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Bhiwani News: पूर्व सचिव संजय तंवर ने बार में रिकॉर्ड गायब मामले को बताया, रंजिश में उठाया कदम
Wed, 09 Apr 2025 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 09 Apr 2025 11:04 PM IST
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भिवानी। जिला बार एसोसिएशन भिवानी के नवनियुक्त पदाधिकारियों की ओर से जिला बार में तीन साल के पुराने रिकॉर्ड गायब होने के मामले में अब पूर्व बार सचिव संजय तंवर ने अपनी सफाई दी है। इस बारे में पूर्व सचिव संजय तंवर ने उन पर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि रंजिशन इस मामले में उनका नाम बदनाम किया जा रहा है, जबकि उनके कार्यकाल का रिकॉर्ड पूरी तरह से साफ, ईमानदार एवं निष्पक्ष था।
वहीं, बार प्रधान एडवोकेट संदीप तंवर हालुवासिया ने कहा कि बार में तीन साल पुराना रिकॉर्ड गायब है। अपना पीछा छुड़वाने के लिए ही पूर्व पदाधिकारी एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जबकि नई कार्यकारिणी को बार का तीन साल पुराना रिकॉर्ड नहीं मिला है। अब बार में पुराना रिकॉर्ड को लेकर राजनीति भी गरमाने लगी है।
जिला बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव संजय तंवर ने कहा कि वे वर्ष 2021-22 के लिए सचिव के पद पर नियुक्त हुए थे। जब उनका कार्यकाल पूरा हुआ तो उन्होंने पूरे वर्ष का लेखा-जोखा जिला बार एसोसिएशन की बैठक बुलाकर चुनाव कमेटी के चेयरमैन को सौंप दिया था व उसकी एक कॉपी लाइब्रेरी में रखवाई थी। उनके बाद तीन अन्य पदाधिकारी भी बार में चुने जा चुके हैं। इनमें से किसी ने भी रिकॉर्ड न होने की बात कभी नहीं कही।
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संजय तंवर ने बताया कि इन तीन वर्षों के दौरान जिला बार एसोसिएशन द्वारा उनकी कार्यप्रणाली पर किसी प्रकार कोई प्रश्न चिह्न नहीं उठाया गया, लेकिन तीन वर्षों बाद उनके कार्यकाल का रिकॉर्ड गायब होने जैसे गंभीर आरोप उन पर लग रहे हैं, जो कि पूरी तरह से निराधार व रंजिशन है। जबकि जिला बार एसोसिएशन में सबसे अधिक विकास कार्य उनके ही कार्यकाल में हुए थे, चाहे वो मीटिंग हॉल का नवीनीकरण हो, लाइब्रेरी, वॉशरूम, पार्किंग सहित अन्य विकास कार्य हो।
जिला बार में पिछले तीन साल का रिकॉर्ड गायब है। अपना पीछा छुड़ाने के लिए एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। पुराना रिकॉर्ड वर्तमान बार कार्यकारिणी को नहीं मिला है। पूर्व सचिव संजय तंवर बार की लाइब्रेरी में उनके कार्यकाल की रिकॉर्ड की कॉपी होने की बात कह रहे हैं, उसमें सिर्फ आय और खर्च के संबंध में ही लिखा है जबकि आमदनी और खर्च के विवरण से जुड़े बिल, बाउचर और अन्य रिकॉर्ड का कोई भी दस्तावेज मौजूद नहीं है। इसे रिकॉर्ड नहीं कहा जा सकता है। तीन साल का रिकॉर्ड किसके पास और कहां है यह जांच का विषय बन गया है। इस संबंध में बार कोंसिल को भी लिखा जा चुका है। रिकॉर्ड गायब होने के पीछे बड़ी साजिश या फिर बड़ा घोटाला भी हो सकता है। -संदीप तंवर हालुवासिया, प्रधान, जिला बार एसोसिएशन, भिवानी।
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वहीं, बार प्रधान एडवोकेट संदीप तंवर हालुवासिया ने कहा कि बार में तीन साल पुराना रिकॉर्ड गायब है। अपना पीछा छुड़वाने के लिए ही पूर्व पदाधिकारी एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जबकि नई कार्यकारिणी को बार का तीन साल पुराना रिकॉर्ड नहीं मिला है। अब बार में पुराना रिकॉर्ड को लेकर राजनीति भी गरमाने लगी है।
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जिला बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव संजय तंवर ने कहा कि वे वर्ष 2021-22 के लिए सचिव के पद पर नियुक्त हुए थे। जब उनका कार्यकाल पूरा हुआ तो उन्होंने पूरे वर्ष का लेखा-जोखा जिला बार एसोसिएशन की बैठक बुलाकर चुनाव कमेटी के चेयरमैन को सौंप दिया था व उसकी एक कॉपी लाइब्रेरी में रखवाई थी। उनके बाद तीन अन्य पदाधिकारी भी बार में चुने जा चुके हैं। इनमें से किसी ने भी रिकॉर्ड न होने की बात कभी नहीं कही।
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संजय तंवर ने बताया कि इन तीन वर्षों के दौरान जिला बार एसोसिएशन द्वारा उनकी कार्यप्रणाली पर किसी प्रकार कोई प्रश्न चिह्न नहीं उठाया गया, लेकिन तीन वर्षों बाद उनके कार्यकाल का रिकॉर्ड गायब होने जैसे गंभीर आरोप उन पर लग रहे हैं, जो कि पूरी तरह से निराधार व रंजिशन है। जबकि जिला बार एसोसिएशन में सबसे अधिक विकास कार्य उनके ही कार्यकाल में हुए थे, चाहे वो मीटिंग हॉल का नवीनीकरण हो, लाइब्रेरी, वॉशरूम, पार्किंग सहित अन्य विकास कार्य हो।
जिला बार में पिछले तीन साल का रिकॉर्ड गायब है। अपना पीछा छुड़ाने के लिए एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। पुराना रिकॉर्ड वर्तमान बार कार्यकारिणी को नहीं मिला है। पूर्व सचिव संजय तंवर बार की लाइब्रेरी में उनके कार्यकाल की रिकॉर्ड की कॉपी होने की बात कह रहे हैं, उसमें सिर्फ आय और खर्च के संबंध में ही लिखा है जबकि आमदनी और खर्च के विवरण से जुड़े बिल, बाउचर और अन्य रिकॉर्ड का कोई भी दस्तावेज मौजूद नहीं है। इसे रिकॉर्ड नहीं कहा जा सकता है। तीन साल का रिकॉर्ड किसके पास और कहां है यह जांच का विषय बन गया है। इस संबंध में बार कोंसिल को भी लिखा जा चुका है। रिकॉर्ड गायब होने के पीछे बड़ी साजिश या फिर बड़ा घोटाला भी हो सकता है। -संदीप तंवर हालुवासिया, प्रधान, जिला बार एसोसिएशन, भिवानी।