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अधिकारी बदले, ठेकेदार बदले, नहीं बदले स्वास्थ्यकर्मियों के हालात
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भिवानी। स्वास्थ्य विभाग में पिछले चार साल में चार से पांच सिविल सर्जन और अनुबंध कंपनी के ठेकेदार बदल चुके हैं मगर अनुबंध आधार पर लगे 308 कर्मचारियों के हालात नहीं बदले। कर्मचारियों का न तो समय पर वेतन जारी हो रहा है और न ही उन्हें सरकारी और कंपनी की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ मिल रहा। सरकार प्रत्येक कंपनी को उनके कर्मचारियों का पीएफ नंबर और स्वास्थ्य के उपचार के लिए ईएसआई कार्ड बनवाने के निर्देश देती रही है मगर स्वास्थ्य विभाग इन निर्देशों को अनसुना कर रहा है।
वर्ष 2021 में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के लिए अनुबंध कंपनी को ठेका दिया था। कंपनी ने नागरिक अस्पताल में 308 कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 350 कर्मचारी लगाए थे। इस कंपनी के ठेकेदार ने अब तक कर्मचारियों का पीएफ नंबर जारी नहीं किया है। इसके अलावा सालों बीत जाने के बाद भी इन कर्मचारियों का ईएसआई कार्ड नहीं बना है। अगर कोई कर्मचारी स्वयं या उनके परिवार में कोई बीमार हो जाता है तो उसे उपचार के लिए हजारों रुपये अपनी जेब से देने होंगे। इसके अलावा करीब चार से पांच साल से इन कर्मचारियों को एरियर नहीं दिया है। बार-बार लिखित-मौखिक और धरने-प्रदर्शन के बावजूद स्वास्थ्य विभाग या फिर कंपनी के ठेकेदार ने इनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया।
बगैर नोटिस 52 कर्मचारियों को नौकरी से हटाया
नागरिक अस्पताल सहित ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों से करीब 52 कर्मचारी हटाए गए है। इनमें लैब टेक्निशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर सहित अन्य पदों के कर्मचारी शामिल हैं। इन कर्मचारियों को हटाने के कारण अस्पतालों में व्यवस्था प्रभावित हुई है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में भी इन कर्मचारियों की कमी की वजह से व्यवस्था ठप होने के मामले सामने आ चुके हैं। वहीं इन कर्मचारियों का भी वेतन जारी नहीं किया है। साथ ही कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें इस संबंध में लिखित रूप से कोई नोटिस जारी नहीं किया है। सिर्फ मौखिक तौर पर ही उन्हें नौकरी पर न आने के निर्देश दिए हैं, जिसकी वजह से उनकी चिंता अधिक बढ़ गई है।
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न जारी हुआ पीएफ, न मिला रहा ईएसआई कार्ड का लाभ
अनुबंध आधार पर लगे कर्मचारियों का ठेका मार्च 2021 में रिन्यू हुआ था। करीब 13 माह बीत जाने के बाद भी उन्हें अब तक पीएफ नंबर जारी नहीं हुआ है। साथ ही उनका पीएफ भी नहीं काटा जा रहा है। इसके अलावा कंपनी की ओर से नियमानुसार उनके स्वास्थ्य का उपचार के लिए ईएसआई कार्ड बनाया जाता है, जोकि अब तक नहीं बना है। ऐसे में अगर उनके परिवार में या फिर वे स्वयं बीमार होते है तो उन्हें उपचार के लिए अपनी जेब से ही खर्च वहन करना पड़ेगा।
मनमर्जी से हटाएं 16 कर्मचारियों का आठ माह का वेतन रुका
नागरिक अस्पताल में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान 16 कर्मचारियों को कंपनी के ठेकेदार ने अपनी मनमर्जी से हटा दिया था। इसके विरोध में अनुबंध कर्मचारियों ने एकजुट होकर आवाज उठाई और अस्पताल में धरना दिया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कंपनी के ठेकेदार ने 16 कर्मचारियों को वापस नौकरी लगाया। कंपनी की ओर से उन्हें नौकरी पर तो लगा दिया मगर आठ माह का वेतन अब तक नहीं दिया है। इसकी वजह से से उन्हें आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ रहा है।
नागरिक अस्पताल के अनुबंध आधार पर लगे 308 कर्मचारियों का करीब चार माह से वेतन जारी नहीं हुआ है। इसके अलावा पीएफ, ईएसआई कार्ड, एरियर भी कर्मचारियों की परेशानी का कारण बना हुआ है। कंपनी का ठेकेदार अपनी मर्जी से किसी भी कर्मचारी को हटा देता है, जोकि सरासर गलत है। कर्मचारियों को सिर्फ नाम का कोरोना योद्धा माना है। असल में तो कंपनी के ठेकेदार अनुबंध आधार पर लगे कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं। कर्मचारियों की मांगों को लेकर सोमवार को लघु सचिवालय में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा जाएगा। अगर मांगें नहीं मानी तो हड़ताल पर जाने पर भी विचार किया जाएगा।
दीपक तंवर, प्रधान, अनुबंध आधार कर्मचारी यूनियन।
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वर्ष 2021 में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के लिए अनुबंध कंपनी को ठेका दिया था। कंपनी ने नागरिक अस्पताल में 308 कर्मचारी और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 350 कर्मचारी लगाए थे। इस कंपनी के ठेकेदार ने अब तक कर्मचारियों का पीएफ नंबर जारी नहीं किया है। इसके अलावा सालों बीत जाने के बाद भी इन कर्मचारियों का ईएसआई कार्ड नहीं बना है। अगर कोई कर्मचारी स्वयं या उनके परिवार में कोई बीमार हो जाता है तो उसे उपचार के लिए हजारों रुपये अपनी जेब से देने होंगे। इसके अलावा करीब चार से पांच साल से इन कर्मचारियों को एरियर नहीं दिया है। बार-बार लिखित-मौखिक और धरने-प्रदर्शन के बावजूद स्वास्थ्य विभाग या फिर कंपनी के ठेकेदार ने इनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया।
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बगैर नोटिस 52 कर्मचारियों को नौकरी से हटाया
नागरिक अस्पताल सहित ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों से करीब 52 कर्मचारी हटाए गए है। इनमें लैब टेक्निशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर सहित अन्य पदों के कर्मचारी शामिल हैं। इन कर्मचारियों को हटाने के कारण अस्पतालों में व्यवस्था प्रभावित हुई है। नागरिक अस्पताल की ओपीडी में भी इन कर्मचारियों की कमी की वजह से व्यवस्था ठप होने के मामले सामने आ चुके हैं। वहीं इन कर्मचारियों का भी वेतन जारी नहीं किया है। साथ ही कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें इस संबंध में लिखित रूप से कोई नोटिस जारी नहीं किया है। सिर्फ मौखिक तौर पर ही उन्हें नौकरी पर न आने के निर्देश दिए हैं, जिसकी वजह से उनकी चिंता अधिक बढ़ गई है।
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न जारी हुआ पीएफ, न मिला रहा ईएसआई कार्ड का लाभ
अनुबंध आधार पर लगे कर्मचारियों का ठेका मार्च 2021 में रिन्यू हुआ था। करीब 13 माह बीत जाने के बाद भी उन्हें अब तक पीएफ नंबर जारी नहीं हुआ है। साथ ही उनका पीएफ भी नहीं काटा जा रहा है। इसके अलावा कंपनी की ओर से नियमानुसार उनके स्वास्थ्य का उपचार के लिए ईएसआई कार्ड बनाया जाता है, जोकि अब तक नहीं बना है। ऐसे में अगर उनके परिवार में या फिर वे स्वयं बीमार होते है तो उन्हें उपचार के लिए अपनी जेब से ही खर्च वहन करना पड़ेगा।
मनमर्जी से हटाएं 16 कर्मचारियों का आठ माह का वेतन रुका
नागरिक अस्पताल में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान 16 कर्मचारियों को कंपनी के ठेकेदार ने अपनी मनमर्जी से हटा दिया था। इसके विरोध में अनुबंध कर्मचारियों ने एकजुट होकर आवाज उठाई और अस्पताल में धरना दिया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कंपनी के ठेकेदार ने 16 कर्मचारियों को वापस नौकरी लगाया। कंपनी की ओर से उन्हें नौकरी पर तो लगा दिया मगर आठ माह का वेतन अब तक नहीं दिया है। इसकी वजह से से उन्हें आर्थिक तंगी से गुजरना पड़ रहा है।
नागरिक अस्पताल के अनुबंध आधार पर लगे 308 कर्मचारियों का करीब चार माह से वेतन जारी नहीं हुआ है। इसके अलावा पीएफ, ईएसआई कार्ड, एरियर भी कर्मचारियों की परेशानी का कारण बना हुआ है। कंपनी का ठेकेदार अपनी मर्जी से किसी भी कर्मचारी को हटा देता है, जोकि सरासर गलत है। कर्मचारियों को सिर्फ नाम का कोरोना योद्धा माना है। असल में तो कंपनी के ठेकेदार अनुबंध आधार पर लगे कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं। कर्मचारियों की मांगों को लेकर सोमवार को लघु सचिवालय में उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा जाएगा। अगर मांगें नहीं मानी तो हड़ताल पर जाने पर भी विचार किया जाएगा।
दीपक तंवर, प्रधान, अनुबंध आधार कर्मचारी यूनियन।