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Bhiwani News: प्ले स्कूल के नाम पर नियमों से खेल

Sat, 26 Apr 2025 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Sat, 26 Apr 2025 12:03 AM IST
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Playing with rules in the name of play school
संजय वर्मा
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भिवानी। बिना मान्यता स्कूल संचालन में नामी स्कूल भी पीछे नहीं है। अलग-अलग जगहों पर प्ले स्कूल खोल रखे हैं, जिनकी महिला एवं बाल विकास या शिक्षा विभाग से कोई मान्यता नहीं है। शिक्षा अधिकारियों के निरीक्षण में खुलासा होने के बाद विभाग ने ऐसे स्कूलों को पर कार्रवाई की तैयारी कर ली है। इतना ही नहीं अवैध शिक्षा अकादमियों और बिना मान्यता वाले स्कूलों पर भी निगरानी बढ़ा दी है। हालांकि अस्थायी मान्यता वाले स्कूलों पर कार्रवाई का मामला अभी ठंडा है। इन स्कूलों को अभी बिना मान्यता वाले स्कूलों की सूची से बाहर ही रखा है।
अवैध शिक्षा अकादमियों और बिना मान्यता वाले स्कूलों की सूची सार्वजनिक करने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी अभिभावकों से अपने बच्चों का इनमें दाखिला नहीं कराने का अनुरोध कर रहे हैं। कार्रवाई होने की सूरत में बच्चों के भविष्य के संबंध में अभिभावकों की ही जिम्मेदारी रहेगी। क्योंकि इन शिक्षा अकादमियों की स्कूली शिक्षा नियमावली के तहत कोई मान्यता नहीं है।
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स्कूल संचालक प्रवेश लेने वाले बच्चों को ओपन स्कूल या फिर मिलीभगत कर अन्य विद्यालयों में दाखिला दर्शा रहे हैं। जबकि इनकी कक्षाएं अकादमियों के अंदर लगाई जा रही हैं। कोई हादसा या होता है तो प्रशासन जागता है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल है।
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जिलेभर में 45 अवैध शिक्षा अकादमी और 106 बिना मान्यता के निजी स्कूल
जिलेभर में 45 अवैध शिक्षा अकादमी और 106 बिना मान्यता के निजी स्कूलों को शिक्षा विभाग ने सूचीबद्ध कर इनके नाम सार्वजनिक किए हैं। प्ले स्कूलों की सूची में कई ऐसे नामी स्कूलों की शाखाएं भी शामिल हैं, जो किसी दूसरी जगह चल रही हैं, लेकिन कॉलोनियों के अंदर रिहायशी मकानों में ब्रांच खोल दी है।
पढ़ाई के नाम पर खिलवाड़
संकरी जगहों पर बच्चों को पढ़ाई कराने के नाम पर खिलवाड़ किया जा रहा है, क्योंकि इनमें सुरक्षा के कोई प्रबंध तक नहीं हैं। शिक्षा विभाग की ओर से अवैध शिक्षा अकादमियों के नाम सार्वजनिक किए जाने के बावजूद स्कूली समय में इनके अंदर बच्चों की कक्षाएं धड़ल्ले से लग रही हैं। हालांकि अवैध शिक्षा अकादमियों और बिना मान्यता के चलाए जा रहे स्कूलों के मामले में 28 अप्रैल को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में भी सुनवाई होनी है, जिसमें सरकार की तरफ से कोर्ट में अपना पक्ष रखा जाएगा।

ये हैं प्ले स्कूलों की मान्यता के मानक
प्ले स्कूलों की मान्यता का हर साल नवीनीकरण कराना अनिवार्य है।
कोई प्ले स्कूल बंद करता है तो इसकी अनुमति भी लेनी होगी।

प्ले स्कूल नियमों पर खरा नहीं उतरता है तो उसे तुरंत बंद करा दिया जाएगा।

प्ले स्कूलों की सूची विभाग को डिस्प्ले बोर्ड पर लगानी होगी, जो बंद हुए हैं उनकी सूची भी लगानी होगी।

बच्चों की फीस हर साल सरकार की ओर से निर्धारित की जाएगी, कोई भी मनमानी फीस नहीं वसूल सकेगा।

अभिभावक अध्यापक एसोसिएशन का भी गठन अनिवार्य है, जो स्कूल का समय-समय पर निरीक्षण भी करेगी।

तीन या चार घंटे से ज्यादा कक्षाओं का संचालन नहीं होगा।

एक कक्षा में केवल 20 बच्चों पर एक टीचर व एक केयर टेकर अनिवार्य है।

बच्चों के लिए विश्राम कक्ष, दिव्यांग बच्चों के लिए शौचालय, लड़के व लड़कियों के लिए अलग शौचालय बनाने होंगे।

प्ले स्कूल में बच्चों की खेलकूद गतिविधियों के लिए खेल मैदान व पूरे परिसर में सीसीटीवी अनिवार्य है।

बच्चों के लिए सुरक्षित भवन के अलावा फायर सेफ्टी प्रबंध जरूरी हैं। भवन परिसर में समय समय पर दवा छिड़काव अनिवार्य है।

स्कूल के अंदर लाइब्रेरी अनिवार्य है, जिसमें ऑडियो वीडियो सुविधा जरूरी है।

प्ले स्कूलों में बच्चों के साथ स्टाफ का भी रिकाॅर्ड अपडेट होना अनिवार्य है।

संचालक या प्राचार्य पर जेजे एक्ट या पॉस्को एक्ट के अलावा कोई भी आपराधिक केस दर्ज नहीं होना चाहिए।

तीन वर्ष से कम व छह वर्ष से अधिक आयु के बच्चे नहीं पढ़ाए जाएंगे।

मान्यता के लिए कम से कम दो अधिकारियों की कमेटी निरीक्षण करेगी और जिसमें खंड स्तर के अधिकारी शामिल होंगे।

प्ले स्कूल की आड़ में लगाई जा रहीं दसवीं-बारहवीं तक की कक्षाएं
विभाग की सूची में मिले अधिकतर स्कूलों के नाम के आगे प्ले स्कूल लिखा है, जबकि निरीक्षण में इनके अंदर दसवीं और बारहवीं तक के बच्चे पढ़ाई करते हुए मिले हैं। प्ले स्कूल की मान्यता महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से जिलास्तर पर दी जाती है, जबकि प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूल की मान्यता शिक्षा निदेशालय से ही मिलती है। इन्हीं का फायदा उठाकर बिना मान्यता वाले स्कूलों ने बोर्ड पर स्कूल के नाम में प्ले शामिल कर लिया।

बिना मान्यता वाले स्कूलों और अवैध शिक्षा अकादमी के मामलों की 28 अप्रैल को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की ओर से सुनवाई की जाएगी। न्यायालय के समक्ष अवैध शिक्षा अकादमी व बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों की सूची सौंपेंगे और यह भी बताया जाएगा कि शिक्षा विभाग ने 2024 में इन्हीं नामों की सूची जारी की थी, जबकि 2025 में भी इन्हीं स्कूलों की सूची जारी कर दी है। शिक्षा विभाग केवल सूची जारी कर रहा है। किसी भी स्कूल व एकेडमी को बंद नहीं कराया है। हाईकोर्ट में उन अधिकारियों की सूची भी देंगे जो इनका बचाव कर रहे हैं। - बृजपाल सिंह परमार, अध्यक्ष, स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन, भिवानी।

प्राइवेट स्कूलों पर सभी मानक पूरे करने और नियमों की पालना कर उनके अंदर पढ़ाई करने वाले बच्चों की सुरक्षा का दायित्व भी जुड़ा है। हम किसी भी ऐसे विद्यालय के पक्ष में नहीं हैं जो नियम व शिक्षा नियमावली के मानकों को पूरा नहीं करता है। लेकिन अवैध शिक्षा अकादमी और बिना मान्यता के स्कूलों के पास कुछ भी प्रमाणित नहीं है, फिर भी धड़ल्ले से शिक्षा के नाम पर दुकानें और व्यापारीकरण के तहत अभिभावकों के साथ धोखा कर रहे हैं। इन पर कार्रवाई होनी चाहिए। -रामअवतार शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन हरियाणा।


कोई भी मान्यता प्राप्त निजी स्कूल अलग से कोई ब्रांच नहीं चला सकता है। एक परिसर में भी दो ब्रांच नहीं चलाई जा सकती है। दूसरी ब्रांच पर भी स्कूल मान्यता संबंधी नियम व मानक पूरे कर अलग से मान्यता लेना अनिवार्य है। ऐसे स्कूलों को बिना मान्यता वाले स्कूलों की सूची में डाला गया है। अवैध शिक्षा अकादमियों पर भी निगरानी रखी जा रही है। स्कूली समय में कक्षाएं लगाने पर कार्रवाई होगी। -सुभाष भारद्वाज, जिला शिक्षा अधिकारी, भिवानी।
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