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बैठने की जगह न खेलने का सामान, कैसे पूरे हों अरमान
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सरकारी स्कूल में जगह के अभाव में कबाड़ में पड़े डेस्क। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। न बैठने की जगह, न ठंड से बचाव के संसाधन और न ही अन्य सुविधाएं। कहीं एक हॉल में पांच-पांच कक्षाएं लग रही है तो कहीं एक ही भवन में तीन-तीन स्कूलों के बच्चे पढ़ रहे है। यह हाल है शहर के सरकारी प्राइमरी स्कूलों का। बच्चों के भविष्य बनाने की जिम्मेदारी उठाने वाले सरकारी प्राइमरी स्कूलों में ही उनके भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है।
संवाददाता ने शनिवार को सरकारी प्राइमरी स्कूलों का निरीक्षण किया तो अव्यवस्थाएं खुलकर सामने आई। शहर के दादरी गेट स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला नंबर एक में छह शिक्षकों का स्टाफ और करीब 250 बच्चे पहली से पांचवीं तक पढ़ रहे हैं, मगर इन सभी की कक्षाएं कई सालों से मंदिर की छत पर ही लग रही हैं। यहां बैठने के लिए बैंच तक नहीं है और आज भी वर्षों पुरानी रीत के तहत टाट पर बैठ बच्चों की पढ़ाई हो रही है। यहां सर्दी-गर्मी से बचाव के लिए भी कोई इंतजाम नहीं है। इस तंग माहौल में भी बच्चों का ककहरा तो गूंजता हैं, मगर शिक्षा अधिकारियों के कानों तक शायद उनकी आवाज नहीं पहुंच पाती। बच्चों के खेलकूद के लिए भी यहां कोई मैदान तो दूर, सामान तक नहीं हैं। इस संकरी जगह में ही बच्चों के लिए मिड डे मील भी पकता है, जिसे बच्चे खुली छत पर बैठकर ही खाते हैं। स्कूल में पढ़ाने वाले ंशिक्षकों का कहना है कि काफी बार विद्यालय भवन के संबंध में शिक्षा अधिकारियों से भी मांग की जा चुकी हैं, मगर अधिकारी हर बार जगह का बहाना बनाकर टाल रहे हैं।
कहीं धर्मशाला तो कहीं एक ही भवन में चल रहे तीन सरकारी स्कूल
शहर में कई स्कूलों के पास तो खुद का भवन तक नहीं हैं, ये कई सालों से धर्मशाला या फिर किसी निजी जगहों में चल रहे हैं। एक ही भवन में तीन सरकारी स्कूलों की कक्षाएं भी लग रही हैं, सेक्टर 13 के सरकारी स्कूल में सेक्टर 13 का मिडिल व प्राइमरी स्कूल चल रहा हैं, इसी भवन में सेक्टर 23 का प्राइमरी स्कूल की कक्षाएं भी लग रही हैं। जीपीएस रामनगर भी खंड शिक्षा अधिकारी परिसर में ही चल रहा है। इसी तरह जीपीएस बीटीएम भी मिल के भवन में लग रहा है, यहां पर भी खुद का कोई भवन नहीं है। जीतूवाला क्षेत्र का प्राइमरी स्कूल एमसी ब्वॉयज स्कूल ग्वार फैक्टरी में चल रहा हैं। जीतूवाला क्षेत्र में स्कूल के लिए कोई भवन नहीं है। इसलिए इस स्कूल को एमसी स्कूल में शिफ्ट करना पड़ा है। चरखान ढाणी में भी स्कूल भवन कंडम है। जीपीएस नंबर तीन में भी तीन स्कूलों की कक्षाएं लग रही हैं, यहां भी जगह का काफी अभाव है।
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दर्जा मॉडल का सुविधाएं सामान्य स्कूल की भी नहीं
शहर के जीपीएस टाईयान पाना स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए भी जगह नहीं है, जबकि इस विद्यालय को मॉडल स्कूल का दर्जा मिला है। यहां पर सवा दो सौ से अधिक बच्चे और नौ शिक्षकों का स्टाफ है। स्कूल के डेस्क जगह के अभाव में कबाड़ में रखे हैं, जबकि बच्चे जमीन पर बैठकर ही ज्ञान हासिल कर रहे हैं। इसी तरह सिटी पुलिस थाना के समीप जीपीएस मॉडल स्कूल है, जो खंडहर भवन में चल रहा है।
कक्षा पहली से आठवीं तक प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिला है। मगर सरकारी स्कूलों में बच्चों का ये अधिकार मजाक बनकर रह गया है। हम संगठन के माध्यम से भी काफी बार बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाओं की मांग कर चुके हैं और शिक्षा अधिकारियों से लेकर निदेशालय तक मुद्दा उठा चुके हैं, मगर अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। कहीं धर्मशाला तो कहीं मंदिर की छत पर बच्चे पढ़ाई करने पर मजबूर हैं, जबकि सरकार शिक्षा पर करोड़ों का बजट खर्च कर रही है। -अशोक चाहर, पूर्व प्रधान, हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन भिवानी।
शहर में कई विद्यालयों के पास खुद की जगह नहीं हैं, इसलिए उन्हें नजदीकी सरकारी विद्यालयों के भवन में शिफ्ट किया गया है। स्कूल भवन के लिए निदेशालय के साथ लगातार पत्राचार हो रहा है। बच्चों को शिक्षा के साथ साथ सभी सुविधाएं मिलें, इसके लिए संबंधित स्कूल मुखियाओं को भी आवश्यक निर्देश जारी किए हुए हैं। - रामअवतार शर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी भिवानी।
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संवाददाता ने शनिवार को सरकारी प्राइमरी स्कूलों का निरीक्षण किया तो अव्यवस्थाएं खुलकर सामने आई। शहर के दादरी गेट स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला नंबर एक में छह शिक्षकों का स्टाफ और करीब 250 बच्चे पहली से पांचवीं तक पढ़ रहे हैं, मगर इन सभी की कक्षाएं कई सालों से मंदिर की छत पर ही लग रही हैं। यहां बैठने के लिए बैंच तक नहीं है और आज भी वर्षों पुरानी रीत के तहत टाट पर बैठ बच्चों की पढ़ाई हो रही है। यहां सर्दी-गर्मी से बचाव के लिए भी कोई इंतजाम नहीं है। इस तंग माहौल में भी बच्चों का ककहरा तो गूंजता हैं, मगर शिक्षा अधिकारियों के कानों तक शायद उनकी आवाज नहीं पहुंच पाती। बच्चों के खेलकूद के लिए भी यहां कोई मैदान तो दूर, सामान तक नहीं हैं। इस संकरी जगह में ही बच्चों के लिए मिड डे मील भी पकता है, जिसे बच्चे खुली छत पर बैठकर ही खाते हैं। स्कूल में पढ़ाने वाले ंशिक्षकों का कहना है कि काफी बार विद्यालय भवन के संबंध में शिक्षा अधिकारियों से भी मांग की जा चुकी हैं, मगर अधिकारी हर बार जगह का बहाना बनाकर टाल रहे हैं।
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कहीं धर्मशाला तो कहीं एक ही भवन में चल रहे तीन सरकारी स्कूल
शहर में कई स्कूलों के पास तो खुद का भवन तक नहीं हैं, ये कई सालों से धर्मशाला या फिर किसी निजी जगहों में चल रहे हैं। एक ही भवन में तीन सरकारी स्कूलों की कक्षाएं भी लग रही हैं, सेक्टर 13 के सरकारी स्कूल में सेक्टर 13 का मिडिल व प्राइमरी स्कूल चल रहा हैं, इसी भवन में सेक्टर 23 का प्राइमरी स्कूल की कक्षाएं भी लग रही हैं। जीपीएस रामनगर भी खंड शिक्षा अधिकारी परिसर में ही चल रहा है। इसी तरह जीपीएस बीटीएम भी मिल के भवन में लग रहा है, यहां पर भी खुद का कोई भवन नहीं है। जीतूवाला क्षेत्र का प्राइमरी स्कूल एमसी ब्वॉयज स्कूल ग्वार फैक्टरी में चल रहा हैं। जीतूवाला क्षेत्र में स्कूल के लिए कोई भवन नहीं है। इसलिए इस स्कूल को एमसी स्कूल में शिफ्ट करना पड़ा है। चरखान ढाणी में भी स्कूल भवन कंडम है। जीपीएस नंबर तीन में भी तीन स्कूलों की कक्षाएं लग रही हैं, यहां भी जगह का काफी अभाव है।
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दर्जा मॉडल का सुविधाएं सामान्य स्कूल की भी नहीं
शहर के जीपीएस टाईयान पाना स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए भी जगह नहीं है, जबकि इस विद्यालय को मॉडल स्कूल का दर्जा मिला है। यहां पर सवा दो सौ से अधिक बच्चे और नौ शिक्षकों का स्टाफ है। स्कूल के डेस्क जगह के अभाव में कबाड़ में रखे हैं, जबकि बच्चे जमीन पर बैठकर ही ज्ञान हासिल कर रहे हैं। इसी तरह सिटी पुलिस थाना के समीप जीपीएस मॉडल स्कूल है, जो खंडहर भवन में चल रहा है।
कक्षा पहली से आठवीं तक प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार मिला है। मगर सरकारी स्कूलों में बच्चों का ये अधिकार मजाक बनकर रह गया है। हम संगठन के माध्यम से भी काफी बार बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाओं की मांग कर चुके हैं और शिक्षा अधिकारियों से लेकर निदेशालय तक मुद्दा उठा चुके हैं, मगर अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है। कहीं धर्मशाला तो कहीं मंदिर की छत पर बच्चे पढ़ाई करने पर मजबूर हैं, जबकि सरकार शिक्षा पर करोड़ों का बजट खर्च कर रही है। -अशोक चाहर, पूर्व प्रधान, हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन भिवानी।
शहर में कई विद्यालयों के पास खुद की जगह नहीं हैं, इसलिए उन्हें नजदीकी सरकारी विद्यालयों के भवन में शिफ्ट किया गया है। स्कूल भवन के लिए निदेशालय के साथ लगातार पत्राचार हो रहा है। बच्चों को शिक्षा के साथ साथ सभी सुविधाएं मिलें, इसके लिए संबंधित स्कूल मुखियाओं को भी आवश्यक निर्देश जारी किए हुए हैं। - रामअवतार शर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी भिवानी।

ठिठुरती ठंड में बिना डेस्क जमीन पर बैठ पढ़ाई करते सरकारी स्कूल के बच्चे। संवाद- फोटो : Bhiwani