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Bhiwani News: सरकारी खजाने में करोड़ों का राजस्व देने वाले गांव खानक के निवासी पानी खरीदकर बुझा रहे प्यास
Thu, 23 May 2024 10:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 23 May 2024 10:42 PM IST
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गांव खानक में टैंक से पानी भरती महिलाएं।
तोशाम। प्रदेश के खजाने में करोड़ों का राजस्व देने वाले गांव खानक के ग्रामीणों को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण पानी के टैंकर खरीदकर प्यास बुझाने के लिए मजबूर हैं।
नहरी पानी के अभाव में अधिकतर गांवों में जलघर के टैंकों में पानी की मात्रा इस कदर है कि पानी की राशनिंग करनी पड़ रही है। कहीं चार तो कहीं पांच से 6 दिन में सप्लाई आ रही है। ऐसे में पानी की समस्या से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पानी की बढ़ती किल्लत के कारण लोगों को पानी का टैंकर मंगवाकर प्यास बुझानी पड़ रही है।
गांव खानक के ग्रामीणों ने बताया कि वे बचपन से ही इस समस्या को देख रहे हैं। यहां राजस्व की आमदनी तो है लेकिन पीने के पानी का संकट हमेशा रहता है। भीषण गर्मी में यह संकट ज्यादा बढ़ जाता है। पांच सौ से आठ सौ रुपये का पानी का एक टैंकर मंगवाना पड़ता है। जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्मी आने से पहले ही कोई ऐसी व्यवस्था नहीं की जाती है कि लोगों को पानी के लिए परेशान न होना पड़े। जलघर के टैंक में इस समय मामूली पानी है। पांच दिन में सप्लाई आ रही है। टैंक में पानी खत्म होने के बाद वह भी नहीं आएगा।
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खानक में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार करवा दिया गया है। गांव में पाइपलाइन भी बिछाई गई है। नहरी पानी के अभाव में पेयजल समस्या है। वीएनसी नहर से गांव दरियापुर से खानक तक लाइन लगाने के लिए टेंडर हो गया है। आचार संहिता के चलते टेंडर खुला नहीं है। आचार संहिता हटने के बाद काम शुरू होगा। इसके बाद खानक में पेयजल संकट नहीं रहेगा।
-विक्रम पूनिया, एसडीओ, पेयजल शाखा।
खानक पहाड़ से सरकार को सालाना करोड़ों की आमदनी होती है। इस आमदनी से अगर कुछ पैसा गांव के विकास और पेयजल जरूरतों को पूरा कराने में लगाया जाए तो यहां के वारे न्यारे हो सकते हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। पिछले काफी दशकों से यहां पानी की गंभीर और बड़ी समस्या रही हैं, जिसका निदान अब तक नहीं हुआ है।
-कांशीराम वर्मा, खानक निवासी।
खानक को नीले पत्थर की खान कहा जाता है, ये पत्थर इतना कीमती है कि इससे बढि़या निर्माण सामग्री देश में और कहीं नहीं है। बावजूद इसके यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। जिस पर सरकार का ध्यान नहीं गया है। यहां पानी पेजयल की बड़ी समस्या है। इसका निदान सरकार को तत्काल करना चाहिए।
-राजेन्द्र अग्रवाल, खानक निवासी।
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नहरी पानी के अभाव में अधिकतर गांवों में जलघर के टैंकों में पानी की मात्रा इस कदर है कि पानी की राशनिंग करनी पड़ रही है। कहीं चार तो कहीं पांच से 6 दिन में सप्लाई आ रही है। ऐसे में पानी की समस्या से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पानी की बढ़ती किल्लत के कारण लोगों को पानी का टैंकर मंगवाकर प्यास बुझानी पड़ रही है।
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गांव खानक के ग्रामीणों ने बताया कि वे बचपन से ही इस समस्या को देख रहे हैं। यहां राजस्व की आमदनी तो है लेकिन पीने के पानी का संकट हमेशा रहता है। भीषण गर्मी में यह संकट ज्यादा बढ़ जाता है। पांच सौ से आठ सौ रुपये का पानी का एक टैंकर मंगवाना पड़ता है। जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से गर्मी आने से पहले ही कोई ऐसी व्यवस्था नहीं की जाती है कि लोगों को पानी के लिए परेशान न होना पड़े। जलघर के टैंक में इस समय मामूली पानी है। पांच दिन में सप्लाई आ रही है। टैंक में पानी खत्म होने के बाद वह भी नहीं आएगा।
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खानक में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार करवा दिया गया है। गांव में पाइपलाइन भी बिछाई गई है। नहरी पानी के अभाव में पेयजल समस्या है। वीएनसी नहर से गांव दरियापुर से खानक तक लाइन लगाने के लिए टेंडर हो गया है। आचार संहिता के चलते टेंडर खुला नहीं है। आचार संहिता हटने के बाद काम शुरू होगा। इसके बाद खानक में पेयजल संकट नहीं रहेगा।
-विक्रम पूनिया, एसडीओ, पेयजल शाखा।
खानक पहाड़ से सरकार को सालाना करोड़ों की आमदनी होती है। इस आमदनी से अगर कुछ पैसा गांव के विकास और पेयजल जरूरतों को पूरा कराने में लगाया जाए तो यहां के वारे न्यारे हो सकते हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। पिछले काफी दशकों से यहां पानी की गंभीर और बड़ी समस्या रही हैं, जिसका निदान अब तक नहीं हुआ है।
-कांशीराम वर्मा, खानक निवासी।
खानक को नीले पत्थर की खान कहा जाता है, ये पत्थर इतना कीमती है कि इससे बढि़या निर्माण सामग्री देश में और कहीं नहीं है। बावजूद इसके यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। जिस पर सरकार का ध्यान नहीं गया है। यहां पानी पेजयल की बड़ी समस्या है। इसका निदान सरकार को तत्काल करना चाहिए।
-राजेन्द्र अग्रवाल, खानक निवासी।