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24.50 लाख से बढ़ाई जाएगी पौंड की गहराई
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 28 Apr 2017 12:24 AM IST
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चरखी दादरी।
अब जनस्वास्थ्य विभाग ने एसटीपी दूषित पानी प्रबंधन के लिए नया प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत विभाग समसपुर स्थित एसटीपी की रेजिंग की जाएगी। 24 लाख 50 हजार की लागत से यहां बने पौंड की गहराई बढ़ाई जाएगी ताकि अधिक मात्रा में पानी का स्टोरेज हो सके। यह गहराई मौजूदा सात वर्ग फीट से बढ़ाकर करीब 12 वर्ग फीट की जाएगी । इसके अलावा पौंड का थोड़ा दायरा भी बढ़ाया जाएगा। एसटीपी का बिजली सिस्टम पूरी तरह से दुरुस्त किया जाएगा। कई नए बिजली यंत्र लगाए जाएंगे। पानी उठान के लिए नए पंप सैट लगाए जाएंगे ताकि पानी का दबाव बढ़ने पर अधिक से अधिक दूषित पानी उठाकर पौंड में डाला जा सके।
जानकारी के अनुसार लंबे समय से ओवरफ्लो एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) के लिए जन स्वास्थ्य विभाग ने नया प्लान तैयार किया है। इसके तहत विभाग शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की रेजिंग करेगा ताकि फालतू ट्रीट पानी को समायोजित किया जा सके। इससे शहर की चरमराई सीवरेज व्यवस्था में काफी हद तक सुधार होगा। यह प्लान हालांकि लंबे समय तक कारगर नहीं होगा लेकिन जब तक स्थाई समाधान का प्रोजेक्ट झोली में नहीं आ जाता तब तक इससे काम चलने की उम्मीद है। टैंकों की गहराई बढ़ाने का प्रपोजल भी तैयार हो चुका है।
हालांकि इसे हैड ऑफिस से मंजूरी मिलनी अभी बाकी है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो मई की शुरुआत में इसकी मंजूरी मिल सकती है। अमर उजाला ने पूरे शहर से जुड़े एसटीपी मुद्दे को समय-समय पर अलग-अलग संस्करणों में भी प्रमुखता से प्रकाशित किया है। जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शहर की सीवरेज व्यवस्था में सुधार लाने के लिए लंबे समय से प्रयासरत थे लेकिन हर प्लानिंग पर कोई न कोई अड़चन आ रही थी। दूसरी ओर शहर के एसटीपी में लगातार ओवरफ्लो की समस्या बनी रहने से दूषित पानी के प्रबंधन में भी कठिनाईयां आ रही थीं। सीएम का बड़ी ड्रेन निर्माण की घोषणा पहले ही रद्द हो चुकी थी। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने 24.50 लाख का एस्टीमेट तैयार किया है। गौरतलब है कि शहर के दोनो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों के दूषित पानी का प्रबंधन न होने की वजह से बार- बार सीवरेज की समस्या पैदा हो रही है। थोड़ी-सी बारिश होने पर सीवरेज की मेन पाइप लाइनों से दबाव नहीं बन पाता। विभाग ने इसके लिए 29 करोड़ का प्रपोजल तैयार किया था उसे भी सरकार की ओर से मंजूरी नहीं मिली थी।
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सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी का समायोजन न होने से शहर की सीवरेज व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस समय एसटीपी के दूषित पानी का प्रबंधन नहीं हो रहा है हैं। हालांकि बीच -बीच में सीवरेज पानी को फिल्टर तो कर दिया जाता है लेकिन इस पानी का कही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है जिससे समय-समय पर प्लांट में सीवरेज पानी का स्टोरेज बढ़ जाने पर शहर की सीवरेज व्यवस्था प्रभावित होने लगती है। शहर में सीवरेज की मेन लाइनों का दबाव कम हो जाता है जिससे कई बार मेन लाइन बैक मार देती हैं।
चव्वे की समस्या से किसानों ने पानी लेने से किया था इंकार
:: शहर से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित दादरी-दिल्ली बाईपास के समीप व गांव रामनगर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बने हैं। इन प्लांटों में शहर का दूषित पानी जाता है। जिस समय यह ट्रीटमेंट बने थे उस समय इन क्षेत्रों में किसानों को इस पानी की सिंचाई के रूप में जरूरत थी लोग इस ट्रीट पानी से सिंचाई कर लेते थे लेकिन अब यह एरिया धीरे-धीरे आबाद होने लगा है। आसपास मकान व दुकानें भी बनने लगी हैं। खेतों में भी अब चव्वे की समस्या पैदा हो गई है। ऐसे में किसान अब इस सीवरेज के ट्रीट हुए पानी से सिंचाई भी नहीं कर रहे हैं। इसे पानी का इस्तेमाल न होने की वजह से इसके समायोजन व प्रबंधन की समस्या बीच-बीच में सीवरेज संबंधी परेशानी पैदा कर रही है। प्लांट में भी दूषित पानी का स्टोरेज बढ़ जाता है। आसपास बस्ती होने की वजह से दूषित पानी से 24 घंटे दुर्गंध बनी रहती है। दिल्ली प्रमुख मार्ग होने पर बसों व अन्य वाहनों में सवार लोगों को काफी दूरी तक दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ने लगा है।
सेनेटरी बोर्ड की मीटिंग में दो दफा नजरअंदाज हुआ प्रोजेक्ट
:: विभाग ने इस समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रपोजल तैयार किया था। इसके तहत इस सीवरेज पानी को ड्रेन नंबर आठ में डाले जाने की प्लान तैयार की गई थी। इसके लिए विभाग ने करीब 25 किलोमीटर की लंबाई में लोहे की लाइन बिछाए जाने की प्लानिंग की थी। जनस्वास्थ्य विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए 28 करोड़ का एस्टीमेट भी तैयार किया था। यह प्रपोजल सेनेटरी बोर्ड के भी दो बार रखा गया था।
बड़ी ड्रेन के प्रोजेक्ट पर फिरा पानी
सीएम की 18 सितंबर 2016 की रैली में भी यह प्रोजेक्ट रखा गया था लेकिन सीएम ने इस प्रोजेक्ट पर ध्यान न देते हुए शहर के बाहरी क्षेत्र में ड्रेन निर्माण करवाए जाने की घोषणा की ताकि एसटीपी प्लांट के दूषित पानी को भी इस ड्रेन में ही डाला जा सके। किसानों द्वारा खेतों की जमीन दिए जाने से इंकार कर दिए जाने पर जिले में बड़ी ड्रेन के निर्माण का प्रोजेक्ट भी अब रद्द हो गया था। यह ड्रेन 90 करोड़ में 63 हजार वर्ग फीट लंबाई में बननी थी ताकि इन दोनो एसटीपी का दूषित पानी इन ड्रेन में डाला जा सके जिससे शहर की सीवरेज व्यवस्था भी बाधित न होने पाए।
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अब जनस्वास्थ्य विभाग ने एसटीपी दूषित पानी प्रबंधन के लिए नया प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत विभाग समसपुर स्थित एसटीपी की रेजिंग की जाएगी। 24 लाख 50 हजार की लागत से यहां बने पौंड की गहराई बढ़ाई जाएगी ताकि अधिक मात्रा में पानी का स्टोरेज हो सके। यह गहराई मौजूदा सात वर्ग फीट से बढ़ाकर करीब 12 वर्ग फीट की जाएगी । इसके अलावा पौंड का थोड़ा दायरा भी बढ़ाया जाएगा। एसटीपी का बिजली सिस्टम पूरी तरह से दुरुस्त किया जाएगा। कई नए बिजली यंत्र लगाए जाएंगे। पानी उठान के लिए नए पंप सैट लगाए जाएंगे ताकि पानी का दबाव बढ़ने पर अधिक से अधिक दूषित पानी उठाकर पौंड में डाला जा सके।
जानकारी के अनुसार लंबे समय से ओवरफ्लो एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) के लिए जन स्वास्थ्य विभाग ने नया प्लान तैयार किया है। इसके तहत विभाग शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की रेजिंग करेगा ताकि फालतू ट्रीट पानी को समायोजित किया जा सके। इससे शहर की चरमराई सीवरेज व्यवस्था में काफी हद तक सुधार होगा। यह प्लान हालांकि लंबे समय तक कारगर नहीं होगा लेकिन जब तक स्थाई समाधान का प्रोजेक्ट झोली में नहीं आ जाता तब तक इससे काम चलने की उम्मीद है। टैंकों की गहराई बढ़ाने का प्रपोजल भी तैयार हो चुका है।
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हालांकि इसे हैड ऑफिस से मंजूरी मिलनी अभी बाकी है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो मई की शुरुआत में इसकी मंजूरी मिल सकती है। अमर उजाला ने पूरे शहर से जुड़े एसटीपी मुद्दे को समय-समय पर अलग-अलग संस्करणों में भी प्रमुखता से प्रकाशित किया है। जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शहर की सीवरेज व्यवस्था में सुधार लाने के लिए लंबे समय से प्रयासरत थे लेकिन हर प्लानिंग पर कोई न कोई अड़चन आ रही थी। दूसरी ओर शहर के एसटीपी में लगातार ओवरफ्लो की समस्या बनी रहने से दूषित पानी के प्रबंधन में भी कठिनाईयां आ रही थीं। सीएम का बड़ी ड्रेन निर्माण की घोषणा पहले ही रद्द हो चुकी थी। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने 24.50 लाख का एस्टीमेट तैयार किया है। गौरतलब है कि शहर के दोनो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों के दूषित पानी का प्रबंधन न होने की वजह से बार- बार सीवरेज की समस्या पैदा हो रही है। थोड़ी-सी बारिश होने पर सीवरेज की मेन पाइप लाइनों से दबाव नहीं बन पाता। विभाग ने इसके लिए 29 करोड़ का प्रपोजल तैयार किया था उसे भी सरकार की ओर से मंजूरी नहीं मिली थी।
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सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी का समायोजन न होने से शहर की सीवरेज व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस समय एसटीपी के दूषित पानी का प्रबंधन नहीं हो रहा है हैं। हालांकि बीच -बीच में सीवरेज पानी को फिल्टर तो कर दिया जाता है लेकिन इस पानी का कही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है जिससे समय-समय पर प्लांट में सीवरेज पानी का स्टोरेज बढ़ जाने पर शहर की सीवरेज व्यवस्था प्रभावित होने लगती है। शहर में सीवरेज की मेन लाइनों का दबाव कम हो जाता है जिससे कई बार मेन लाइन बैक मार देती हैं।
चव्वे की समस्या से किसानों ने पानी लेने से किया था इंकार
:: शहर से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित दादरी-दिल्ली बाईपास के समीप व गांव रामनगर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बने हैं। इन प्लांटों में शहर का दूषित पानी जाता है। जिस समय यह ट्रीटमेंट बने थे उस समय इन क्षेत्रों में किसानों को इस पानी की सिंचाई के रूप में जरूरत थी लोग इस ट्रीट पानी से सिंचाई कर लेते थे लेकिन अब यह एरिया धीरे-धीरे आबाद होने लगा है। आसपास मकान व दुकानें भी बनने लगी हैं। खेतों में भी अब चव्वे की समस्या पैदा हो गई है। ऐसे में किसान अब इस सीवरेज के ट्रीट हुए पानी से सिंचाई भी नहीं कर रहे हैं। इसे पानी का इस्तेमाल न होने की वजह से इसके समायोजन व प्रबंधन की समस्या बीच-बीच में सीवरेज संबंधी परेशानी पैदा कर रही है। प्लांट में भी दूषित पानी का स्टोरेज बढ़ जाता है। आसपास बस्ती होने की वजह से दूषित पानी से 24 घंटे दुर्गंध बनी रहती है। दिल्ली प्रमुख मार्ग होने पर बसों व अन्य वाहनों में सवार लोगों को काफी दूरी तक दुर्गंध का सामना करना पड़ता है। आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ने लगा है।
सेनेटरी बोर्ड की मीटिंग में दो दफा नजरअंदाज हुआ प्रोजेक्ट
:: विभाग ने इस समस्या से निजात दिलाने के लिए प्रपोजल तैयार किया था। इसके तहत इस सीवरेज पानी को ड्रेन नंबर आठ में डाले जाने की प्लान तैयार की गई थी। इसके लिए विभाग ने करीब 25 किलोमीटर की लंबाई में लोहे की लाइन बिछाए जाने की प्लानिंग की थी। जनस्वास्थ्य विभाग ने इस प्रोजेक्ट के लिए 28 करोड़ का एस्टीमेट भी तैयार किया था। यह प्रपोजल सेनेटरी बोर्ड के भी दो बार रखा गया था।
बड़ी ड्रेन के प्रोजेक्ट पर फिरा पानी
सीएम की 18 सितंबर 2016 की रैली में भी यह प्रोजेक्ट रखा गया था लेकिन सीएम ने इस प्रोजेक्ट पर ध्यान न देते हुए शहर के बाहरी क्षेत्र में ड्रेन निर्माण करवाए जाने की घोषणा की ताकि एसटीपी प्लांट के दूषित पानी को भी इस ड्रेन में ही डाला जा सके। किसानों द्वारा खेतों की जमीन दिए जाने से इंकार कर दिए जाने पर जिले में बड़ी ड्रेन के निर्माण का प्रोजेक्ट भी अब रद्द हो गया था। यह ड्रेन 90 करोड़ में 63 हजार वर्ग फीट लंबाई में बननी थी ताकि इन दोनो एसटीपी का दूषित पानी इन ड्रेन में डाला जा सके जिससे शहर की सीवरेज व्यवस्था भी बाधित न होने पाए।