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किसानों ने चार जगह चार घंटे रेलवे ट्रैक किया बाधित
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बामला रेलवे स्टेशन के रेलवे ट्रैक पर रोष जताते किसान। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। कृषि कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर चार जगहों पर किसानों ने चार घंटे तक रेलवे ट्रैक पर धरना देकर रोष जताया। किसानों ने चेतावनी दी कि कृषि कानूनों के रद्द करने के सिवाय उन्हें कुछ मंजूर नहीं और कृषि कानून रद्द नहीं होने तक वे पीछे नहीं हटेंगे। किसानों ने नारेबाजी कर रोष जताया। खासी संख्या में ग्रामीण महिलाएं भी ट्रैक पर बैठी नजर आई। किसान आंदोलन को देखते हुए रेलवे ने रेवाड़ी-श्रीगंगानगर स्पेशल ट्रेन को रद्द कर दी। इसके साथ ही दो ट्रेनें प्रभावित हुई। वहीं रेल रोको कार्यक्रम के दौरान किसी भी अप्रिय घटना रोकने के लिए जिला पुलिस के 300 जवानों, अधिकारियों समेत जीआरपी, आरपीएफ के जवान तैनात रहे।
रेल रोको कार्यक्रम के तहत जिले के गांव बामला, सुई, लोहारू व सिवानी के पास रेलवे ट्रैक जाम कर किसानों ने धरने दिए और रोष जताया। किसान दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक रेलवे ट्रैक पर डटे रहे। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी समर्थन करने पहुंचे।
बामला रेलवे स्टेशन पर चार घंटे तक धरना देकर किसानों, महिलाओं ने रेल रोकी
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान, मजदूरों, महिलाओं व युवाओं ने बामला रेलवे स्टेशन पर चार घंटे धरना देकर रेलें रोकी। किसानों ने नारेबाजी कर रोष जताया वहीं भारी पुलिस फोर्स भी तैनात रही। धरने की अध्यक्षता छह सदस्यीय अध्यक्ष मंडल करतार ग्रेवाल, रोहताश पहलवान, बलबीर बजाड़, किताब कौर, रामेहर सिंह व ओमप्रकाश बामला ने की। मंच संचालन कामरेड ओमप्रकाश ने किया। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार पूंजीपतियों के इशारे पर चल रही है। किसानों व मजदूरों के विरोध के कानून रद्द करने की बजाय, जाति और धर्म पर उन्हें आपस में लड़ाने व आंदोलन को लंबा चला कमजोर करने की साजिश रच रही है। इस मौके पर अभिजीत लाल सिंह, कमल प्रधान, सुखदेव पालुवास, मा. वजीर सिंह, बलबीर पूनिया, सुंदर पहलवान, राज कुमार जांगड़ा, रिशाल कौर, संतोष देशवाल, दिलबाग ग्रेवाल, रतन जिंदल, महेंद्र मित्ताथल, बलवान, राज कुमार, विनोद आदि ने संबोधित किया।
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भिवानी-हिसार रेलवे लाइन पर सूई रेलवे फाटक पर ट्रैक जाम कर किसानों ने रोष जताया। किसान नेता भाकियू जिला प्रधान राकेश आर्य, मंगल सिंह खरेटा, मंगल सुई, राजेश कुंगड़, सत्यवान बलयाली, संदीप मल्हान, प्रवीण, करतार गिल, सत्ते श्योराण, पवित्र दिनोद, सुनिता कुंगड़, बिरा, जगमती, खजानी, बेद गोयत, मोहन सिहाग, कामरेड सतबीर, कामरेड रमेश, सतबीर गोयत, सुरेश गोयत, जसवंत बल्हारा, दयानंद बलयाली, जगदीश, रामअवतार भाकर, सत्यवान दुहन व अनिल शेषमा आदि ने संबोधित किया। किसान नेताओं ने तीनों कृषि कानून रद्द करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि जब तक ये कानून रद्द नहीं होते वे पीछे नहीं हटेंगे।
बुजुर्ग किसान बोले, भविष्य की लड़ाई लड़ रहे, मांगें माने जाने तक नहीं हटेंगे पीछे
संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी रेल रोको अभियान के चलते जिले की खापें, किसान, सामाजिक और कर्मचारी संगठन जहां रेलवे ट्रैक पर जमे रहे वहीं कितलाना टोल पर धरने की कमान बुजुर्ग किसानों ने संभाली। उन्होंने कहा कि यह हमारे भविष्य की लड़ाई है। इसलिए जब तक तीनों कानून रद्द होने के साथ एमएसपी की गारंटी नहीं मिलती, हम पीछे नहीं हटने वाले हैं। किसान नेता राजू मान ने कहा कि आज सभी वर्ग समझ गए हैं कि ये तीनों कानून सरकारी मंडी को खा जाएंगे, एमएसपी नहीं बचेगी। जिसका सीधा असर किसान, मजदूर और आढ़ती पर पड़ेगा और उनके नुकसान की भरपाई नहीं हो सकेगी। धरने की अध्यक्षता सरदार सिंह डोहकी, मौजीराम, मजा. ओमप्रकाश, सुभाष यादव, अंतर कौर डोहकी, श्यामलाल फतेहगढ़, फतेह सिंह मानकावास ने संयुक्त रूप से की।
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रेल रोको कार्यक्रम के तहत जिले के गांव बामला, सुई, लोहारू व सिवानी के पास रेलवे ट्रैक जाम कर किसानों ने धरने दिए और रोष जताया। किसान दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक रेलवे ट्रैक पर डटे रहे। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी समर्थन करने पहुंचे।
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बामला रेलवे स्टेशन पर चार घंटे तक धरना देकर किसानों, महिलाओं ने रेल रोकी
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान, मजदूरों, महिलाओं व युवाओं ने बामला रेलवे स्टेशन पर चार घंटे धरना देकर रेलें रोकी। किसानों ने नारेबाजी कर रोष जताया वहीं भारी पुलिस फोर्स भी तैनात रही। धरने की अध्यक्षता छह सदस्यीय अध्यक्ष मंडल करतार ग्रेवाल, रोहताश पहलवान, बलबीर बजाड़, किताब कौर, रामेहर सिंह व ओमप्रकाश बामला ने की। मंच संचालन कामरेड ओमप्रकाश ने किया। किसान नेताओं ने कहा कि सरकार पूंजीपतियों के इशारे पर चल रही है। किसानों व मजदूरों के विरोध के कानून रद्द करने की बजाय, जाति और धर्म पर उन्हें आपस में लड़ाने व आंदोलन को लंबा चला कमजोर करने की साजिश रच रही है। इस मौके पर अभिजीत लाल सिंह, कमल प्रधान, सुखदेव पालुवास, मा. वजीर सिंह, बलबीर पूनिया, सुंदर पहलवान, राज कुमार जांगड़ा, रिशाल कौर, संतोष देशवाल, दिलबाग ग्रेवाल, रतन जिंदल, महेंद्र मित्ताथल, बलवान, राज कुमार, विनोद आदि ने संबोधित किया।
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भिवानी-हिसार रेलवे लाइन पर सूई रेलवे फाटक पर ट्रैक जाम कर किसानों ने रोष जताया। किसान नेता भाकियू जिला प्रधान राकेश आर्य, मंगल सिंह खरेटा, मंगल सुई, राजेश कुंगड़, सत्यवान बलयाली, संदीप मल्हान, प्रवीण, करतार गिल, सत्ते श्योराण, पवित्र दिनोद, सुनिता कुंगड़, बिरा, जगमती, खजानी, बेद गोयत, मोहन सिहाग, कामरेड सतबीर, कामरेड रमेश, सतबीर गोयत, सुरेश गोयत, जसवंत बल्हारा, दयानंद बलयाली, जगदीश, रामअवतार भाकर, सत्यवान दुहन व अनिल शेषमा आदि ने संबोधित किया। किसान नेताओं ने तीनों कृषि कानून रद्द करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि जब तक ये कानून रद्द नहीं होते वे पीछे नहीं हटेंगे।
बुजुर्ग किसान बोले, भविष्य की लड़ाई लड़ रहे, मांगें माने जाने तक नहीं हटेंगे पीछे
संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी रेल रोको अभियान के चलते जिले की खापें, किसान, सामाजिक और कर्मचारी संगठन जहां रेलवे ट्रैक पर जमे रहे वहीं कितलाना टोल पर धरने की कमान बुजुर्ग किसानों ने संभाली। उन्होंने कहा कि यह हमारे भविष्य की लड़ाई है। इसलिए जब तक तीनों कानून रद्द होने के साथ एमएसपी की गारंटी नहीं मिलती, हम पीछे नहीं हटने वाले हैं। किसान नेता राजू मान ने कहा कि आज सभी वर्ग समझ गए हैं कि ये तीनों कानून सरकारी मंडी को खा जाएंगे, एमएसपी नहीं बचेगी। जिसका सीधा असर किसान, मजदूर और आढ़ती पर पड़ेगा और उनके नुकसान की भरपाई नहीं हो सकेगी। धरने की अध्यक्षता सरदार सिंह डोहकी, मौजीराम, मजा. ओमप्रकाश, सुभाष यादव, अंतर कौर डोहकी, श्यामलाल फतेहगढ़, फतेह सिंह मानकावास ने संयुक्त रूप से की।

मैं हूं किसान...। बामला गांव के रेलवे स्टेशन पर रेलवे ट्रेक जाम करने के दौरान नारेबाजी कर रही महिला- फोटो : Bhiwani

सूई गांव में रेलवे ट्रेक जाम करते किसान। संवाद- फोटो : Bhiwani