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Bhiwani: अब दुकानों के आवंटन में तत्कालीन जिला बाल कल्याण अधिकारी पर धोखाधड़ी का केस दर्ज

Sat, 21 Oct 2023 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा) Updated Sat, 21 Oct 2023 11:16 PM IST
सार

इससे पहले इसी परिसर में स्थित शगुन वाटिका के गलत आवंटन में भी सोमदत्त के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया जा चुका है।

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Now a case of fraud has been registered against the then District Child Welfare Officer
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हरियाणा के भिवानी जिला बाल कल्याण परिषद कार्यालय परिसर स्थित निर्माणाधीन 11 दुकानों के गलत आवंटन के मामले में तत्कालीन जिला बाल कल्याण अधिकारी सोमदत्त खुंडिया पर सिविल लाइन पुलिस थाना में धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज की गई है। इससे पहले इसी परिसर में स्थित शगुन वाटिका के गलत आवंटन में भी सोमदत्त के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया जा चुका है।

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जिला बाल कल्याण कार्यालय परिसर स्थित 11 निर्माणाधीन दुकानों का आवंटन किया गया था। गलत आवंटन की शिकायत उपायुक्त कार्यालय को मिली थी। उपायुक्त के निर्देश पर एसडीएम ने 27 मार्च 2018 को मामले की जांच की थी। दुकानों के आवंटन मामले में एसडीएम की जांच रिपोर्ट में अनियमितताएं पाई गईं थीं।

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उस समय सोमदत्त खुंडिया भिवानी में जिला बाल कल्याण अधिकारी के तौर पर कार्यरत थे। इसी दौरान दुकानों के आवंटन में भारी अनियमितताएं उजागर हुईं थीं। इसके बाद दुकानों के आवंटन को उपायुक्त ने रद्द कराए जाने के आदेश दिए थे। अब सिविल लाइन पुलिस थाने में सोमदत्त खुंडिया के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है।

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आवंटन में हुई थी बंदरबांट, मामले की दी थी शिकायत
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बाल कल्याण परिषद परिसर में करीब 11 निर्माणाधीन दुकानों के आवंटन मामले की शिकायत उपायुक्त को 2018 में दी थी। शिकायत में आरोप था कि 20 साल के लिए दुकानों के आवंटन में बंदरबांट की गई है और मात्र पांच लाख की राशि पर दुकानें लंबी लीज पर आवंटित की गई हैं। इनके आवंटन की प्रक्रिया में भी भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। इसके बाद उपायुक्त ने मामले की जांच एसडीएम से कराई थी। जांच में भी अनियमितताएं उजागर हो गई थीं। बृजपाल का आरोप था कि आवंटन कमेटी में उपायुक्त सहित कई विभागों के अधिकारी भी शामिल थे, जिसकी जानकारी आरटीआई के जरिए हासिल की गई थी। आवंटन में बाकायदा सभी अधिकारियों ने अपने हस्ताक्षर भी किए हैं।

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