{"_id":"5d2f78a58ebc3e6cda5e72f0","slug":"ruins-building-bhiwani-news-rtk5054605160","type":"story","status":"publish","title_hn":"खंडहर धर्मशाला में चल रहा अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूल, 150 बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खंडहर धर्मशाला में चल रहा अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूल, 150 बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़
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यह भवन 40 वर्ष पुराना है और कंडम घोषित किया जा चुका है। इसके अंदर न जाए क्योंकि कभी यह गिर सकता है। यह चेतावनी लोहड़ चौपटा में भोडूका धर्मशाला के बाहर लगी है। इसके बाद भी इस कंडम भवन में कक्षा पहली से दसवीं तक निजी स्कूल चल रहा है। जिसमें करीब 150 बच्चे पढ़ रहे हैं। खुलेआम बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। यह देख यहां निरीक्षण के लिए पहुंची प्रिंसिपल की टीम भी हैरान रही। इसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।
जिलेभर में चल रहे अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों के निरीक्षण कर मान्यता की जांच के लिए शिक्षा विभाग की ओर से टीमों का गठन किया गया है। ब्लॉक अनुसार खंड शिक्षा अधिकारी को प्रिंसिपल की टीमें गठित कर निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। इसके तहत बुधवार को भिवानी जिले में भी टीमों ने प्राइवेट स्कूलों का निरीक्षण किया और उनकी मान्यता संबंधित दस्तावेजों की जांच की। भिवानी खंड में प्रिसिंपलों ने 44 अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में पहुंचकर निरीक्षण किया। एक टीम में दो प्रिसिंपल शामिल किए गए थे, इस लिहाज से 22 टीमें निरीक्षण के लिए बुधवार सुबह एक ही साथ निकली। विभाग द्वारा स्कूलों के निरीक्षण की भनक लगने के बाद अधिकांश निजी स्कूल तो ताला बंद कर रफूचक्कर हो गए। कई स्कूलों ने जांच कमेटी के समक्ष अपना रिकार्ड पेश कर दिया, जबकि कुछ स्कूलों ने कोई दस्तावेज टीम के सम्मुख प्रस्तुत नहीं किए, जिसकी रिपोर्ट भी उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
पांच साल से धर्मशाला में चल रहा स्कूल
कंडम घोषित हो चुकी धर्मशाला में पिछले पांच साल से स्कूल चल रहा है। यह स्कूल 10वीं कक्षा तक है और इसमें करीब 150 बच्चे हैं। उप प्राचार्या संतोष बंसल ने बताया कि उनके स्कूल का भवन निर्माणाधीन है और अगले दो-तीन महीने में पूरा हो जाएगा। तब तक यहां किराये पर स्कूल चल रहा है।
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कहीं बैठने की जगह नहीं तो आग से सुरक्षा के नहीं कोई प्रबंध
निरीक्षण के दौरान अधिकांश अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में बच्चों के लिए निर्धारित मापदंड के अनुसार बैठने की जगह तक नहीं मिली तो अधिकांश स्कूलों के पास आगजनी से सुरक्षा के भी कोई प्रबंध दिखाई नहीं दिए। ऐसे में अगर कोई हादसा होता है तो आखिर उसका कौन जिम्मेदार होगा।
बवानीखेड़ा में 12 से अधिक स्कूलों का निरीक्षण
बवानीखेड़ा खंड में भी अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के निरीक्षण के लिए करीब दस टीमों का गठन किया हुआ था। जिन्होंने 12 से अधिक अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में पहुंचकर व्यवस्था व मान्यता संबंधी दस्तावेज जांचे। हालांकि टीम ने अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी, जिसमें खामियों का खुलासा नहीं हुआ है। तोशाम में आठ टीमों ने 16 स्कूलों का निरीक्षण किया।
गैर मान्यता व अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के कोई प्रबंध तक नहीं हैं। इसी के चलते स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन ने इस मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जिसकी सुनवाई 19 जुलाई को होनी हैं। सरकार इससे पहले इन स्कूलों को बंद कराने की कागजी तैयारी में जुटी हैं, जबकि धरातल पर धड़ल्ले से ये स्कूल नियमों को ताक पर रखकर खुले हैं। ये बात न्यायालय में मजबूती से तथ्यों सहित रखी जाएगी।
-बृजपाल परमार, प्रदेश अध्यक्ष स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन।
सभी खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों का खंड स्तर पर विभिन्न टीमों द्वारा जांच कराई जा रही हैं, जिसकी रिपोर्ट एकत्रित की जा रही हैं, रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।
-जयप्रकाश सभ्रवाल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी भिवानी।
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जिलेभर में चल रहे अस्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों के निरीक्षण कर मान्यता की जांच के लिए शिक्षा विभाग की ओर से टीमों का गठन किया गया है। ब्लॉक अनुसार खंड शिक्षा अधिकारी को प्रिंसिपल की टीमें गठित कर निरीक्षण के निर्देश दिए हैं। इसके तहत बुधवार को भिवानी जिले में भी टीमों ने प्राइवेट स्कूलों का निरीक्षण किया और उनकी मान्यता संबंधित दस्तावेजों की जांच की। भिवानी खंड में प्रिसिंपलों ने 44 अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में पहुंचकर निरीक्षण किया। एक टीम में दो प्रिसिंपल शामिल किए गए थे, इस लिहाज से 22 टीमें निरीक्षण के लिए बुधवार सुबह एक ही साथ निकली। विभाग द्वारा स्कूलों के निरीक्षण की भनक लगने के बाद अधिकांश निजी स्कूल तो ताला बंद कर रफूचक्कर हो गए। कई स्कूलों ने जांच कमेटी के समक्ष अपना रिकार्ड पेश कर दिया, जबकि कुछ स्कूलों ने कोई दस्तावेज टीम के सम्मुख प्रस्तुत नहीं किए, जिसकी रिपोर्ट भी उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
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पांच साल से धर्मशाला में चल रहा स्कूल
कंडम घोषित हो चुकी धर्मशाला में पिछले पांच साल से स्कूल चल रहा है। यह स्कूल 10वीं कक्षा तक है और इसमें करीब 150 बच्चे हैं। उप प्राचार्या संतोष बंसल ने बताया कि उनके स्कूल का भवन निर्माणाधीन है और अगले दो-तीन महीने में पूरा हो जाएगा। तब तक यहां किराये पर स्कूल चल रहा है।
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कहीं बैठने की जगह नहीं तो आग से सुरक्षा के नहीं कोई प्रबंध
निरीक्षण के दौरान अधिकांश अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में बच्चों के लिए निर्धारित मापदंड के अनुसार बैठने की जगह तक नहीं मिली तो अधिकांश स्कूलों के पास आगजनी से सुरक्षा के भी कोई प्रबंध दिखाई नहीं दिए। ऐसे में अगर कोई हादसा होता है तो आखिर उसका कौन जिम्मेदार होगा।
बवानीखेड़ा में 12 से अधिक स्कूलों का निरीक्षण
बवानीखेड़ा खंड में भी अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों के निरीक्षण के लिए करीब दस टीमों का गठन किया हुआ था। जिन्होंने 12 से अधिक अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में पहुंचकर व्यवस्था व मान्यता संबंधी दस्तावेज जांचे। हालांकि टीम ने अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी, जिसमें खामियों का खुलासा नहीं हुआ है। तोशाम में आठ टीमों ने 16 स्कूलों का निरीक्षण किया।
गैर मान्यता व अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के कोई प्रबंध तक नहीं हैं। इसी के चलते स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन ने इस मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जिसकी सुनवाई 19 जुलाई को होनी हैं। सरकार इससे पहले इन स्कूलों को बंद कराने की कागजी तैयारी में जुटी हैं, जबकि धरातल पर धड़ल्ले से ये स्कूल नियमों को ताक पर रखकर खुले हैं। ये बात न्यायालय में मजबूती से तथ्यों सहित रखी जाएगी।
-बृजपाल परमार, प्रदेश अध्यक्ष स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन।
सभी खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से अस्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों का खंड स्तर पर विभिन्न टीमों द्वारा जांच कराई जा रही हैं, जिसकी रिपोर्ट एकत्रित की जा रही हैं, रिपोर्ट के आधार पर ही कार्रवाई की जाएगी।
-जयप्रकाश सभ्रवाल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी भिवानी।