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Bhiwani News: ट्रेन में गायब रेल यात्रियों के मोबाइल को सीईआईआर पोर्टल से ढूंढ़ेगी आरपीएफ
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भिवानी का रेलवे स्टेशन।
अशोक भारद्वाज
भिवानी। अब ट्रेनों में सफर के दौरान किसी यात्री का मोबाइल फोन गुम हो जाता है तो उसे घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि गायब हुए मोबाइल ढूंढ़ने के लिए रेलवे सुरक्षा बल की ओर से दूरसंचार विभाग के पोर्टल का सहारा लिया जाएगा। इससे यात्रियों के ट्रेन में सफर करते समय गायब हुए मोबाइल फोन को आसानी से ढूंढ़ा जा सकेगा। रेलवे की ओर से इस पहल को पूरे भारत में लागू किए जाने के बाद करोड़ों रेल यात्रियों को फायदा मिलेगा।
दरअसल, ट्रेनों में गायब मोबाइल फोन को ढूंढ़ निकालने के लिए रेलवे सुरक्षा बल ने दूरसंचार विभाग से हाथ मिलाया है। इसके तहत आरपीएफ ने दूरसंचार विभाग के सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (सीईआईआर) पोर्टल के साथ साझेदारी की है। यात्रा के दौरान अपने गुम मोबाइल फोन प्राप्त करने के लिए यात्री इसकी रिपोर्टिंग रेल मदद या 139 डायल के जरिये कर सकते हैं। यदि कोई यात्री एफआईआर दर्ज नहीं कराना चाहते, तो उन्हें सीईआईआर पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराने का भी विकल्प मिलेगा।
सीईआईआर पंजीकरण का विकल्प चुनने पर आरपीएफ की जोनल साइबर सेल शिकायत को सीईआईआर पोर्टल पर दर्ज करेगी और आवश्यक विवरण दर्ज करने के बाद डिवाइस को ब्लॉक कर देगी। जिससे फोन किसी काम का नहीं रहेगा।
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आरपीएफ की सलाह के बाद फाेन न लौटाने पर होगी एफआईआर दर्ज
अगर नई सिम के साथ खोए हुए फोन का पता चलता है, तो फोन को उपयोग करने वाले व्यक्ति को निकटतम आरपीएफ केंद्र पर लौटाने की सलाह दी जाएगी। इसके बाद मोबाइल का असली मालिक फोन के आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करके अपना फोन वापस ले सकता है। यदि फोन चुराने वाला व्यक्ति आरपीएफ की अनुपालन नहीं करता है तो इस स्थिति में रेलवे सुरक्षा बल एफआईआर दर्ज कर सकता है। इसके बाद मामला संबंधित जिले की पुलिस को भेजा जा सकता है। वहीं फोन मिलने के बाद शिकायतकर्ता सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से फोन को अन ब्लॉक करने का अनुरोध भी कर सकता है। यदि शिकायतकर्ता पोर्टल का सही उपयोग नहीं कर पर रहा है तो इस स्थिति में जरूरत पड़ने पर आरपीएफ से वह सहायता ले सकता है।
क्या है सीईआईआर पोर्टल
सीईआईआर पोर्टल दूरसंचार विभाग की ओर से शुरू किया गया है। यह मोबाइल फोन को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो खोए या चोरी हुए उपकरणों को ब्लॉक करने, ट्रैक करने और प्रबंधित करने के लिए तैयार किया गया है। इसके जरिये आरपीएफ अब खोए या गायब हुए मोबाइल फोन के आईएमआई नंबर को ब्लॉक करके कर देगा। ब्लॉक होने के बाद फोन किसी काम का नहीं रहेगा। इससे फोन चोरी होने की घटनाओं पर विराम लग सकेगा।
मई 2024 में रेलवे ने सीईआईआर पोर्टल का किया था अध्ययन
मई 2024 में आरपीएफ ने नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसमें यह पता कि गया कि सीईआईआर पोर्टल का सक्रिय उपयोग किस तरह से किया जा सकें। साथ ही, आरपीएफ को इस पोर्टल की उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया जा सके। पोर्टल के अध्ययन में रेलवे ने पाया कि इस प्रोजेक्ट के तहत कई खोए हुए मोबाइल फोन की सफल रिकवरी हुई है। साथ ही मोबाइल चोरी में शामिल व्यक्तियों को भी पकड़ा गया। इसके बाद आरपीएफ को भी विश्वास हुआ कि यह पोर्टल रेल यात्रियों के फोन को ढूंढ़ने में मददगार साबित होगा।
दूरसंचार विभाग के साथ मिलकर सीईआईआर पोर्टल को संचालित करने की आरपीएफ की साझेदारी रेलवे सुरक्षा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। डिजिटल तकनीक का उपयोग करके यात्रियों को उनके खोए या गायब हुए मोबाइल फोन को प्राप्त किया जाएगा। रेलवे के इस कदम से रेल यात्रियों के बीच रेलवे के प्रति ओर अधिक विश्वास पैदा होगा। - मनोज यादव, महानिदेशक, रेलवे सुरक्षा बल।
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भिवानी। अब ट्रेनों में सफर के दौरान किसी यात्री का मोबाइल फोन गुम हो जाता है तो उसे घबराने की जरूरत नहीं, क्योंकि गायब हुए मोबाइल ढूंढ़ने के लिए रेलवे सुरक्षा बल की ओर से दूरसंचार विभाग के पोर्टल का सहारा लिया जाएगा। इससे यात्रियों के ट्रेन में सफर करते समय गायब हुए मोबाइल फोन को आसानी से ढूंढ़ा जा सकेगा। रेलवे की ओर से इस पहल को पूरे भारत में लागू किए जाने के बाद करोड़ों रेल यात्रियों को फायदा मिलेगा।
दरअसल, ट्रेनों में गायब मोबाइल फोन को ढूंढ़ निकालने के लिए रेलवे सुरक्षा बल ने दूरसंचार विभाग से हाथ मिलाया है। इसके तहत आरपीएफ ने दूरसंचार विभाग के सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (सीईआईआर) पोर्टल के साथ साझेदारी की है। यात्रा के दौरान अपने गुम मोबाइल फोन प्राप्त करने के लिए यात्री इसकी रिपोर्टिंग रेल मदद या 139 डायल के जरिये कर सकते हैं। यदि कोई यात्री एफआईआर दर्ज नहीं कराना चाहते, तो उन्हें सीईआईआर पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराने का भी विकल्प मिलेगा।
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सीईआईआर पंजीकरण का विकल्प चुनने पर आरपीएफ की जोनल साइबर सेल शिकायत को सीईआईआर पोर्टल पर दर्ज करेगी और आवश्यक विवरण दर्ज करने के बाद डिवाइस को ब्लॉक कर देगी। जिससे फोन किसी काम का नहीं रहेगा।
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आरपीएफ की सलाह के बाद फाेन न लौटाने पर होगी एफआईआर दर्ज
अगर नई सिम के साथ खोए हुए फोन का पता चलता है, तो फोन को उपयोग करने वाले व्यक्ति को निकटतम आरपीएफ केंद्र पर लौटाने की सलाह दी जाएगी। इसके बाद मोबाइल का असली मालिक फोन के आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करके अपना फोन वापस ले सकता है। यदि फोन चुराने वाला व्यक्ति आरपीएफ की अनुपालन नहीं करता है तो इस स्थिति में रेलवे सुरक्षा बल एफआईआर दर्ज कर सकता है। इसके बाद मामला संबंधित जिले की पुलिस को भेजा जा सकता है। वहीं फोन मिलने के बाद शिकायतकर्ता सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से फोन को अन ब्लॉक करने का अनुरोध भी कर सकता है। यदि शिकायतकर्ता पोर्टल का सही उपयोग नहीं कर पर रहा है तो इस स्थिति में जरूरत पड़ने पर आरपीएफ से वह सहायता ले सकता है।
क्या है सीईआईआर पोर्टल
सीईआईआर पोर्टल दूरसंचार विभाग की ओर से शुरू किया गया है। यह मोबाइल फोन को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जो खोए या चोरी हुए उपकरणों को ब्लॉक करने, ट्रैक करने और प्रबंधित करने के लिए तैयार किया गया है। इसके जरिये आरपीएफ अब खोए या गायब हुए मोबाइल फोन के आईएमआई नंबर को ब्लॉक करके कर देगा। ब्लॉक होने के बाद फोन किसी काम का नहीं रहेगा। इससे फोन चोरी होने की घटनाओं पर विराम लग सकेगा।
मई 2024 में रेलवे ने सीईआईआर पोर्टल का किया था अध्ययन
मई 2024 में आरपीएफ ने नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे में एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसमें यह पता कि गया कि सीईआईआर पोर्टल का सक्रिय उपयोग किस तरह से किया जा सकें। साथ ही, आरपीएफ को इस पोर्टल की उपयोगिता के बारे में विस्तार से बताया जा सके। पोर्टल के अध्ययन में रेलवे ने पाया कि इस प्रोजेक्ट के तहत कई खोए हुए मोबाइल फोन की सफल रिकवरी हुई है। साथ ही मोबाइल चोरी में शामिल व्यक्तियों को भी पकड़ा गया। इसके बाद आरपीएफ को भी विश्वास हुआ कि यह पोर्टल रेल यात्रियों के फोन को ढूंढ़ने में मददगार साबित होगा।
दूरसंचार विभाग के साथ मिलकर सीईआईआर पोर्टल को संचालित करने की आरपीएफ की साझेदारी रेलवे सुरक्षा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। डिजिटल तकनीक का उपयोग करके यात्रियों को उनके खोए या गायब हुए मोबाइल फोन को प्राप्त किया जाएगा। रेलवे के इस कदम से रेल यात्रियों के बीच रेलवे के प्रति ओर अधिक विश्वास पैदा होगा। - मनोज यादव, महानिदेशक, रेलवे सुरक्षा बल।