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Bhiwani News: 5 साल बाद वार्डबंदी की तैयारी, मतदाता घटे, दायरा बढ़ा
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भिवानी के हांसी रोड पर नया बाईपास चौक।
भिवानी। पांच साल बाद नगर परिषद ने फिर वार्डबंदी की सीमाओं के निर्धारण की तैयारी शुरू कर दी है। एसआईआर में शहरी क्षेत्र के मतदाता घटे हैं जबकि क्षेत्रफल के हिसाब से शहर की जनसंख्या ढाई लाख का आंकड़ा पार कर गई है।
नगर परिषद परिवार पहचान पत्र के आधार पर शहरी दायरे की जनसंख्या का अपडेट आंकड़ा तैयार कर रही है। यह आंकड़ा मुख्यालय भेजा जाएगा। नगर परिषद को नई वार्डबंदी को लेकर मुख्यालय से पत्र मिला है जिसके बाद जनसंख्या का डाटा अपडेट किया जा रहा है। वर्तमान में शहर में 31 वार्ड हैं और नई वार्डबंदी में इनकी संख्या बढ़ने की संभावना है।
एसआईआर में शहरी वार्डों में मतदाता हटे और जुड़े हैं लेकिन कुल मतदाताओं की संख्या नहीं बढ़ी है। दूसरी ओर शहर में अधिकृत और अनधिकृत कॉलोनियां तेजी से विकसित हुई हैं जहां नए लोग आकर बसे हैं। नई वार्डबंदी में पहले से बने वार्डों की हदबंदी भी बदलेगी और कुछ वार्डों में नया क्षेत्र जुड़ेगा जबकि कुछ पुराना क्षेत्र हटेगा।
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वार्डबंदी के बाद बाहरी कॉलोनियों में जनसुविधाओं के विस्तार का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। नई कॉलोनियों के वार्डों में शामिल होने से वहां रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिलने की संभावना है। कई इलाके फिलहाल दो वार्डों की सीमा में हैं जिन्हें नई वार्डबंदी में एक वार्ड में शामिल किए जाने की मांग भी सामने आई है।
नई वार्डबंदी को लेकर नगर परिषद के समक्ष मुख्यालय से पत्र आया है। हमसे शहरी दायरे की परिवार पहचान पत्र के अनुसार जनसंख्या की जानकारी मांगी गई है। नई वार्डबंदी का काम मुख्यालय द्वारा जारी हिदायतों के अनुसार होगा। -राजाराम, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद भिवानी।
मेरे वार्ड में 1274 वोट थे मगर एसआईआर के बाद 1050 मतदाता रह गए हैं। एसआईआर में मतदाता घटे हैं मगर क्षेत्रफल में जनसंख्या बढ़ी है। पिछली योजना में भी वार्डबंदी हुई थी अब फिर वार्डबंदी की तैयारी है। इससे मेरे वार्ड का इलाका भी पिछली बार की तरह बदल जाएगा। -संदीप यादव, वार्ड नंबर दो
मेरे वार्ड में 800 मतदाताओं के नाम कटे हैं मगर 250 नए वोट बने हैं। 2021 में शहर में वार्डबंदी हुई थी। नियम के अनुसार 10 साल में वार्डबंदी होनी चाहिए। मगर हर चुनाव में वार्डबंदी कराकर वार्डों का दायरा इधर से उधर जोड़ा जा रहा है। नई कॉलोनियां वार्डों में जुड़ेंगी तो उनमें विकास होगा और नए मतदाता वार्डबंदी के हिसाब से नगर परिषद चुनाव में हिस्सा लेंगे। -विनोद प्रजापति, वार्ड नंबर 25
वार्डबंदी के बाद नए क्षेत्र शहरी दायरे में जुड़ेंगे जिनमें लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी। कई इलाके दो वार्डों की हद में फंसे हैं जिन्हें नई वार्डबंदी में एक अलग वार्ड में शामिल करना चाहिए ताकि विकास कार्य कराने में दिक्कत न आए। नई वार्डबंदी से पिछले क्षेत्रों में भी विकास कार्य होंगे और वहां रहने वालों को मूलभूत सुविधाएं मिलनी शुरू होंगी। -अनिल कुमार, पार्षद प्रतिनिधि, वार्ड नंबर 18
शहर की हद आसपास के गांवों तक पहुंच चुकी है। शहर के बाहर नई अनधिकृत कॉलोनियां विकसित हुई हैं जिनमें लोग मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। इन कॉलोनियों में मतदाता हैं और जनसंख्या भी काफी है। नई वार्डबंदी में ये लोग शहर का हिस्सा होंगे। आसपास के गांवों से भी काफी आबादी शहरी दायरे में आकर बस गई है। -महाबीर, पार्षद प्रतिनिधि, वार्ड नंबर 21
लोहारू रोड पर शहरी दायरा काफी बढ़ गया है लेकिन इस क्षेत्र में लोगों तक मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंची हैं। नई वार्डबंदी में नई कॉलोनियां शामिल होंगी तो कई दशकों से रह रहे लोगों तक विकास की राह आसान होगी। वार्डबंदी से कुछ क्षेत्रों में भी फेरबदल होगा जिससे उन इलाकों में नए लोग शहरी हद से जुड़ेंगे। -सुभाष तंवर, पार्षद, वार्ड नंबर 17
पांच साल तक चलाई विकास की रेल, अब बिगड़ेगा नेताजी का खेल
नगर परिषद की वार्डबंदी राजनीतिक मायने में भी कई बदलाव ला सकती है। पिछले चुनाव के दौरान भी शहर में वार्डबंदी की गई थी जिसका असर यह हुआ कि कई पार्षदों को चुनाव में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा और पांच साल तक नगर परिषद में काबिज रहने वाले भी हार गए। नई वार्डबंदी से पांच साल तक विकास कार्य कराने वाले पार्षदों के समीकरण भी बदल सकते हैं।
जिन क्षेत्रों में पार्षदों ने विकास कार्य कराए हैं वे अगले चुनाव में किसी दूसरे वार्ड का हिस्सा बन सकते हैं। इससे वोट की राजनीति के समीकरण बदलेंगे। वहीं विकास की दृष्टि से शहरी दायरे में नई कॉलोनियां शामिल होंगी जहां तक मूलभूत सुविधाएं आमजन तक पहुंचने की संभावना है।
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विधानसभा क्षेत्र अनुसार मतदाताओं के आंकड़े (ड्राफ्ट रोल के अनुसार)
विधानसभा क्षेत्र: पुरुष मतदाता- महिला मतदाता
लोहारू (054): - 1,05,592 - 94,621
भिवानी (057): - 1,18,585 - 1,06,264
तोशाम (058): - 1,16,430 - 1,02,191
बवानीखेड़ा (059): - 1,12,179 - 97,691
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नगर परिषद परिवार पहचान पत्र के आधार पर शहरी दायरे की जनसंख्या का अपडेट आंकड़ा तैयार कर रही है। यह आंकड़ा मुख्यालय भेजा जाएगा। नगर परिषद को नई वार्डबंदी को लेकर मुख्यालय से पत्र मिला है जिसके बाद जनसंख्या का डाटा अपडेट किया जा रहा है। वर्तमान में शहर में 31 वार्ड हैं और नई वार्डबंदी में इनकी संख्या बढ़ने की संभावना है।
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एसआईआर में शहरी वार्डों में मतदाता हटे और जुड़े हैं लेकिन कुल मतदाताओं की संख्या नहीं बढ़ी है। दूसरी ओर शहर में अधिकृत और अनधिकृत कॉलोनियां तेजी से विकसित हुई हैं जहां नए लोग आकर बसे हैं। नई वार्डबंदी में पहले से बने वार्डों की हदबंदी भी बदलेगी और कुछ वार्डों में नया क्षेत्र जुड़ेगा जबकि कुछ पुराना क्षेत्र हटेगा।
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वार्डबंदी के बाद बाहरी कॉलोनियों में जनसुविधाओं के विस्तार का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। नई कॉलोनियों के वार्डों में शामिल होने से वहां रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिलने की संभावना है। कई इलाके फिलहाल दो वार्डों की सीमा में हैं जिन्हें नई वार्डबंदी में एक वार्ड में शामिल किए जाने की मांग भी सामने आई है।
नई वार्डबंदी को लेकर नगर परिषद के समक्ष मुख्यालय से पत्र आया है। हमसे शहरी दायरे की परिवार पहचान पत्र के अनुसार जनसंख्या की जानकारी मांगी गई है। नई वार्डबंदी का काम मुख्यालय द्वारा जारी हिदायतों के अनुसार होगा। -राजाराम, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद भिवानी।
मेरे वार्ड में 1274 वोट थे मगर एसआईआर के बाद 1050 मतदाता रह गए हैं। एसआईआर में मतदाता घटे हैं मगर क्षेत्रफल में जनसंख्या बढ़ी है। पिछली योजना में भी वार्डबंदी हुई थी अब फिर वार्डबंदी की तैयारी है। इससे मेरे वार्ड का इलाका भी पिछली बार की तरह बदल जाएगा। -संदीप यादव, वार्ड नंबर दो
मेरे वार्ड में 800 मतदाताओं के नाम कटे हैं मगर 250 नए वोट बने हैं। 2021 में शहर में वार्डबंदी हुई थी। नियम के अनुसार 10 साल में वार्डबंदी होनी चाहिए। मगर हर चुनाव में वार्डबंदी कराकर वार्डों का दायरा इधर से उधर जोड़ा जा रहा है। नई कॉलोनियां वार्डों में जुड़ेंगी तो उनमें विकास होगा और नए मतदाता वार्डबंदी के हिसाब से नगर परिषद चुनाव में हिस्सा लेंगे। -विनोद प्रजापति, वार्ड नंबर 25
वार्डबंदी के बाद नए क्षेत्र शहरी दायरे में जुड़ेंगे जिनमें लोगों को मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी। कई इलाके दो वार्डों की हद में फंसे हैं जिन्हें नई वार्डबंदी में एक अलग वार्ड में शामिल करना चाहिए ताकि विकास कार्य कराने में दिक्कत न आए। नई वार्डबंदी से पिछले क्षेत्रों में भी विकास कार्य होंगे और वहां रहने वालों को मूलभूत सुविधाएं मिलनी शुरू होंगी। -अनिल कुमार, पार्षद प्रतिनिधि, वार्ड नंबर 18
शहर की हद आसपास के गांवों तक पहुंच चुकी है। शहर के बाहर नई अनधिकृत कॉलोनियां विकसित हुई हैं जिनमें लोग मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। इन कॉलोनियों में मतदाता हैं और जनसंख्या भी काफी है। नई वार्डबंदी में ये लोग शहर का हिस्सा होंगे। आसपास के गांवों से भी काफी आबादी शहरी दायरे में आकर बस गई है। -महाबीर, पार्षद प्रतिनिधि, वार्ड नंबर 21
लोहारू रोड पर शहरी दायरा काफी बढ़ गया है लेकिन इस क्षेत्र में लोगों तक मूलभूत सुविधाएं नहीं पहुंची हैं। नई वार्डबंदी में नई कॉलोनियां शामिल होंगी तो कई दशकों से रह रहे लोगों तक विकास की राह आसान होगी। वार्डबंदी से कुछ क्षेत्रों में भी फेरबदल होगा जिससे उन इलाकों में नए लोग शहरी हद से जुड़ेंगे। -सुभाष तंवर, पार्षद, वार्ड नंबर 17
पांच साल तक चलाई विकास की रेल, अब बिगड़ेगा नेताजी का खेल
नगर परिषद की वार्डबंदी राजनीतिक मायने में भी कई बदलाव ला सकती है। पिछले चुनाव के दौरान भी शहर में वार्डबंदी की गई थी जिसका असर यह हुआ कि कई पार्षदों को चुनाव में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा और पांच साल तक नगर परिषद में काबिज रहने वाले भी हार गए। नई वार्डबंदी से पांच साल तक विकास कार्य कराने वाले पार्षदों के समीकरण भी बदल सकते हैं।
जिन क्षेत्रों में पार्षदों ने विकास कार्य कराए हैं वे अगले चुनाव में किसी दूसरे वार्ड का हिस्सा बन सकते हैं। इससे वोट की राजनीति के समीकरण बदलेंगे। वहीं विकास की दृष्टि से शहरी दायरे में नई कॉलोनियां शामिल होंगी जहां तक मूलभूत सुविधाएं आमजन तक पहुंचने की संभावना है।
विधानसभा क्षेत्र अनुसार मतदाताओं के आंकड़े (ड्राफ्ट रोल के अनुसार)
विधानसभा क्षेत्र: पुरुष मतदाता- महिला मतदाता
लोहारू (054): - 1,05,592 - 94,621
भिवानी (057): - 1,18,585 - 1,06,264
तोशाम (058): - 1,16,430 - 1,02,191
बवानीखेड़ा (059): - 1,12,179 - 97,691