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Kangra News: प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के डीडीएस खातों में लाखों का अंतर, जांच शुरू
Fri, 25 Sep 2026 04:09 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, कांगड़ा
Updated Fri, 25 Sep 2026 04:09 AM IST
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बरियाल (कांगड़ा)। कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक लिमिटेड की नगरोटा सूरियां शाखा में डेली डिपॉजिट (डीडीएस) खातों को लेकर कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है।
कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि उन्होंने लंबे समय तक रोजाना डीडीएस के तहत रकम जमा करवाई और उनके पास मौजूद डीडीएस कॉपियों में इसकी बाकायदा एंट्री दर्ज है लेकिन बैंक खातों में अपेक्षित राशि दिखाई नहीं दे रही है।
उपभोक्ताओं के अनुसार कुछ खातों में 500 रुपये, किसी में 15 हजार और किसी में करीब 17 हजार रुपये ही दर्ज हैं, जबकि उनकी डीडीएस कॉपियों में एक लाख रुपये से अधिक की जमा राशि का उल्लेख है।
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एक उपभोक्ता ने कॉपी में करीब 1.61 लाख रुपये जमा होने की एंट्री होने, जबकि बैंक खाते में लगभग 17 हजार रुपये ही दिखाई देने का दावा किया। एक अन्य मामले में दो खातों में करीब पांच लाख रुपये जमा होने की बात कही गई है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि डीडीएस के तहत कमीशन के आधार पर एक व्यक्ति रोजाना राशि एकत्र करता था और कॉपियों में एंट्री करता था। आरोप है कि ग्राहकों से रकम लेने के बावजूद वही राशि बैंक खातों में जमा नहीं हुई।
हालांकि, डीडीएस कलेक्शन करने वाले व्यक्ति ने आरोपों से इन्कार किया है। उनका कहना है कि वह रोजाना बैंक में रकम जमा करवाता था और इसके बाद खाते में एंट्री व अन्य प्रक्रिया बैंक अधिकारियों की जिम्मेदारी थी।
ग्राहकों ने डीडीएस कॉपियों पर शाखा प्रबंधन की मुहर या हस्ताक्षर नहीं होने और कॉपियों में दर्ज खाता नंबर और बैंक रिकॉर्ड के नंबरों में कथित अंतर होने पर भी सवाल उठाए हैं। करीब 15-16 महीने के रिकॉर्ड और कई खाताधारकों के मोबाइल नंबर बैंक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने की बात भी सामने आई है।
उपभोक्ताओं ने मुख्यमंत्री और प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। कुछ ग्राहक मामले की सीबीआई जांच की मांग भी कर रहे हैं। फिलहाल बैंक की जांच पूरी होने तक कथित अनियमितता की कुल राशि और जिम्मेदार लोगों के संबंध में अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।
शिकायत मिली है और संबंधित रिकॉर्ड अधिकारियों ने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रतीत हो रहा है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और नियमानुसार राशि की वसूली होगी। अनिल कुमार, जीएम, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक
उन्हें व्यक्तिगत रूप से शिकायत नहीं मिली है लेकिन मामले की जानकारी है। जांच में दोषी पाए जाने वाले के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जगमेल ठाकुर, निदेशक, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक
उनके पास अतिरिक्त कार्यभार है और उच्च अधिकारी शाखा का रिकॉर्ड अपने साथ ले गए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। पवन कुमार, शाखा प्रबंधक
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कई उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया है कि उन्होंने लंबे समय तक रोजाना डीडीएस के तहत रकम जमा करवाई और उनके पास मौजूद डीडीएस कॉपियों में इसकी बाकायदा एंट्री दर्ज है लेकिन बैंक खातों में अपेक्षित राशि दिखाई नहीं दे रही है।
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उपभोक्ताओं के अनुसार कुछ खातों में 500 रुपये, किसी में 15 हजार और किसी में करीब 17 हजार रुपये ही दर्ज हैं, जबकि उनकी डीडीएस कॉपियों में एक लाख रुपये से अधिक की जमा राशि का उल्लेख है।
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एक उपभोक्ता ने कॉपी में करीब 1.61 लाख रुपये जमा होने की एंट्री होने, जबकि बैंक खाते में लगभग 17 हजार रुपये ही दिखाई देने का दावा किया। एक अन्य मामले में दो खातों में करीब पांच लाख रुपये जमा होने की बात कही गई है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि डीडीएस के तहत कमीशन के आधार पर एक व्यक्ति रोजाना राशि एकत्र करता था और कॉपियों में एंट्री करता था। आरोप है कि ग्राहकों से रकम लेने के बावजूद वही राशि बैंक खातों में जमा नहीं हुई।
हालांकि, डीडीएस कलेक्शन करने वाले व्यक्ति ने आरोपों से इन्कार किया है। उनका कहना है कि वह रोजाना बैंक में रकम जमा करवाता था और इसके बाद खाते में एंट्री व अन्य प्रक्रिया बैंक अधिकारियों की जिम्मेदारी थी।
ग्राहकों ने डीडीएस कॉपियों पर शाखा प्रबंधन की मुहर या हस्ताक्षर नहीं होने और कॉपियों में दर्ज खाता नंबर और बैंक रिकॉर्ड के नंबरों में कथित अंतर होने पर भी सवाल उठाए हैं। करीब 15-16 महीने के रिकॉर्ड और कई खाताधारकों के मोबाइल नंबर बैंक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होने की बात भी सामने आई है।
उपभोक्ताओं ने मुख्यमंत्री और प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। कुछ ग्राहक मामले की सीबीआई जांच की मांग भी कर रहे हैं। फिलहाल बैंक की जांच पूरी होने तक कथित अनियमितता की कुल राशि और जिम्मेदार लोगों के संबंध में अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है।
शिकायत मिली है और संबंधित रिकॉर्ड अधिकारियों ने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रथम दृष्टया मामला गंभीर प्रतीत हो रहा है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और नियमानुसार राशि की वसूली होगी। अनिल कुमार, जीएम, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक
उन्हें व्यक्तिगत रूप से शिकायत नहीं मिली है लेकिन मामले की जानकारी है। जांच में दोषी पाए जाने वाले के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जगमेल ठाकुर, निदेशक, कांगड़ा सहकारी प्राथमिक कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक
उनके पास अतिरिक्त कार्यभार है और उच्च अधिकारी शाखा का रिकॉर्ड अपने साथ ले गए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। पवन कुमार, शाखा प्रबंधक