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नोटबंदी की मार, बैंकों के बाहर हाहाकार
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Nov 2016 12:23 AM IST
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मचा हाहाकार
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नोटबंदी की मार से पैदा हुआ आर्थिक संकट को दूर करने के लिए बैंकों के बाहर हाहाकार मचा हुआ है। सुबह आठ बजे से लोग बैंकों के बाहर पहुंचना शुरू हो जाते हैं और यहीं आलम शाम पांच बजे तक नजर आता है। हालांकि कई बैंक शाखाएं कैश खत्म होने का हवाला देकर शाम चार बजे ही बंद कर दी जाती है। बृहस्पतिवार को जहां बैंकों के बाहर लंबी कतारें लगी नजर आई तो वहीं पिछले छह दिनों से ठप पड़ा कारोबार भी कुछ हद तक पटरी पर आता नजर आया। बाजारों में सुबह की अपेक्षा शाम को खूब चहल-पहल दिखाई दी।
पांच सौ व एक हजार के नोट बंद होने के बाद से ही जहां बाजार सूने पड़े हैं तो बैंकों के बाहर अच्छी खासी भीड़ देखने को मिल रही है। पुलिस की मुस्तैदी कुछ हद तक व्यवस्था कायम रखने में कारगर साबित हो रही है। प्रतिबंधित नोट की कीमत जितना ही तेल भरवाने की शर्त रखकर पेट्रोल पंप कारिंदे तो पांच सौ व एक हजार रुपये का नोट स्वीकार कर रहे हैं जबकि निजी अस्पताल संचालक ये नोट लेने से साफ इनकार कर रहे हैं। हालात यह है कि मां-बाप को घंटों लाइन में लगकर नोट एक्सचेंज करवाने पड़ते है बाद में ही सौ-सौ के नोट थमाने पर उनके बच्चें को उपचार मिल पाता है। प्रतिबंधित नोट थमाने पर निजी अस्पताल संचालक उपचार से ही मना कर देते हैं। कमोबख्श यहीं स्थिति मेडिकल स्टोर पर भी देखने को मिल रही है।
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पांच सौ व एक हजार के नोट बंद होने के बाद से ही जहां बाजार सूने पड़े हैं तो बैंकों के बाहर अच्छी खासी भीड़ देखने को मिल रही है। पुलिस की मुस्तैदी कुछ हद तक व्यवस्था कायम रखने में कारगर साबित हो रही है। प्रतिबंधित नोट की कीमत जितना ही तेल भरवाने की शर्त रखकर पेट्रोल पंप कारिंदे तो पांच सौ व एक हजार रुपये का नोट स्वीकार कर रहे हैं जबकि निजी अस्पताल संचालक ये नोट लेने से साफ इनकार कर रहे हैं। हालात यह है कि मां-बाप को घंटों लाइन में लगकर नोट एक्सचेंज करवाने पड़ते है बाद में ही सौ-सौ के नोट थमाने पर उनके बच्चें को उपचार मिल पाता है। प्रतिबंधित नोट थमाने पर निजी अस्पताल संचालक उपचार से ही मना कर देते हैं। कमोबख्श यहीं स्थिति मेडिकल स्टोर पर भी देखने को मिल रही है।
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