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Bhiwani News: करनाल के निशांत देव पेरिस ओलंपिक कोटा के दो राउंड पार कर तीसरे के लिए तैयार
Sat, 09 Mar 2024 11:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Sat, 09 Mar 2024 11:44 PM IST
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भिवानी। पेरिस ओलंपिक कोटा प्राप्त करने के इटली में आयोजित किए गए मुकाबलों में प्रदेश एक मुक्केबाज को छोड़कर अन्य सभी मुक्केबाजों का ओलंपिक कोटा पाने का सपना टूट गया है। ओलंपिक कोटा प्राप्त करने के लिए इटली गई भारतीय मुक्केबाजों की टीम में छह मुक्केबाज हरियाणा से गए हुए हैं। इनमें से करनाल के मुक्केबाज निशांत देव के अलावा अन्य पांचों मुक्केबाजों को हार का सामना करना पड़ा है। निशांत देव का प्री क्वार्टर मुकाबला दस मार्च को होगा।
दरअसल, पेरिस ओलंपिक कोटा प्राप्त करने के लिए दो से 11 मार्च तक इटली के बस्टो अर्सिजियो शहर में विश्व ओलंपिक क्वालीफाइंग मुकाबलों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें भारतीय मुक्केबाजों की टीम में हरियाणा के एक महिला मुक्केबाज समेत पांच मुक्केबाजों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई थी। सभी हरियाणवी मुक्केबाजों में केवल करनाल के मुक्केबाज निशांत देव ही प्री क्वार्टर राउंड तक पहुंच पाए है। अन्य सभी मुक्केबाजों को पहले ही राउंड में हार का सामना करना पड़ा। इससे पांचों मुक्केबाजों का ओलंपिक कोटा पाने का सपना टूट गया। अब इस मुक्केबाजों की मेहनत की कमी कहें या फिर चयन प्रक्रिया को दोषी ठहराए। लेकिन सच तो यह है कि फिलहाल हरियाणा के मुक्केबाजों की मुक्केबाजी का दौर बुरा चल रहा है।
ओलंपिक कोटा प्राप्त करने गई हरियाणवी टीम के बारे में खेल प्रशिक्षकों का मानना है चयन के लिए ट्रायल प्रक्रिया ज्यादा महत्व रखती है। प्रशिक्षकों का मानना है कि चयन के लिए जितना महत्व मूल्यांकन प्रक्रिया का है उतना ही महत्व ट्रायल का भी होता है। यदि दोनों ही प्रक्रियाओं को समान महत्व दिया गया होता तो हमारे मुक्केबाजों का ओलंपिक कोटा पाने का सपना इतनी बुरी तरह से नहीं टूटता। मुक्केबाजों के इतने बुरे प्रदर्शन के लिए अंदरखाते विदेशी कोचों को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। अब ओलंपिक कोटा प्राप्त करने के लिए करनाल के मुक्केबाज निशांत देव ही मुकाबले में बचे है। प्री क्वार्टर राउंड में पहुंचे निशांत देव का मुकाबला दस मार्च को होगा।
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दरअसल, पेरिस ओलंपिक कोटा प्राप्त करने के लिए दो से 11 मार्च तक इटली के बस्टो अर्सिजियो शहर में विश्व ओलंपिक क्वालीफाइंग मुकाबलों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें भारतीय मुक्केबाजों की टीम में हरियाणा के एक महिला मुक्केबाज समेत पांच मुक्केबाजों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई थी। सभी हरियाणवी मुक्केबाजों में केवल करनाल के मुक्केबाज निशांत देव ही प्री क्वार्टर राउंड तक पहुंच पाए है। अन्य सभी मुक्केबाजों को पहले ही राउंड में हार का सामना करना पड़ा। इससे पांचों मुक्केबाजों का ओलंपिक कोटा पाने का सपना टूट गया। अब इस मुक्केबाजों की मेहनत की कमी कहें या फिर चयन प्रक्रिया को दोषी ठहराए। लेकिन सच तो यह है कि फिलहाल हरियाणा के मुक्केबाजों की मुक्केबाजी का दौर बुरा चल रहा है।
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ओलंपिक कोटा प्राप्त करने गई हरियाणवी टीम के बारे में खेल प्रशिक्षकों का मानना है चयन के लिए ट्रायल प्रक्रिया ज्यादा महत्व रखती है। प्रशिक्षकों का मानना है कि चयन के लिए जितना महत्व मूल्यांकन प्रक्रिया का है उतना ही महत्व ट्रायल का भी होता है। यदि दोनों ही प्रक्रियाओं को समान महत्व दिया गया होता तो हमारे मुक्केबाजों का ओलंपिक कोटा पाने का सपना इतनी बुरी तरह से नहीं टूटता। मुक्केबाजों के इतने बुरे प्रदर्शन के लिए अंदरखाते विदेशी कोचों को भी जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। अब ओलंपिक कोटा प्राप्त करने के लिए करनाल के मुक्केबाज निशांत देव ही मुकाबले में बचे है। प्री क्वार्टर राउंड में पहुंचे निशांत देव का मुकाबला दस मार्च को होगा।
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