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अब आठ की बजाय 24 घंटे मिलेगा ई-संजीवनी ओपीडी का लाभ
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नागरिक अस्पताल में स्थापित ई संजीवनी ओपीडी का कक्ष। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। ई-संजीवनी ओपीडी सेवा जिले के नागरिक अस्पताल में आरंभ है। इस ओपीडी के माध्यम से मरीज घर बैठे ही मोबाइल एप के माध्यम से संबंधित चिकित्सक से अपने रोग से संबंधित परामर्श ले सकता है। ई-संजीवनी ओपीडी निर्धारित शेड्यूल अब आठ घंटे की बजाय 24 घंटे लोगों के लिए उपलब्ध करवा दिया है।
इस ओपीडी के माध्यम से फोन पर सलाह ली जा सकती है। ई-संजीवनी के लिए सुबह, शाम व रात्रि 3 शिफ्ट के रूप में कुशल चिकित्सकों की टीम निर्धारित की गई है।
ई-संजीवनी ओपीडी एप पर चिकित्सा विशेषज्ञों से परामर्श लिया जा रहा है। ई-संजीवनी सेवा में महिला रोग, शिशु रोग, डेंगू आशंकित, खांसी, जुकाम और बुखार के पीड़ित परामर्श ले सकते हैं। पीड़ित को करीब आधे घंटे पहले रजिस्ट्रेशन करना होता है। दवाइयां भी ऑनलाइन बताई जा रही हैं। नागरिक अस्पताल में स्थापित ई-संजीवनी ओपीडी में रोजाना औसत 20 से 25 मरीज चिकित्सक से परामर्श ले रहे हैं। 24 घंटे सेवा शुरू होने से ई-संजीवनी ओपीडी में मरीजों की संख्या भी बढ़ेगी। लोग घर बैठे उपचार पा सकेंगे।
मोबाइल पर इंस्टॉल करना होगा एप
ई-संजीवनी टेली कंसल्टेंसी का लाभ आम लोग उठा सकते हैं। एक कंसल्टेंसी डॉक्टर की दूसरे डॉक्टर के साथ। इसके लिए संजीवनी एप को अपने मोबाइल पर इंस्टाल करना होगा। इसके बाद आपको रजिस्ट्रेशन करना होगा। एप में तीन ऑप्शन दिखते हैं। पहला मरीज का रजिस्ट्रेशन व टोकन दूसरा मरीज का लॉग इन और तीसरा प्रिस्क्रप्शिन। इस तरह आप डॉक्टर से जुड़कर टेली परामर्श ले सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने पीएचसी, सीएचसी व सब सेंटर पर चिकित्सकों की सेवाएं बेहतर करने के लिए ई-संजीवनी टंसल्टेंसी की सेवाएं भी 24 घंटे के लिए शुरू कर दी हैं, जबकि पहले यह सुविधा सुबह नौ से दोपहर बाद चार बजे तक ही थी।
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इसलिए शुरू की गई यह योजना
स्वास्थ्य विभाग ने ई-संजीवनी योजना को इसलिए शुरू किया है, ताकि कोरोना संक्रमण के समय में बार-बार अस्पताल में आने से बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, बीमार व्यक्ति आदि संक्रमण की चपेट में आने से बच सकें और वे ऑनलाइन ही चिकित्सक से बीमारी के संबंध में परामर्श लेकर अपना उपचार कर सके।
बुजुर्गों के लिए संजीवनी साबित हुई ओपीडी
कोरोना संक्रमण में ई-संजीवनी ओपीडी संजीवनी साबित हुई है, क्योंकि जिले में कोरोना संक्रमण लगातार बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित होता जा रहा है। बुजुर्गों को खासी, जुकाम, सांस लेने आदि में हलकी से दिक्कत होती है, उन्हें बार-बार उपचार के लिए चिकित्सक के पास आना पड़ता है। इससे बुजुर्गों के कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की आशंका अधिक बनी रहती है। (संवाद)
अस्पतालों में मरीजों की संख्या कम करना उद्देश्य
इस ओपीडी को शुरू करने का उद्देश्य अस्पतालों में मरीजों की संख्या को कम करना है। साथ ही मरीजों को आपात स्थिति में परेशानी न हो इसके लिए भी राहत भरी योजना है। अस्पताल में मरीज तभी आएं जब जरूरी हो। अन्यथा ई-संजीवनी की ओपीडी के माध्यम से अपना उपचार कराएं। स्वास्थ्य विभाग ने अब ई-संजीवनी ओपीडी और ई-संजीवनी टेली कंसल्टेंसी की सेवाएं 24 घंटे कर दी हैं।
- डॉ. रघुबीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।
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इस ओपीडी के माध्यम से फोन पर सलाह ली जा सकती है। ई-संजीवनी के लिए सुबह, शाम व रात्रि 3 शिफ्ट के रूप में कुशल चिकित्सकों की टीम निर्धारित की गई है।
ई-संजीवनी ओपीडी एप पर चिकित्सा विशेषज्ञों से परामर्श लिया जा रहा है। ई-संजीवनी सेवा में महिला रोग, शिशु रोग, डेंगू आशंकित, खांसी, जुकाम और बुखार के पीड़ित परामर्श ले सकते हैं। पीड़ित को करीब आधे घंटे पहले रजिस्ट्रेशन करना होता है। दवाइयां भी ऑनलाइन बताई जा रही हैं। नागरिक अस्पताल में स्थापित ई-संजीवनी ओपीडी में रोजाना औसत 20 से 25 मरीज चिकित्सक से परामर्श ले रहे हैं। 24 घंटे सेवा शुरू होने से ई-संजीवनी ओपीडी में मरीजों की संख्या भी बढ़ेगी। लोग घर बैठे उपचार पा सकेंगे।
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मोबाइल पर इंस्टॉल करना होगा एप
ई-संजीवनी टेली कंसल्टेंसी का लाभ आम लोग उठा सकते हैं। एक कंसल्टेंसी डॉक्टर की दूसरे डॉक्टर के साथ। इसके लिए संजीवनी एप को अपने मोबाइल पर इंस्टाल करना होगा। इसके बाद आपको रजिस्ट्रेशन करना होगा। एप में तीन ऑप्शन दिखते हैं। पहला मरीज का रजिस्ट्रेशन व टोकन दूसरा मरीज का लॉग इन और तीसरा प्रिस्क्रप्शिन। इस तरह आप डॉक्टर से जुड़कर टेली परामर्श ले सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने पीएचसी, सीएचसी व सब सेंटर पर चिकित्सकों की सेवाएं बेहतर करने के लिए ई-संजीवनी टंसल्टेंसी की सेवाएं भी 24 घंटे के लिए शुरू कर दी हैं, जबकि पहले यह सुविधा सुबह नौ से दोपहर बाद चार बजे तक ही थी।
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इसलिए शुरू की गई यह योजना
स्वास्थ्य विभाग ने ई-संजीवनी योजना को इसलिए शुरू किया है, ताकि कोरोना संक्रमण के समय में बार-बार अस्पताल में आने से बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, बीमार व्यक्ति आदि संक्रमण की चपेट में आने से बच सकें और वे ऑनलाइन ही चिकित्सक से बीमारी के संबंध में परामर्श लेकर अपना उपचार कर सके।
बुजुर्गों के लिए संजीवनी साबित हुई ओपीडी
कोरोना संक्रमण में ई-संजीवनी ओपीडी संजीवनी साबित हुई है, क्योंकि जिले में कोरोना संक्रमण लगातार बुजुर्गों के लिए जानलेवा साबित होता जा रहा है। बुजुर्गों को खासी, जुकाम, सांस लेने आदि में हलकी से दिक्कत होती है, उन्हें बार-बार उपचार के लिए चिकित्सक के पास आना पड़ता है। इससे बुजुर्गों के कोरोना संक्रमण की चपेट में आने की आशंका अधिक बनी रहती है। (संवाद)
अस्पतालों में मरीजों की संख्या कम करना उद्देश्य
इस ओपीडी को शुरू करने का उद्देश्य अस्पतालों में मरीजों की संख्या को कम करना है। साथ ही मरीजों को आपात स्थिति में परेशानी न हो इसके लिए भी राहत भरी योजना है। अस्पताल में मरीज तभी आएं जब जरूरी हो। अन्यथा ई-संजीवनी की ओपीडी के माध्यम से अपना उपचार कराएं। स्वास्थ्य विभाग ने अब ई-संजीवनी ओपीडी और ई-संजीवनी टेली कंसल्टेंसी की सेवाएं 24 घंटे कर दी हैं।
- डॉ. रघुबीर शांडिल्य, सिविल सर्जन, भिवानी।