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Bhiwani News: न चिकित्सक मिले, न पीजीआई में ओपीडी शुरू हुई
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भिवानी। भले ही स्वास्थ्य विभाग लोगों को मुफ्त सेवाएं मुहैया करा रहा है, लेकिन चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की कमी के कारण यह सेवाएं बहुत कम हो गईं हैं। ऐसे हालात में सरकारी अस्पतालों को खुद के इलाज की दरकार है। जिले के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। स्वास्थ्य विभाग के पास 35 फीसदी चिकित्सक तक नहीं हैं। जिला मुख्यालय के अस्पताल सहित ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर भी चिकित्सकों की कमी है। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) तो केवल स्वास्थ्य कर्मचारियों के भरोसे ही चल रहे हैं।
इससे परेशान लोगों का कहना है कि जिले के सरकारी अस्पताल सिर्फ रेफरल अस्पताल बन चुके हैं, क्योंकि यहां मरीज को उपचार कम रेफर ज्यादा किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज का भी लाभ नहीं मिल सका। इसमें ओपीडी चालू होने से पहले ही चुनावी घोषणा हो गई। ऐसे में जिले के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का केवल सब्जबाग ही दिखाया गया।
जिले में चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के 65 फीसदी पद खाली हैं। इन पदों को भरने के लिए पिछले पांच साल में स्वास्थ्य अधिकारी मुख्यालय से पत्राचार करते रहे, लेकिन नए चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हुई। मेडिकल कॉलेज तय समय में बनकर तैयार हो गया।
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इस मेडिकल कॉलेज में ओपीडी शुरू करने की तैयारी पूरी की गई। इसके लिए जिले में पहले से तैनात चिकित्सकों को ही प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया गया है। ऐसे में ये चिकित्सक यहां सेवाएं देंगे तो जिला नागरिक अस्पताल और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की सेहत जरूर खराब हो जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के पास चिकित्सकों की स्थिति
नागरिक अस्पताल में ईएनटी, हृदय रोग विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ, गेस्ट्रोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, मनोचिकित्सक के पद लंबे समय से खाली हैं। जिलेभर में छह सीएचसी हैं। सीएचसी में चिकित्सकों के 37 स्वीकृत पद हैं। इनमें से 24 पदों पर चिकित्सक तैनात हैं। 13 पद खाली हैं। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 22 पीएचसी हैं। इनके लिए स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सकों के 47 पद स्वीकृत किए हैं, उनमें से 34 पदों पर चिकित्सक तैनात हैं। बाकी 13 पद खाली हैं। नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों के 66 पद है, जिनमें से 27 पदों पर चिकित्सक तैनात हैं। स्वास्थ्य विभाग की अन्य इकाइयों के लिए 39 पद स्वीकृत हैं। इनके सापेक्ष मात्र 20 चिकित्सक तैनात हैं।
पांच सालों के दौरान न चिकित्सक मिले, न अस्पतालों की स्थिति सुधरी। स्वास्थ्य विभाग के पास मरीज की जांच करने के लिए डॉक्टर ही नहीं हैं। वहां भीड़ भी रहती है। ऐसी अव्यवस्था भरे माहौल में अधिकतर मरीज परेशान हो जाते हैं। इससे बचने के लिए मरीज महंगा इलाज कराने के लिए मजबूर हो रहे हैं।- रामकिशन, दांग खुर्द।
मेडिकल कॉलेज तैयार हो चुका है। यहां के लिए कोई बड़ा डॉक्टर नहीं दिया गया है। इस कारण मेडिकल कॉलेज बनने के बाद भी यहां आने वाले अधिकतर मरीजों को दूसरी जगह ही रेफर किया जाएगा जबकि पांच साल तक राजनेता सरकारी योजनाएं गिनाते रहे हैं, लेकिन किसी ने भी डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं कराई। - विजय, मंढाणा।
गांव के पीएचसी और सीएचसी में डॉक्टर ही नहीं हैं। वहां तैनात कुछ चिकित्सकों को स्वास्थ्य विभाग ने जिला मुख्यालय पर बुला लिया है। यहां आने वाले मरीजों को जिला नागरिक अस्पताल में भेजा जाता है। डॉक्टरों के अभाव में यहां न तो गर्भवतियों को उपचार मिल पा रहा, न आम लोगों की सेहत सुधर पा रही। - रविंद्र, बवानीखेड़ा।
स्वास्थ्य विभाग के पास चिकित्सकों की भारी कमी है। ऐसे में जिला नागरिक अस्पताल में भी चर्म रोग, ईएनटी, मनोचिकित्सक सहित कई अन्य पद खाली हैं। मरीजों और सड़क हादसों में घायलों को भी दूसरे जिलों में जाना पड़ता है। क्योंकि यहां विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण उनका यहां ठीक से उपचार भी नहीं हो पाता। - विजय, बवानीखेड़ा।
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इससे परेशान लोगों का कहना है कि जिले के सरकारी अस्पताल सिर्फ रेफरल अस्पताल बन चुके हैं, क्योंकि यहां मरीज को उपचार कम रेफर ज्यादा किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज का भी लाभ नहीं मिल सका। इसमें ओपीडी चालू होने से पहले ही चुनावी घोषणा हो गई। ऐसे में जिले के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का केवल सब्जबाग ही दिखाया गया।
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जिले में चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के 65 फीसदी पद खाली हैं। इन पदों को भरने के लिए पिछले पांच साल में स्वास्थ्य अधिकारी मुख्यालय से पत्राचार करते रहे, लेकिन नए चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं हुई। मेडिकल कॉलेज तय समय में बनकर तैयार हो गया।
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इस मेडिकल कॉलेज में ओपीडी शुरू करने की तैयारी पूरी की गई। इसके लिए जिले में पहले से तैनात चिकित्सकों को ही प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया गया है। ऐसे में ये चिकित्सक यहां सेवाएं देंगे तो जिला नागरिक अस्पताल और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की सेहत जरूर खराब हो जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के पास चिकित्सकों की स्थिति
नागरिक अस्पताल में ईएनटी, हृदय रोग विशेषज्ञ, त्वचा रोग विशेषज्ञ, गेस्ट्रोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, मनोचिकित्सक के पद लंबे समय से खाली हैं। जिलेभर में छह सीएचसी हैं। सीएचसी में चिकित्सकों के 37 स्वीकृत पद हैं। इनमें से 24 पदों पर चिकित्सक तैनात हैं। 13 पद खाली हैं। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 22 पीएचसी हैं। इनके लिए स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सकों के 47 पद स्वीकृत किए हैं, उनमें से 34 पदों पर चिकित्सक तैनात हैं। बाकी 13 पद खाली हैं। नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों के 66 पद है, जिनमें से 27 पदों पर चिकित्सक तैनात हैं। स्वास्थ्य विभाग की अन्य इकाइयों के लिए 39 पद स्वीकृत हैं। इनके सापेक्ष मात्र 20 चिकित्सक तैनात हैं।
पांच सालों के दौरान न चिकित्सक मिले, न अस्पतालों की स्थिति सुधरी। स्वास्थ्य विभाग के पास मरीज की जांच करने के लिए डॉक्टर ही नहीं हैं। वहां भीड़ भी रहती है। ऐसी अव्यवस्था भरे माहौल में अधिकतर मरीज परेशान हो जाते हैं। इससे बचने के लिए मरीज महंगा इलाज कराने के लिए मजबूर हो रहे हैं।- रामकिशन, दांग खुर्द।
मेडिकल कॉलेज तैयार हो चुका है। यहां के लिए कोई बड़ा डॉक्टर नहीं दिया गया है। इस कारण मेडिकल कॉलेज बनने के बाद भी यहां आने वाले अधिकतर मरीजों को दूसरी जगह ही रेफर किया जाएगा जबकि पांच साल तक राजनेता सरकारी योजनाएं गिनाते रहे हैं, लेकिन किसी ने भी डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं कराई। - विजय, मंढाणा।
गांव के पीएचसी और सीएचसी में डॉक्टर ही नहीं हैं। वहां तैनात कुछ चिकित्सकों को स्वास्थ्य विभाग ने जिला मुख्यालय पर बुला लिया है। यहां आने वाले मरीजों को जिला नागरिक अस्पताल में भेजा जाता है। डॉक्टरों के अभाव में यहां न तो गर्भवतियों को उपचार मिल पा रहा, न आम लोगों की सेहत सुधर पा रही। - रविंद्र, बवानीखेड़ा।
स्वास्थ्य विभाग के पास चिकित्सकों की भारी कमी है। ऐसे में जिला नागरिक अस्पताल में भी चर्म रोग, ईएनटी, मनोचिकित्सक सहित कई अन्य पद खाली हैं। मरीजों और सड़क हादसों में घायलों को भी दूसरे जिलों में जाना पड़ता है। क्योंकि यहां विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण उनका यहां ठीक से उपचार भी नहीं हो पाता। - विजय, बवानीखेड़ा।