भिवानी। हरियाणा में बढ़ते प्रदूषण को लेकर एनजीटी के आदेश पर खनन कार्य बंद है। इसके विरोध में क्रशर मालिक व मजदूर मंगलवार को शहर की सड़कों पर उतरे। उन्होंने क्रशर चालू करवाने की मांग की।
इस दौरान क्रशर यूनियनों ने चेतावनी दी कि दो दिन बाद क्रेशर यूनियनों की बैठक होगी, जिसके बाद यूनियन जो फैसला लेगी, वह मान्य होगा। सरकार ने रोका तो भूख हड़ताल पर बैठ जाएंगे। इस बारे में चेयरमैन क्रशर एसोसिएशन खानक-डाडम मास्टर सतबीर रतेरा ने कहा कि अक्तूबर में दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र में पर्यावरण प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने हरियाणा, पंजाब व यूपी सरकार पर पर्यावरण दूषित करने के आरोप लगाए थे। इस पर जमकर राजनीति भी हुई और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। इसके बाद एनजीटी ने एनसीआर में निर्माण व खनन कार्यों पर रोक लगाई थी, लेकिन अब धीरे-धीरे पर्यावरण में सुधार हुआ तो निर्माण कार्यों को तो शुरू कर दिया। भिवानी समेत चरखी दादरी व नारनौल में क्रशर अब भी डेढ़ माह से बंद पड़े हैं। इससे क्रशर मालिकों को रोजाना लाखों रुपयों का नुकसान हो रहा है और हजारों मजदूर भी बेरोजगार हो गए हैं। निर्माण कार्य करने वाले लाखों लोगों को निर्माण सामग्री महंगी मिल रही है। रतेरा ने कहा कि इन्हीं सब बातों को लेकर उन्होंने शहर में सड़कों पर उतर कर सरकार के खिलाफ हल्ला बोल प्रदर्शन किया है, जिसमें चरखी दादरी के प्रधान भी शामिल हुए। रतेरा ने कहा कि अधिकारी सरकार को गुमराह कर रहे हैं। दिल्ली से 17 किलोमीटर दूर खनन बंद है और 125 किलोमीटर की दूरी में चालू है। उन्होंने कहा कि वह और उनके मजदूर भुखमरी की कगार पर हैं और जनता को निर्माण सामग्री महंगी मिल रही है। यही नहीं, निर्माण कार्य जारी हैं और सारी निर्माण सामग्री राजस्थान से आ रही है। जिससे सरकार को राजस्व का घाटा है और जनता पर महंगाई की मार पड़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दो दिन तक सरकार ने क्रशर चालू नहीं किए तो वे यूनियन के निर्देश अनुसार भूख हड़ता तक भी करने को मजबूर होंगे। इस अवसर पर क्रशर एसोसिएशन खानक-डाडम प्रधान सुनील जिंदल, प्रधान क्रशर एसोसिएशसन चरखी दादरी सोमबीर घसौला, राजेश महता, अनिल जैन, जेपी, रमेश श्योराण, हरीश जिंदल सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।