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ट्यूशन फीस दे चुके विद्यार्थी को एसएलसी देने से मना करने पर होगी कार्रवाई
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भिवानी। स्कूल में एसएलसी का मुद्दा फिर से गर्मा गया है। जिला शिक्षा विभाग की ओर से हाल ही में एसएलसी को लेकर निर्देश जारी किए हैं। जिसके तहत दूसरी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों को निजी स्कूल से एसएलसी लाना अनिवार्य कर दिया। ऐसे में निजी स्कूल से सरकारी स्कूल में आए विद्यार्थियों को नियमित प्रवेश के लिए एसएलसी जमा करवानी होगी। साथ ही विभाग ने निजी स्कूल संचालकों को भी सख्त आदेश दिए हैं कि कोरोना काल के दौरान बच्चों से सिर्फ ट्यूशन फीस लेनी होगी। इसके अलावा कोई फीस ली तो संबंधित स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
खंड शिक्षक अधिकारी को जारी किए पत्र में निर्देश दिए हैं कि सभी विद्यालयों के मुखिया को आदेश दें कि वे निजी स्कूल से आने वाले कक्षा दूसरी से आठवीं तक के विद्यार्थियों से एसएलसी प्राप्त कर उनका नियमित करें। साथ ही निजी स्कूलों को निर्देशित करें कि विद्यालय में जो भी विद्यार्थी एसएलसी लेने आता है, उनका एसएलसी जारी करें। कोरोना काल के समय विद्यार्थी से केवल बकाया ट्यूशन फीस ही वसूल करें। अन्यथा बिना किसी कारण के एसएलसी जारी न करने वाले निजी विद्यालय के खिलाफ अनुशासनात्मक का कार्रवाई के लिए मामला उच्च कार्यालय को भेजा दिया जाएगा।
सरकारी स्कूल मुखिया दाखिला देने से इनकार नहीं कर सकते
कोई भी सरकारी स्कूल मुखिया किसी भी बच्चे को दाखिला देने से इनकार नहीं कर सकता है। निजी स्कूल लॉकडाउन में स्कूल पूरी तरह से बंद होने के बावजूद सभी फंड जमा कराने का अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं। सरकारी स्कूलों में अस्थायी दाखिला होने के बाद एसएलसी की शर्त गलत है। शिक्षा विभाग खुद दोहरे मापदंड अपनाकर निजी स्कूल संचालकों की मनमानी में उनका साथ देकर अभिभावकों पर मानसिक व आर्थिक दबाव बनाने पर तुला है।
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- बृजपाल सिंह परमार, प्रदेश अध्यक्ष, स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन भिवानी।
सिर्फ ट्यूशन फीस ले सकते हैं
कक्षा दूसरी से आठवीं तक के विद्यार्थी जिनके प्रोविजनल दाखिले हो गए हैं, उन्हें एसएलसी लेकर आने के निर्देश दिए हैं, ताकि समय पर उनका रेगुलर एडमिशन हो सके। साथ ही निजी स्कूल संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे कोरोना काल के दौरान बच्चों से सिर्फ ट्यूशन फीस ही ले सकते हैं। जिन बच्चों ने ट्यूशन फीस जमा करवा दी है, उन बच्चों को एसएलसी दें। ऐसा न करने पर संबंधित निजी स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- रामअवतार शर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।
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खंड शिक्षक अधिकारी को जारी किए पत्र में निर्देश दिए हैं कि सभी विद्यालयों के मुखिया को आदेश दें कि वे निजी स्कूल से आने वाले कक्षा दूसरी से आठवीं तक के विद्यार्थियों से एसएलसी प्राप्त कर उनका नियमित करें। साथ ही निजी स्कूलों को निर्देशित करें कि विद्यालय में जो भी विद्यार्थी एसएलसी लेने आता है, उनका एसएलसी जारी करें। कोरोना काल के समय विद्यार्थी से केवल बकाया ट्यूशन फीस ही वसूल करें। अन्यथा बिना किसी कारण के एसएलसी जारी न करने वाले निजी विद्यालय के खिलाफ अनुशासनात्मक का कार्रवाई के लिए मामला उच्च कार्यालय को भेजा दिया जाएगा।
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सरकारी स्कूल मुखिया दाखिला देने से इनकार नहीं कर सकते
कोई भी सरकारी स्कूल मुखिया किसी भी बच्चे को दाखिला देने से इनकार नहीं कर सकता है। निजी स्कूल लॉकडाउन में स्कूल पूरी तरह से बंद होने के बावजूद सभी फंड जमा कराने का अभिभावकों पर दबाव बना रहे हैं। सरकारी स्कूलों में अस्थायी दाखिला होने के बाद एसएलसी की शर्त गलत है। शिक्षा विभाग खुद दोहरे मापदंड अपनाकर निजी स्कूल संचालकों की मनमानी में उनका साथ देकर अभिभावकों पर मानसिक व आर्थिक दबाव बनाने पर तुला है।
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- बृजपाल सिंह परमार, प्रदेश अध्यक्ष, स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन भिवानी।
सिर्फ ट्यूशन फीस ले सकते हैं
कक्षा दूसरी से आठवीं तक के विद्यार्थी जिनके प्रोविजनल दाखिले हो गए हैं, उन्हें एसएलसी लेकर आने के निर्देश दिए हैं, ताकि समय पर उनका रेगुलर एडमिशन हो सके। साथ ही निजी स्कूल संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे कोरोना काल के दौरान बच्चों से सिर्फ ट्यूशन फीस ही ले सकते हैं। जिन बच्चों ने ट्यूशन फीस जमा करवा दी है, उन बच्चों को एसएलसी दें। ऐसा न करने पर संबंधित निजी स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- रामअवतार शर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।