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Bhiwani News: सरकारी स्कूलों में डेढ़ लाख बच्चों को नहीं भा रहा आटे का स्वाद, डीईईओ ने मुख्यालय भेजी सप्लाई बंद की अनुशंसा
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भिवानी। सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे करीब डेढ़ लाख बच्चों को सप्लाई में आ रहे आटे का स्वाद नहीं भा रहा है। यही वजह है कि अब सरकारी स्कूलों से मिल रही अधिकांश शिकायतों के बाद जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी (डीईईओ) ने भी आटा सप्लाई बंद किए जाने की अनुशंसा मुख्यालय को भेजी है।
दरअसल, अध्यापक संगठन भी स्कूलों में बच्चों के मिड डे मील भोजन में आटा सप्लाई पर एतराज जता चुके हैं। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने इसे बंद कराने का निर्णय लिया है। जिलेभर के अधिकांश स्कूलों से भी शिक्षा अधिकारियों के समक्ष हर माह आटे में कीड़े चलने की शिकायतें आ रही हैं, जिससे बच्चों की सेहत पर फूड प्वाइजनिंग होने और बीमार होने का भी खतरा बना है।
हरियाणा स्कूली शिक्षा निदेशालय ने इसी साल जुलाई से भिवानी जिले के 743 सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए मध्याह्न भोजन यानी मिड डे मील में गेहूं की जगह आटा भिजवाने की व्यवस्था को लागू किया था। गेहूं की सप्लाई हैफेड के माध्यम से दी जाती थी, मगर आटा की सप्लाई शिक्षा विभाग के ठेकेदार को सौंपी गई। जो आटा मिलों से इसकी सप्लाई हर तिमाही सरकारी स्कूलों पर करा रहे थे।
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अधिकारियों की मानें तो प्रत्येक स्कूल में आटा की सप्लाई हर 20 से 25 दिन बाद दी जाने लगी। मगर इतने दिनों तक आटे की गुणवत्ता को बरकरार रख पाना मुश्किल हो रहा है। आटा सप्ताह भर से ज्यादा नहीं चल सकता। इसके बाद इसकी गुणवत्ता खत्म होने लगती है और ज्यादा पुराने आटा के इस्तेमाल से बच्चों को फूड प्वाइजनिंग तक हो सकती है, जो उनके लिए जानलेवा भी हो सकती है। वहीं दस दिन बाद ही आटे में कीड़े भी चलने लग जाते हैं। जबकि गेहूं का सरकारी स्कूलों में भंडारण साल भर तक आसानी से चल सकता है। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय को गेहूं भंडारण के लिए विभाग की तरफ से टंकी भी मुहैया कराई जा चुकी हैं। इसके अलावा अधिकांश सरकारी स्कूलों के पास तो रसोई घर की भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मिड डे मील का सूखा राशन स्टोर में अन्य सामान के साथ रखा जाता है। इसमें आटा को सुरक्षित रख पाना भी नामुमकिन है।
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हर बार सप्लाई में वापस हो रहा है ठेकेदार को आटा
अधिकांश सरकारी स्कूलों में सप्लाई के दौरान पुराना व खराब आटा भी मिड डे मील इंचार्ज की तरफ से वापस किया जा रहा है। इस आटे को ढुलाई ठेकेदार वापस मिलों में पहुंचा देते हैं। मगर आटा मिलों में फिर से इसे सही आटे के साथ मिलाकर वापस भेजा जा रहा है। इसकी वजह से आटा का स्वाद भी बिगड़ गया है। इससे बच्चे खाना भी पसंद नहीं कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में तो बच्चे घर से ही खाना लेकर आने लगे हैं।
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गेहूं पिसाई के झंझट से छुटकारा पाने के लिए की थी विभाग ने व्यवस्था
सरकारी स्कूलों में गेहूं सप्लाई को इसलिए बंद किया था कि इसकी पिसाई का झंझट बन रहा था, जिससे छुटकारा पाने के लिए ही सीधा स्कूलों में आटा भेजा जाने लगा। हालांकि स्कूलों में पहले बच्चों के लिए गेहूं का आटा पिसाई से पहले मिड डे मील कूक से ही उसकी अच्छी तरह सफाई कराई जाती थी। फिर उसे पिसाया जाता था। स्कूल छात्र संख्या के हिसाब से केवल सप्ताह भर का ही आटा पिसाई कराता था, जिससे न तो आटा खराब होता और इसकी गुणवत्ता भी बनी रहती थी। मगर अब आटा स्कूलों में सप्लाई में 20 से 25 दिन के बाद ही आता है। ऐसे में इस आटे को इतने दिनों तक सुरक्षित रख पाना संभव नहीं है।
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अधिकांश सरकारी स्कूलों से सप्लाई में भेजे जा रहे आटा को लेकर शिकायतें आ रही हैं। काफी बार खराब आटा वापस भी कराया गया है, मगर ये व्यवस्था ज्यादा कामयाब नहीं रही है। इसलिए स्कूलों में आटा भिजवाने की व्यवस्था को बंद कराए जाने की अनुशंसा मैंने मुख्यालय को भेजी है। आटा की जगह फिर से स्कूलों में मिड डे मील के लिए गेहूं भिजवाए जाने की व्यवस्था कराएंगे।
-संतोष नागर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, भिवानी।
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दरअसल, अध्यापक संगठन भी स्कूलों में बच्चों के मिड डे मील भोजन में आटा सप्लाई पर एतराज जता चुके हैं। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने इसे बंद कराने का निर्णय लिया है। जिलेभर के अधिकांश स्कूलों से भी शिक्षा अधिकारियों के समक्ष हर माह आटे में कीड़े चलने की शिकायतें आ रही हैं, जिससे बच्चों की सेहत पर फूड प्वाइजनिंग होने और बीमार होने का भी खतरा बना है।
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हरियाणा स्कूली शिक्षा निदेशालय ने इसी साल जुलाई से भिवानी जिले के 743 सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए मध्याह्न भोजन यानी मिड डे मील में गेहूं की जगह आटा भिजवाने की व्यवस्था को लागू किया था। गेहूं की सप्लाई हैफेड के माध्यम से दी जाती थी, मगर आटा की सप्लाई शिक्षा विभाग के ठेकेदार को सौंपी गई। जो आटा मिलों से इसकी सप्लाई हर तिमाही सरकारी स्कूलों पर करा रहे थे।
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अधिकारियों की मानें तो प्रत्येक स्कूल में आटा की सप्लाई हर 20 से 25 दिन बाद दी जाने लगी। मगर इतने दिनों तक आटे की गुणवत्ता को बरकरार रख पाना मुश्किल हो रहा है। आटा सप्ताह भर से ज्यादा नहीं चल सकता। इसके बाद इसकी गुणवत्ता खत्म होने लगती है और ज्यादा पुराने आटा के इस्तेमाल से बच्चों को फूड प्वाइजनिंग तक हो सकती है, जो उनके लिए जानलेवा भी हो सकती है। वहीं दस दिन बाद ही आटे में कीड़े भी चलने लग जाते हैं। जबकि गेहूं का सरकारी स्कूलों में भंडारण साल भर तक आसानी से चल सकता है। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय को गेहूं भंडारण के लिए विभाग की तरफ से टंकी भी मुहैया कराई जा चुकी हैं। इसके अलावा अधिकांश सरकारी स्कूलों के पास तो रसोई घर की भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मिड डे मील का सूखा राशन स्टोर में अन्य सामान के साथ रखा जाता है। इसमें आटा को सुरक्षित रख पाना भी नामुमकिन है।
हर बार सप्लाई में वापस हो रहा है ठेकेदार को आटा
अधिकांश सरकारी स्कूलों में सप्लाई के दौरान पुराना व खराब आटा भी मिड डे मील इंचार्ज की तरफ से वापस किया जा रहा है। इस आटे को ढुलाई ठेकेदार वापस मिलों में पहुंचा देते हैं। मगर आटा मिलों में फिर से इसे सही आटे के साथ मिलाकर वापस भेजा जा रहा है। इसकी वजह से आटा का स्वाद भी बिगड़ गया है। इससे बच्चे खाना भी पसंद नहीं कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में तो बच्चे घर से ही खाना लेकर आने लगे हैं।
गेहूं पिसाई के झंझट से छुटकारा पाने के लिए की थी विभाग ने व्यवस्था
सरकारी स्कूलों में गेहूं सप्लाई को इसलिए बंद किया था कि इसकी पिसाई का झंझट बन रहा था, जिससे छुटकारा पाने के लिए ही सीधा स्कूलों में आटा भेजा जाने लगा। हालांकि स्कूलों में पहले बच्चों के लिए गेहूं का आटा पिसाई से पहले मिड डे मील कूक से ही उसकी अच्छी तरह सफाई कराई जाती थी। फिर उसे पिसाया जाता था। स्कूल छात्र संख्या के हिसाब से केवल सप्ताह भर का ही आटा पिसाई कराता था, जिससे न तो आटा खराब होता और इसकी गुणवत्ता भी बनी रहती थी। मगर अब आटा स्कूलों में सप्लाई में 20 से 25 दिन के बाद ही आता है। ऐसे में इस आटे को इतने दिनों तक सुरक्षित रख पाना संभव नहीं है।
अधिकांश सरकारी स्कूलों से सप्लाई में भेजे जा रहे आटा को लेकर शिकायतें आ रही हैं। काफी बार खराब आटा वापस भी कराया गया है, मगर ये व्यवस्था ज्यादा कामयाब नहीं रही है। इसलिए स्कूलों में आटा भिजवाने की व्यवस्था को बंद कराए जाने की अनुशंसा मैंने मुख्यालय को भेजी है। आटा की जगह फिर से स्कूलों में मिड डे मील के लिए गेहूं भिजवाए जाने की व्यवस्था कराएंगे।
-संतोष नागर, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, भिवानी।