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लालच में मासूमों की जान से खिलवाड़

Sun, 08 Sep 2019 12:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 08 Sep 2019 12:12 AM IST
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messing up the lives of innocent people
53 बचपन का जोखिम भरा सफर...।ऑटो में क्षमता से अधिक बच्चें बैठाकर ले जाता चालक। - फोटो : Bhiwani
तोशाम बाइपास पर स्कूल के बच्चो से भरा ऑटो तेज रफ्तार से फर्राटा भरता मिला। जांच की तो उसमें 30 से अधिक बच्चे मिले। ऑटो चालक ने आगे-पीछे, साइड में बच्चों को बैठाने के अलावा अपनी सीट पर भी बैठा रखा था। तोशाम बाइपास सड़क वैसे ही गड्ढों से भरी है। ऐसे में यहां हमेशा हादसेेे का अंदेशा बना रहता है। यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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ऐसा सिर्फ इसी एक ऑटो में नहीं होता बल्कि विभिन्न स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने में 1200 ऑटो में इसी तरह बच्चों को ठूंस-ठूंसकर भरकर ले जाया जाता है। करीब 30 हजार बच्चे इसी तरह हर रोज सफर करने को मजबूर है। डीसी ने भले ही एक ऑटो में पांच से ज्यादा बच्चों को नहीं बैठाने के आदेश दिए हो मगर धरातल पर अभी भी एक-एक ऑटो में 20 से 30 बच्चों को ठूंस-ठूसकर भरा जा रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा क्योंकि कुछ स्कूलों में बसे नहीं है और कुछ अभिभावक स्कूल बस के ज्यादा खर्च से बचने के लिए ही अपने बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे है। अकेले भिवानी शहर में ही 1200 ऑटो करीब 70 स्कूलों के 30 हजार बच्चों को इसी जोािमपूर्ण अंदाज से सफर करा रहे हैं।
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ऐसा नहीं है कि इसके लिए कोई नियम कानून नहीं है। महज तीन दिन पहले ही जिला उपायुक्त ने ऑटो में पांच से ज्यादा बच्चों को न बैठाने के सख्त निर्देश दिए थे। बावजूद इसके ऑटो चालक अफसरों आदेशों को ठेंगा दिखाकर 20 से 30 बच्चो को बैठाकर धड़ल्ले से सड़कों पर चल रहे हैं। इनमें बच्चे इस तरह ठूंसे जाते हैं कि मामूली सा झटका लगे तो वह सड़क पर गिर कर लहूलुहान हो जाएं। नियमों की बात करें तो एक ऑटो में चालक समेत केवल चार लोगों को ही बैठाया जा सकता है। की ऑटो में सवार हो सकते हैं। मगर इसकी क्षमता से कई गुणा बच्चे इसके अंदर भेड़ बकरियों की तरह लादे जा रहे हैं।
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इनके लिए ट्रैफिक नियम बेमानी
मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव के बाद भले ही आम वाहन चालकों में भारी भरकम जुर्माने को लेकर खौफ है पर ऑटो चालक इससे बेखौफ नजर आते हैं। मामूली सी लापरवाही पर जहां दोपहिया वाहन चालकों को इन दिनों अभियान चलाकर झट से चालान हाथ में थमा दिया जाता है। वहीं, आंखों के सामने से बच्चों से भरे ऑटो गुजरने पर ट्रैफिक पुलिस के जवान आंखें मूंदे रहते हैं।
स्कूली वाहन के लिए आवश्यक नियम
स्कूली वाहनों के अंदर जीपीएस सिस्टम, स्पीड गर्वनर के अलावा सीसीटीवी कैमरे होेना अनिवार्य हैं।
स्कूली वाहन की कंडीशन अच्छी हालत में होना चाहिए।
इन वाहनों के आगे- पीछे और साइडों में रिफ्लेक्टर टेप लगी होनी चाहिए।
वाहन की हेडलाइट व इंडीकेटर सही होने चाहिए।
स्कूली वाहन पर एक महिला अटेंडेंट, परिचालक और अनुभवी चालक होना चाहिए।
क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण से फिटनेस प्रमाण पत्र होना चाहिए।
वर्जन::: जिला उपायुक्त के निर्देशों के बाद सड़क पर स्कूली बच्चों को लाने व ले जाने वाले वाहनों पर सख्ती से काम किया जा रहा है। स्कूली वाहन के अलावा अगर कोई भी अन्य वाहन नियमों को ताक पर रखते हुए बच्चों की ट्रांसपोटेशन में इस्तेमाल होता है तो उसका चालान किया जाएगा। ऐसे वाहनों की जांच के लिए ट्रेफिक पुलिस के साथ ज्वाइंट अभियान भी चलाया जाएगा।

-सत्यनारायण चहल, असिस्टेंट सेक्टरी आरटीओ आफिस, भिवानी।
ट्रैफिक नियमों में बदलाव के बाद नियम और भी सख्त हो गए हैं। ऐसे में यातायात विभाग द्वारा खासकर स्कूली वाहनों की विशेष चेकिंग की जा रही है। जल्द ही ट्रैफिक पुलिस स्कूली वाहनों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाएगा। जिसमें आरटीओ आफिस की टीम भी शामिल होगी। संयुक्त अभियान में इस तरह के वाहनों की धरपकड़ की जाएगी, जो नियमों को ताक पर रखकर स्कूली बच्चों को क्षमता से अधिक बैठाकर उनकी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
-सुभाष, एसएचओ, ट्रैफिक पुलिस थाना भिवानी।
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