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Bhiwani News: जेईई एडवांस्ड में सफल निशांत और मोहित का विद्यालय में हुआ अभिनंदन
Wed, 04 Jun 2025 01:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 04 Jun 2025 01:36 AM IST
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आदर्श विद्या मंदिर स्कूल खिलाड़ी निशांत व मोहित को सम्मानित करते स्कूल स्टाफ सदस्य।
भिवानी। खेल जगत में मिनी क्यूबा कहलाने वाली भिवानी के विद्यार्थी अब शिक्षा के क्षेत्र में भी बुलंदी छू रहे हैं। एक ही स्कूल में पढ़ने वाले निशांत व मोहित ने जेईई एडवांस्ड में अच्छी रैंक पाकर जिले का नाम रोशन कर अन्य बच्चों के लिए प्रेरणा बने हैं। इनका विद्यालय में अभिनंदन किया गया।
निशांत ने ऑल इंडिया में 369वीं तथा मोहित ने 15488वीं रैंक हासिल की है। ये दोनों दोस्त हैं और भिवानी आदर्श विद्या मंदिर स्कूल में एक साथ पढ़ते थे। बिना कोचिंग के स्कूल में 11वीं व 12वीं कक्षा की पढ़ाई करते करते इन्होंने ये रैंक हासिल की है। दोनों की इस उपलब्धि पर इनका स्कूल में अभिनंदन किया गया। निशांत ने बताया कि वो अब कानपुर आईआईटी से मैथेमेटिक्स एंड कम्प्यूटिंग से इंजीनियरिंग करना चाहता है।
निशांत ने कहा कि उसने दो साल की मेहनत से ये मुकाम पाया है। इसके लिए वो प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें पढ़ता रहता था। वहीं मोहित का कहना है कि उसने माता-पिता की प्रेरणा से वो लगातार पढ़ा और मेहनत की। दो साल की कठिन मेहनत की और ये रैंक पाई। इसका कहना है कि वो अब आर्किटेक्चर करना चाहता है। निशांत व मोहित के शिक्षक शमशेर सिंह ने कहा कि बिना कोचिंग के ये उपलब्धि बहुत बड़ी है। 15 लाख के करीब बच्चों में से ये रैंक मेहनत व लगन से ही मिलती है। उन्होंने कहा कि अब ये बच्चे दूसरों के लिए प्रेरणा बनेंगे।
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निशांत ने ऑल इंडिया में 369वीं तथा मोहित ने 15488वीं रैंक हासिल की है। ये दोनों दोस्त हैं और भिवानी आदर्श विद्या मंदिर स्कूल में एक साथ पढ़ते थे। बिना कोचिंग के स्कूल में 11वीं व 12वीं कक्षा की पढ़ाई करते करते इन्होंने ये रैंक हासिल की है। दोनों की इस उपलब्धि पर इनका स्कूल में अभिनंदन किया गया। निशांत ने बताया कि वो अब कानपुर आईआईटी से मैथेमेटिक्स एंड कम्प्यूटिंग से इंजीनियरिंग करना चाहता है।
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निशांत ने कहा कि उसने दो साल की मेहनत से ये मुकाम पाया है। इसके लिए वो प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें पढ़ता रहता था। वहीं मोहित का कहना है कि उसने माता-पिता की प्रेरणा से वो लगातार पढ़ा और मेहनत की। दो साल की कठिन मेहनत की और ये रैंक पाई। इसका कहना है कि वो अब आर्किटेक्चर करना चाहता है। निशांत व मोहित के शिक्षक शमशेर सिंह ने कहा कि बिना कोचिंग के ये उपलब्धि बहुत बड़ी है। 15 लाख के करीब बच्चों में से ये रैंक मेहनत व लगन से ही मिलती है। उन्होंने कहा कि अब ये बच्चे दूसरों के लिए प्रेरणा बनेंगे।
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