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Bhiwani News: चकबंदी नहीं, उन गांवों में फिर शुरू हो गया बाजरा भावांतर में फर्जी रजिस्ट्रेशन का खेल

Tue, 20 Jun 2023 11:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Tue, 20 Jun 2023 11:22 PM IST
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No consolidation, the game of fake registration started in those villages again in Bajra Bhavantar
जूई (भिवानी)। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर सरकार ने बाजरे की फसल का रजिस्ट्रेशन शुरू किया हुआ है। चकबंदी नहीं हुई उन गांवों में कालाबाजारी करने वाले सक्रिय हो चुके हैं। साझे खाते में लोग पूरी जमीन का रजिस्ट्रेशन पहले ही करवा लेते हैं। हकीकत में जमीन मालिक और बाजरे की खेती करने वाले लोग जब रजिस्ट्रेशन करवाने जाते हैं तो कंप्यूटर आपरेटर जमीन पर रजिस्ट्रेशन हो चुका होने की जानकारी देता है। कृषि अधिकारी और पटवारी रजिस्ट्रेशन के लिए आपसी सहमति बनाने और न मानने पर पुलिस में कानूनी कार्रवाई करने की बात कह रहे हैं।
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जूई खुर्द और जूई बिचली के किसान रविंद्र, बलजीत, ईश्वर, विनोद, मीरसिंह, अजय, प्रवीण, महेंद्र, राकेश, सोमबीर, संदीप ने बताया कि गांव की चकबंदी नहीं होने से जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं है। रिकॉर्ड में गांव की जमीन बीघा में है जबकि कंप्यूटर पर ऑनलाइन करते समय कनाल में दर्ज होती है। कालाबाजारी करने वाले लोग रजिस्ट्रेशन खुलते ही मौके की ताक में रहते हैं और साझे खाते की खेवट में दर्ज अधिकतर जमीन को रजिस्टर कर देते हैं। हकीकत में जमीन का मालिक जिसने बाजरा की खेती की हुई है वो जब ऑनलाइन करवाने जाता है तो उनको ऑनलाइन जमीन पूरी हो चुकी का जवाब मिलता है।
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किसानों ने बताया कि जूई खुर्द और जूई बिचली गांव में कालाबाजारी करने वाले लोग पांच साल से सक्रिय हैं जो जमीन कम होने पर भी साझे खाते की जमीन पर रजिस्टर कर अनाजमंडी में खरीद के समय टोकन बेचने और दूसरे प्रदेश से फसल लाकर बेचने व सरकार भावांतर भरपाई योजना से लाखों रुपये डकार चुके हैं। इस तरह के गिरोह व धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सरकार ने एसआईटी गठित की हुई है लेकिन अब भी ये घालमेल नहीं थम रहा है। अगर सरकारी खरीद होती है तो आढ़ती उस समय इन कालाबाजारियों को प्रति क्विंटल 200 रुपये से 400 रुपये तक देते हैं। घर बैठे दूसरे की जमीन पर फर्जी तरीके से बनवाए टोकनों का काला धंधा चल रहा है। इसकी वजह से ओलावृष्टि और सूखे से बर्बाद हुई फसल का मुआवजा तक नहीं मिलता है। ये लोग साजिश के तहत गांव की सारी जमीन यहां तक कि बस स्टैंड पर 30 साल पहले बनी दुकानों वाली जमीन पर भी फसल दर्शाकर बेच देते हैं।
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गांव की टोटल जमीन और उसमें होने वाली पैदावार से कई गुना ज्यादा फसल बेचने का काला धंधा चल रहा है। जिस व्यक्ति के पास कुल जमीन एक से पांच एकड़ हैं उसने अपने, अपने परिवार व अपने रिश्तेदारों के नाम तक मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज करने काम किया है। ऐसे एक नहीं सैकड़ों की संख्या में किसान है। किसानों ने प्रशासन से जिस व्यक्ति के नाम जितनी जमीन है उस हिसाब से बाजरे की खरीद का रजिस्ट्रेशन करने की मांग की है।

गांव की चकबंदी नहीं हुई है। लोगों के साझे खाते हैं और इसका फायदा उठाने वालों से भाईचारे में ज्यादा दर्ज हुए फसल ब्योरे को रद्द करने को लेकर बात करें। अगर वे नहीं मानते हैं तो फिर उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दें, पुलिस कानूनी कार्रवाई कराएगी।
- कर्ण सिंह, कृषि अधिकारी, भिवानी।
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