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अब देशी गाय भी देंगी खूबदूध

Tue, 06 May 2014 12:55 AM IST
भिवानी
भिवानी Updated Tue, 06 May 2014 12:55 AM IST
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अब हरियाणा की देशी गाय भी विदेशी गायों (जर्सी, शंकर) की तरह खूब दूध देंगी। अंदाजन 15 से 20 लीटर प्रतिदिन। इसके लिए पशुपालन विभाग ने विशेष योेजना तैयार की है। अच्छी मात्रा में दूध देने वाली देशी गायों के बछड़ों का सिमन तैयार कराया गया है। यह सिमन प्रदेश के सभी जिलों में भिजवाया गया है। भिवानी में 17 सेंटर पशुपालकाें को सिमन मुहैया कराने के लिए बनाए गए हैं।
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प्रदेश में ज्यादातर देशी गाय बहुत कम ही दूध देती है और उनका दूध देने का समयकाल भी काफी कम ही होता है। जबकि विदेशी गाय खासकर जर्सी, शंकर आदि 15 से 25 लीटर तक दूध देती है और उनका समय काल भी काफी अधिक रहता है। इस कारण देशी गाय अनदेखी का शिकार रहती है।
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पशुपालक उन्हें खुले ही छोड़ देते हैं और ये सड़कों पर घूमती नजर आती है। लगातार अनदेखी का शिकार हो रही देशी गायों में लोगों की रुचि पैदा करने के लिए पशुपालन विभाग ने विशेष योजना बनाई है। योजना के तहत अच्छी नस्ल के देशी सांडों के सिमन से नस्ल सुधार की जाएगी। अगर सरकार की योजना कारगर रही तो सड़कों पर लावारिस घूम रही गायों की संख्या में भी काफी कमी आएगी।
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कामधेनू है देशी गाय
हरियाणा की देशी गाय को कामधेनू गाय कहा जाता है। यह नाम उसके दूध में पाए जाने वाले गुणों के कारण है। देशी गाय के दूध में कैरोटिन नामक प्रोटीन पाया जाता है। जिस कारण दूध में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। करीब 115 प्रतिशत। जबकि विदेशी नस्ल की गायों में सिर्फ 13 प्रतिशत ही रोग प्रतिरोधक क्षमता पाई जाती है। गाय के दूध में कोलेस्ट्रोल एक प्रतिशत से कम पाया जाता है जबकि भैंस के दूध में यह काफी मात्रा में पाया जाता है। कोलेस्ट्रोल से हृदय रोगों की संभावना ज्यादा रहती है।

यहां मिलेंगे सिमन
पशुपालन विभाग की ओर से जिले के ऐसे गांवों में ही सिमन देने के लिए सेंटर खोले गए है जहां गाय अधिक पाली जाती है। इनमें बापोड़ा, दिनोद, देवसर, खरक कला, कैरू, पिंजोखरा, संडवा, दुल्हेड़ी, कादमा, मंढाणा, बवानीखेड़ा, बेरला, बुशान, बहल, सिंघानी, रावलधी में सिमन के लिए सेंटर बनाए गए है।

बछड़ा भी बिकेगा 10 हजार का
अक्सर गाय के बछड़ों का कोई प्रयोग नहीं होने के कारण लावारिस छोड़ दिया जाता है। पहले बैल के रूप में प्रयोग होते थे, मगर अब ट्रैक्टर व अन्य मशीनें आने के कारण इनका प्रयोग लगभग खत्म सा हो गया है। अब पशुपालन विभाग गाय के बछड़ों को भी खरीदेगा और वह भी अच्छी कीमत यानी करीब 10 हजार रुपये में। बछड़ों की मांग कितनी होगी इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिमन देने के लिए बनाए गए 17 सेंटरों पर हर साल 10-12 बछडे़ पैदा करने का लक्ष्य है।


देशी गाय कामधेनू है। इसकी नस्ल सुधार की योजना बेहतर है और इससे लोगों को काफी फायदा होगा। उम्मीद है कि नस्ल सुधार की इस योजना के काफी अच्छे परिणाम होंगे।

दलीप सिंह, सेवानिवृत्त उप निदेशक पशुपालन विभाग


देशी गायों की नस्ल सुधार के लिए अच्छी नस्ल के देशी सांडों के सिमन भिवानी में लाए गए है। करीब 17 सेंटरों पर ये सिमन मिलेंगे। सब कुछ ठीक रहा तो देशी गाय भी विदेशी गायों की तरह 15 से 20 लीटर दूध देंगी।
आरके दुबे, कार्यकारी उप निदेशक पशुपालन विभाग
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