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नप पार्षदों का कार्यकाल पूरा, 13 को होगी वार्डबंदी पर सुनवाई
ब्यूरो/अमर उजाला भिवानी
Updated Wed, 06 Jan 2016 12:49 AM IST
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भिवानी। नगर परिषद भिवानी के पार्षदों का पांच वर्ष का कार्यकाल मंगलवार को खत्म हो गया। बुधवार से यहां प्रशासक होगा। एसडीएम को प्रशासक नियुक्त किया गया है। कार्यकाल के अंतिम दिन नगर परिषद में पार्षद एक-दूसरे से मिलकर कार्यकाल बेहतर रहने और भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते दिखे।
वर्ष 2011 में नगर परिषद के 31 वार्डों के पार्षदों का चुनाव हुआ था। पार्षदों का कार्यकाल मंगलवार को संपन्न हो गया। नगर परिषद के दोबारा चुनाव होने तक यहां एसडीएम को प्रशासक नियुक्त किया गया है। चुनावों में देरी होना तय है। इसका कारण अधूरी तैयारियां। अभी तक भिवानी शहर की वार्डबंदी तक फाइनल नहीं हो पाई है। करीब दो माह पहले वार्डबंदी तैयार की गई थी, जिस पर 43 आपत्तियां आई। मगर आपत्तियों पर सुनवाई के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने अब तक कोई बैठक नहीं की है। हालांकि अब एसडीएम की ओर से 13 को इस बारे में बैठक बुलाई गई है। कार्यकाल के अंतिम दिन पार्षद नगर परिषद परिसर में बैठ एक-दूसरे से कार्यकाल और भविष्य के बारे में विचार विमर्श करते रहे।
पांच वर्ष के कार्यकाल में रहे तीन चेयरमैन
नगर परिषद पार्षदों के पांच साल के कार्यकाल में तीन चेयरमैन रहे। विजय पंचगावा और भवानी प्रताप पूरी तरह चेयरमैन रहे तो मामनचंद कार्यकारी के तौर पर रहे। सबसे अधिक कार्यकाल विजय पंचगावा का रहा। वह करीब ढाई साल प्रधान रहे। मगर यूनिपोल मामले के चलते उन्हें पद से हटाया गया। मामनचंद करीब डेढ़ साल तक कार्यकारी चेयरमैन के तौर पर कार्यरत रहे। भवानी प्रताप भी करीब 14 महीने तक चेयरमैन रहे।
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13 को होगी वार्डबंदी पर सुनवाई
शहर की नई वार्डबंदी तैयार की गई है। जिससे शहर का पूरा भूगोल ही बदल गया है। शहर के बढ़े हुए क्षेत्र के कारण सभी वार्डों की तस्वीर बदल गई है। अनेक पार्षदों व आम लोगों ने वार्ड बंदी पर आपत्ति जताई है। करीब 43 लोगों की शिकायतें प्रशासन के पास आई है। पिछले करीब दो माह से ठंडे बस्ते में पड़ा मामला पार्षदों का कार्यकाल खत्म होते ही उठ गया है। एसडीएम अब 13 जनवरी को अपने कार्यालय में आपत्तियों पर सुनवाई करेंगे। नगर परिषद सचिव संजय यादव ने बताया कि 13 जनवरी की सुबह 10 बजे शिकायतों की सुनवाई होगी। जिन्होंने भी वार्डबंदी पर ऐतराज जताया है वे एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अपनी बात रखे।
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वर्ष 2011 में नगर परिषद के 31 वार्डों के पार्षदों का चुनाव हुआ था। पार्षदों का कार्यकाल मंगलवार को संपन्न हो गया। नगर परिषद के दोबारा चुनाव होने तक यहां एसडीएम को प्रशासक नियुक्त किया गया है। चुनावों में देरी होना तय है। इसका कारण अधूरी तैयारियां। अभी तक भिवानी शहर की वार्डबंदी तक फाइनल नहीं हो पाई है। करीब दो माह पहले वार्डबंदी तैयार की गई थी, जिस पर 43 आपत्तियां आई। मगर आपत्तियों पर सुनवाई के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने अब तक कोई बैठक नहीं की है। हालांकि अब एसडीएम की ओर से 13 को इस बारे में बैठक बुलाई गई है। कार्यकाल के अंतिम दिन पार्षद नगर परिषद परिसर में बैठ एक-दूसरे से कार्यकाल और भविष्य के बारे में विचार विमर्श करते रहे।
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पांच वर्ष के कार्यकाल में रहे तीन चेयरमैन
नगर परिषद पार्षदों के पांच साल के कार्यकाल में तीन चेयरमैन रहे। विजय पंचगावा और भवानी प्रताप पूरी तरह चेयरमैन रहे तो मामनचंद कार्यकारी के तौर पर रहे। सबसे अधिक कार्यकाल विजय पंचगावा का रहा। वह करीब ढाई साल प्रधान रहे। मगर यूनिपोल मामले के चलते उन्हें पद से हटाया गया। मामनचंद करीब डेढ़ साल तक कार्यकारी चेयरमैन के तौर पर कार्यरत रहे। भवानी प्रताप भी करीब 14 महीने तक चेयरमैन रहे।
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13 को होगी वार्डबंदी पर सुनवाई
शहर की नई वार्डबंदी तैयार की गई है। जिससे शहर का पूरा भूगोल ही बदल गया है। शहर के बढ़े हुए क्षेत्र के कारण सभी वार्डों की तस्वीर बदल गई है। अनेक पार्षदों व आम लोगों ने वार्ड बंदी पर आपत्ति जताई है। करीब 43 लोगों की शिकायतें प्रशासन के पास आई है। पिछले करीब दो माह से ठंडे बस्ते में पड़ा मामला पार्षदों का कार्यकाल खत्म होते ही उठ गया है। एसडीएम अब 13 जनवरी को अपने कार्यालय में आपत्तियों पर सुनवाई करेंगे। नगर परिषद सचिव संजय यादव ने बताया कि 13 जनवरी की सुबह 10 बजे शिकायतों की सुनवाई होगी। जिन्होंने भी वार्डबंदी पर ऐतराज जताया है वे एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अपनी बात रखे।