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Bhiwani News: शहर में बंदरों का उत्पात, टेंडर के फेर में फंसी मुक्ति की आस, घरों ही नहीं अब रोडवेज बसों में भी घुसे

Fri, 31 Jul 2026 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Fri, 31 Jul 2026 12:14 AM IST
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Monkeys rampage in the city, not just in homes but now they are entering roadways buses too
रोडवेज बस में सवार बंदर। 
भिवानी। शहर में लगातार बढ़ते बंदरों के उत्पात से राहत दिलाने की नगर परिषद की योजना खटाई में पड़ती नजर आ रही है। नगर परिषद की ओर से बंदर पकड़ने के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे लेकिन किसी भी फर्म ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। फर्म न मिलने के कारण बंदरों को पकड़ने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
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वर्तमान में शहर का कोई भी गली-मोहल्ला ऐसा नहीं है जहां बंदरों का आतंक न हो। स्थिति यह है कि आम जनता के साथ-साथ सरकारी कार्यालयों के कर्मचारी भी इससे खासे परेशान हैं।
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नगर परिषद द्वारा पूर्व में दिए गए ठेके की अवधि पूरी हो चुकी है जिसके तहत निर्धारित लक्ष्य के अनुसार करीब 800 से 1000 बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया था। हालांकि शहर में बंदरों की आबादी तेजी से बढ़ रही है और वर्तमान में इनकी संख्या साढ़े तीन से चार हजार के आसपास पहुंच चुकी है।
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बंदरों के झुंडों ने सरकारी कार्यालयों और सुनसान इलाकों को अपना बसेरा बना लिया है। छत पर महिलाओं या बच्चों के दिखाई देते ही ये हमलावर हो जाते हैं। जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना बंदरों के काटने से पीड़ित 5 से 7 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
बसों की सीटें तक फाड़ रहे बंदर
रोडवेज कर्मशाला भी बंदरों का बड़ा गढ़ बन चुकी है। यहां कार्यरत कर्मचारी बंदरों के खौफ में काम करने को मजबूर हैं। बंदर न केवल कर्मचारियों के खाने का टिफिन छीनकर ले जाते हैं बल्कि बस स्टैंड पर खड़ी बसों की सीटों को फाड़कर भारी नुकसान भी पहुंचा रहे हैं।

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नगर परिषद की ओर से शहर में बंदर पकड़ने के लिए टेंडर निकाले गए थे लेकिन कोई भी फर्म सामने नहीं आई। इस कारण प्रक्रिया रुकी हुई है। जल्द ही दोबारा टेंडर जारी किए जाएंगे। शहर में बेसहारा पशुओं को पकड़ने का अभियान पिछले साल दिसंबर से ही लगातार जारी है। - भवानी प्रताप सिंह, चेयरपर्सन प्रतिनिधि, नगर परिषद भिवानी।
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