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शो पीस बने सार्वजनिक शौचालय
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Mon, 25 Jul 2016 12:21 AM IST
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toilet
- फोटो : फाइल फोटो
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प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रशासन गांवों में बेशक हर घर में शौचालय निर्माण करवाने के लिए ऐडी-चोटी का जोर लगा रहा हो, लेकिन शहर में सार्वजनिक शौचालयों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। सार्वजनिक स्थानों पर केवल शो पीस बन कर रह गए शौचालय स्वच्छता अभियान की असफलता की बानगी पेश कर रहे हैं।
शहर में हांसी गेट पर अशोका रोड, घंटाघर चौक, कृष्णा कॉलोनी मोड, बावड़ी गेट, दिनोद गेट, नगर परिषद कार्यालय के सामने, बासिया भवन के सामने आदि जगह बने शौचालय की बदहाली शहर में स्वच्छता अभियान को आइना दिखाने को काफी है। इन सार्वजनिक शौचालयों में किसी पर ताला लटका मिलता है, तो कइयों पर लावारिस पशुओं का कब्जा है। आम नागरिक इन शौचालयों का प्रयोग करना तो दूर इनके पास से गुजरते वक्त भी रुमाल से मुंह ढककर निकलता है।
सफाई व पानी की सुविधा की गुंजाइश ही नहीं
सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी व दुर्गंध से भरे शौचालयों से केवल सरकारी योजना व पैसे का दुरुपयोग नजर आता है। इन शौचालयों पर सफाई व पानी की सुविधा की तो गुंजाइश ही नजर नहीं आती। किसी शौचालय पर पानी की खाली टंकी रखी है, तो कहीं कोई इंतजाम नहीं है। न ही नगरपरिषद की ओर से इनकी सफाई व्यवस्था के इंतजाम किए गए।
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कूंगड़ गांव के शौचालय में ठूंस दिए उपले
बवानीखेड़ा वर्ष 2008-09 में कई गांवों में सार्वजनिक शौचालय बनाए गए। इनमें कूंगड़ गांव भी शामिल है। शासन-प्रशासन की अनदेखी के चलते शौचालय खंडहर बन गया। लोगों ने अपने गोबर व उपले डालकर कब्जा तक जमा लिया। कुछ शौचालयों के दरवाजे और टूटियां शरारती तत्वों द्वारा चुरा ली गई। लेकिन न तो प्रशासन ने इनके सुधार की जहमत उठाई। तो वहीं ग्राम पंचायतों ने भी सिर्फ निर्माण तक ही जिम्मेदारी निभाई।
गांव कूंगड़ के सरपंच सतेंद्र गोयत ने बताया कि पिछली सरकारों में बने सार्वजनिक शौचालय निर्माण में गड़बड़ हुई। कई शौचालयों के उपर पानी की टंकी व जमीनी कुई नहीं खुदवाई गई। गांव विकास के लिए राशि आते ही पहले सार्वजनिक शौचालयों की दशा सुधारी जाएगी।
लाखों रुपये खर्च, फिर भी लगा है ताला
तोशाम। अनाज मंडी में सार्वजनिक शौचालयों पर लाखों रुपये खर्च किए गए, फिर उन पर ताला लटका दिया गया। इससे मंडी में निर्मित शौचालयों के बावजूद भी लोगों को मजबूरन खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है।
अनाजमंडी में महिला व पुरुषों के लिए अलग-अलग आधुनिक सुविधाओं से युक्त शौचालयों का निर्माण कराया गया। वहीं पानी के लिए सबमर्सिबल पंप व चारदीवारी करके आगे व पीछे दो गेट लगाए गए थे। फिर भी कर्मचारी, मजदूर, किसान, आम लोगों को सुविधा नहीं मिल पा रही। मंडी सचिव राजेंद्र फौगाट ने कहा कि लोग शौचालयों में आते हैं। चौकीदार न होने के कारण सामान की चोरी कर ले जाते हैं। इसलिए ताला लगाकर शौचालयों को बंद किया हुआ है।
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शहर में हांसी गेट पर अशोका रोड, घंटाघर चौक, कृष्णा कॉलोनी मोड, बावड़ी गेट, दिनोद गेट, नगर परिषद कार्यालय के सामने, बासिया भवन के सामने आदि जगह बने शौचालय की बदहाली शहर में स्वच्छता अभियान को आइना दिखाने को काफी है। इन सार्वजनिक शौचालयों में किसी पर ताला लटका मिलता है, तो कइयों पर लावारिस पशुओं का कब्जा है। आम नागरिक इन शौचालयों का प्रयोग करना तो दूर इनके पास से गुजरते वक्त भी रुमाल से मुंह ढककर निकलता है।
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सफाई व पानी की सुविधा की गुंजाइश ही नहीं
सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी व दुर्गंध से भरे शौचालयों से केवल सरकारी योजना व पैसे का दुरुपयोग नजर आता है। इन शौचालयों पर सफाई व पानी की सुविधा की तो गुंजाइश ही नजर नहीं आती। किसी शौचालय पर पानी की खाली टंकी रखी है, तो कहीं कोई इंतजाम नहीं है। न ही नगरपरिषद की ओर से इनकी सफाई व्यवस्था के इंतजाम किए गए।
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कूंगड़ गांव के शौचालय में ठूंस दिए उपले
बवानीखेड़ा वर्ष 2008-09 में कई गांवों में सार्वजनिक शौचालय बनाए गए। इनमें कूंगड़ गांव भी शामिल है। शासन-प्रशासन की अनदेखी के चलते शौचालय खंडहर बन गया। लोगों ने अपने गोबर व उपले डालकर कब्जा तक जमा लिया। कुछ शौचालयों के दरवाजे और टूटियां शरारती तत्वों द्वारा चुरा ली गई। लेकिन न तो प्रशासन ने इनके सुधार की जहमत उठाई। तो वहीं ग्राम पंचायतों ने भी सिर्फ निर्माण तक ही जिम्मेदारी निभाई।
गांव कूंगड़ के सरपंच सतेंद्र गोयत ने बताया कि पिछली सरकारों में बने सार्वजनिक शौचालय निर्माण में गड़बड़ हुई। कई शौचालयों के उपर पानी की टंकी व जमीनी कुई नहीं खुदवाई गई। गांव विकास के लिए राशि आते ही पहले सार्वजनिक शौचालयों की दशा सुधारी जाएगी।
लाखों रुपये खर्च, फिर भी लगा है ताला
तोशाम। अनाज मंडी में सार्वजनिक शौचालयों पर लाखों रुपये खर्च किए गए, फिर उन पर ताला लटका दिया गया। इससे मंडी में निर्मित शौचालयों के बावजूद भी लोगों को मजबूरन खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है।
अनाजमंडी में महिला व पुरुषों के लिए अलग-अलग आधुनिक सुविधाओं से युक्त शौचालयों का निर्माण कराया गया। वहीं पानी के लिए सबमर्सिबल पंप व चारदीवारी करके आगे व पीछे दो गेट लगाए गए थे। फिर भी कर्मचारी, मजदूर, किसान, आम लोगों को सुविधा नहीं मिल पा रही। मंडी सचिव राजेंद्र फौगाट ने कहा कि लोग शौचालयों में आते हैं। चौकीदार न होने के कारण सामान की चोरी कर ले जाते हैं। इसलिए ताला लगाकर शौचालयों को बंद किया हुआ है।