी तरफ न तो जिला प्रशासन का कोई ध्यान है न ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने अब तक कोई संज्ञान लिया है। ऐसे में अभिभावक भी अपने बच्चों के सिर पर मंडरा रहे खतरे को नजरअंदाज कर बच्चों को यहां पढ़ाई के लिए भेज रहे हैं। संवाद
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धर्मशाला के बाहर लगी सार्वजनिक सूचना
धर्मशाला की यह इमारत 40 साल पुरानी होने से खस्ता हालत में है। इमारत कभी भी ढह सकती है। इमारत को किसी भी प्रयोजन में इस्तेमाल बंद कर दिया है। हम जनता से विनती करते हैं कि आप अपनी जान जोखिम में डालकर इस इमारत में प्रवेश न करें। इससे आपकी जान एवं माल की हानि पहुंच सकती है। अगर कोई दुर्घटना होती है तो हम जिम्मेदार नहीं हैं। यह बोर्ड 16 जुलाई 2018 को लगाया था।
गली मोहल्लों में रिहायशी मकानों में भी चल रहे हैं प्ले और दसवीं तक के स्कूल
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के संज्ञान में आया है कि गली मोहल्लों और रिहायशी मकानों के अंदर भी प्ले व दसवीं कक्षा तक के स्कूल बिना मान्यता के ही चलाए जा रहे हैं। अब ऐसे गैर मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग निरीक्षण के लिए टीम गठित कर इन्हें बंद कराने का अभियान चलाएगा। जिसके लिए विभाग रिपोर्ट तैयार कराने में जुटा है। ऐसे स्कूलों की भी पहचान कराई जा रही है, जो नियमों व बिना किसी अनुमति के ही संचालित किए जा रहे हैं।
किसी भी धर्मशाला में कोई स्कूल का संचालन नहीं कर सकता है। ऐसे स्कूल जो गली मोहल्लों के रिहायशी मकानों व धर्मशाला में चल रहे हैं। उन पर तुरंत कार्रवाई कराई जाएगी। ऐसा करने वालों के खिलाफ विभाग कानूनी कार्रवाई भी कराएगा।
- नरेश महता, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी भिवानी।