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खास खबर: अब जूई नहर से पाइपलाइन के जरिये सीधे जुड़ेंगे आठ गांवों के जोहड़
Mon, 11 Nov 2024 02:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 11 Nov 2024 02:52 AM IST
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गांव जूई का जोहड़।
संजय वर्मा
भिवानी। अब जूई नहर से पाइपलाइन के जरिए जिले के गांव गांवों के जोहड़ सीधे तौर पर जुड़ जाएंगे। इसके लिए सिंचाई विभाग करीब दो करोड़ रुपये के बजट से नहर से जोहड़ों तक पाइपलाइन डालने का काम कराएगा। इसमें छह जोहड़ों की निविदा सिंचाई विभाग ने कराई है जबकि दो जोहड़ों के कार्य कराने के लिए एजेंसी को कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं जबकि दो गांवों के जोहड़ों के सुधार कार्य का एस्टीमेंट मुख्यालय को भेजा गया है।
उठान सिंचाई (लिफ्ट इरिगेशन) परियोजना के तहत सूखाग्रस्त इलाकों के जोहड़ों में पाइपलाइन के जरिये सीधे पानी पहुंचाने से भूमिगत जलस्तर में इजाफा होगा। वहीं, बिजली गुल होने के बावजूद जोहड़ों में पानी संचय से कुछ घंटे का बैकअप भी मिलेगा। यानी बिजली गुल होने पर भी पानी वापस नहीं जाएगा बल्कि ऊंचाई वाले इलाके में जल संचय संभव होगा।
सिंचाई विभाग के जूई खंड के तहत अधिकतर इलाका उठान सिंचाई परियोजना के तहत आता है। जहां नहर के बीच में ही बड़ी मोटरों के जरिये पानी का दबाव बनाकर उन्हें ऊंचे टीलों तक पहुंचाया जाता है। अगर एक बार भी बिजली गुल होती है तो ऊंचाई पर दबाव के जरिये बनाए गए पानी का बहाव वापस होने लगता है। ऐसे में सिंचाई विभाग को फिर से पानी नहर के अंतिम सिरे तक पहुंचाने में कई घंटों का समय लग जाता है।
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करीब 30 किलोमीटर लंबी जूई नहर के बीच में जल संचय का कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में अब सिंचाई विभाग नहर के नजदीक आठ गांवों के जोहड़ों तक सीधी पाइपलाइन डालकर उनमें पानी का संचय कराएगा। अगर नहर में पानी चलने के दौरान बीच में बिजली गुल होती है तो कुछ घंटों का बैकअप इन जोहड़ों के पानी से नहर को मिल जाएगा। इससे पानी का बहाव ज्यादा प्रभावित नहीं होगा और अचानक बिजली जाने पर पानी का बहाव वापस होने पर भी आपूर्ति रुकने का डर नहीं होगा।
सूखाग्रस्त इलाकों के जोहड़ों में हर समय रहेगा पानी
सिंचाई विभाग की इस योजना का दोहरा लाभ मिलेगा। एक तो सूखाग्रस्त इलाके के जोहड़ों में पानी की किल्लत के दौरान भी जल उपलब्ध रहेगा। यानी ये जोहड़ नहीं सूखेंगे और भूमिगत जलस्तर में भी इजाफा होगा। अब गर्मियों के दौरान इन गांवों के जोहड़ सूख जाते हैं, जिससे पशुओं को पीने के लिए पानी का संकट रहता है। सिंचाई के लिए भी पानी नहीं मिल पाता जबकि इस योजना से पशुओं को पेयजल संकट नहीं रहेगा और सिंचाई के लिए भी पानी का इस्तेमाल संभव होगा।
इन आठ गांवों के जोहड़ों को नहरों से जोड़ा जाएगा
सिंचाई विभाग के जूई खंड के तहत आने वाले जिले के आठ गांवों को नहर से पाइपलाइन के जरिये जोड़ा जाएगा। इनमें भानगढ़, कैरू, जूई, टिटानी, शिमलीवास, मनसरवास, लेघा सहित कुल आठ गांव शामिल हैं। इनके जोहड़ अब नजदीकी नहर और माइनर से जुड़ेंगे। इस योजना पर करीब दो करोड़ रुपये का बजट खर्च आएगा।
सिंचाई विभाग ने नहर से आठ गांवों के जोहड़ों को सीधे तौर पर पाइपलाइन से जोड़ने की परियोजना पर काम शुरू किया है। इसमें छह गांवों के जोहड़ों के लिए निविदा कराई जा चुकी है, जबकि दो जोहड़ों के कार्यादेश भी किए जा चुके हैं। दो जोहड़ों का एस्टीमेट मुख्यालय भेजा गया है। जल संचय और भूमिगत जल स्तर में इजाफा करने के लिए सिंचाई विभाग की ये महत्वाकांक्षी योजना है। इस पर 30 नवंबर से पहले काम भी शुरू करा दिया जाएगा। -अमनदीप देशवाल, कार्यकारी अभियंता, जूई खंड, सिंचाई विभाग, भिवानी।
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भिवानी। अब जूई नहर से पाइपलाइन के जरिए जिले के गांव गांवों के जोहड़ सीधे तौर पर जुड़ जाएंगे। इसके लिए सिंचाई विभाग करीब दो करोड़ रुपये के बजट से नहर से जोहड़ों तक पाइपलाइन डालने का काम कराएगा। इसमें छह जोहड़ों की निविदा सिंचाई विभाग ने कराई है जबकि दो जोहड़ों के कार्य कराने के लिए एजेंसी को कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं जबकि दो गांवों के जोहड़ों के सुधार कार्य का एस्टीमेंट मुख्यालय को भेजा गया है।
उठान सिंचाई (लिफ्ट इरिगेशन) परियोजना के तहत सूखाग्रस्त इलाकों के जोहड़ों में पाइपलाइन के जरिये सीधे पानी पहुंचाने से भूमिगत जलस्तर में इजाफा होगा। वहीं, बिजली गुल होने के बावजूद जोहड़ों में पानी संचय से कुछ घंटे का बैकअप भी मिलेगा। यानी बिजली गुल होने पर भी पानी वापस नहीं जाएगा बल्कि ऊंचाई वाले इलाके में जल संचय संभव होगा।
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सिंचाई विभाग के जूई खंड के तहत अधिकतर इलाका उठान सिंचाई परियोजना के तहत आता है। जहां नहर के बीच में ही बड़ी मोटरों के जरिये पानी का दबाव बनाकर उन्हें ऊंचे टीलों तक पहुंचाया जाता है। अगर एक बार भी बिजली गुल होती है तो ऊंचाई पर दबाव के जरिये बनाए गए पानी का बहाव वापस होने लगता है। ऐसे में सिंचाई विभाग को फिर से पानी नहर के अंतिम सिरे तक पहुंचाने में कई घंटों का समय लग जाता है।
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करीब 30 किलोमीटर लंबी जूई नहर के बीच में जल संचय का कोई विकल्प नहीं है। ऐसे में अब सिंचाई विभाग नहर के नजदीक आठ गांवों के जोहड़ों तक सीधी पाइपलाइन डालकर उनमें पानी का संचय कराएगा। अगर नहर में पानी चलने के दौरान बीच में बिजली गुल होती है तो कुछ घंटों का बैकअप इन जोहड़ों के पानी से नहर को मिल जाएगा। इससे पानी का बहाव ज्यादा प्रभावित नहीं होगा और अचानक बिजली जाने पर पानी का बहाव वापस होने पर भी आपूर्ति रुकने का डर नहीं होगा।
सूखाग्रस्त इलाकों के जोहड़ों में हर समय रहेगा पानी
सिंचाई विभाग की इस योजना का दोहरा लाभ मिलेगा। एक तो सूखाग्रस्त इलाके के जोहड़ों में पानी की किल्लत के दौरान भी जल उपलब्ध रहेगा। यानी ये जोहड़ नहीं सूखेंगे और भूमिगत जलस्तर में भी इजाफा होगा। अब गर्मियों के दौरान इन गांवों के जोहड़ सूख जाते हैं, जिससे पशुओं को पीने के लिए पानी का संकट रहता है। सिंचाई के लिए भी पानी नहीं मिल पाता जबकि इस योजना से पशुओं को पेयजल संकट नहीं रहेगा और सिंचाई के लिए भी पानी का इस्तेमाल संभव होगा।
इन आठ गांवों के जोहड़ों को नहरों से जोड़ा जाएगा
सिंचाई विभाग के जूई खंड के तहत आने वाले जिले के आठ गांवों को नहर से पाइपलाइन के जरिये जोड़ा जाएगा। इनमें भानगढ़, कैरू, जूई, टिटानी, शिमलीवास, मनसरवास, लेघा सहित कुल आठ गांव शामिल हैं। इनके जोहड़ अब नजदीकी नहर और माइनर से जुड़ेंगे। इस योजना पर करीब दो करोड़ रुपये का बजट खर्च आएगा।
सिंचाई विभाग ने नहर से आठ गांवों के जोहड़ों को सीधे तौर पर पाइपलाइन से जोड़ने की परियोजना पर काम शुरू किया है। इसमें छह गांवों के जोहड़ों के लिए निविदा कराई जा चुकी है, जबकि दो जोहड़ों के कार्यादेश भी किए जा चुके हैं। दो जोहड़ों का एस्टीमेट मुख्यालय भेजा गया है। जल संचय और भूमिगत जल स्तर में इजाफा करने के लिए सिंचाई विभाग की ये महत्वाकांक्षी योजना है। इस पर 30 नवंबर से पहले काम भी शुरू करा दिया जाएगा। -अमनदीप देशवाल, कार्यकारी अभियंता, जूई खंड, सिंचाई विभाग, भिवानी।