फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   Megh Singh left an impression of bravery by killing a leopard

Bhiwani News: चीते को मारकर दिलेरी की छाप छोड़ गए मेघ सिंह

Fri, 04 Aug 2023 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Fri, 04 Aug 2023 11:34 PM IST
विज्ञापन
Megh Singh left an impression of bravery by killing a leopard
मेघ सिंह तंवर।
भिवानी। कभी पालतू जानवर तो कभी ग्रामीण चीते का शिकार बनने लगे तो ग्रामीण भयभीत हो गए। ग्रामीणों को कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। अपनी आंखों के आगे अपने पालतू जानवरों की मौत देखकर ग्रामीण व्यथित हो उठे। चीते रात के समय पहाड़ी से आते और किसी ने किसी को अपना शिकार बनाते। ग्रामीणों को इनके आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए मेघ सिंह तंवर ने बिना हथियारों के ही एक चीते को मार दिया। इसके बाद तंवर की दिलेरी के चर्चे हर जुबां पर रहने लगे। मेघ सिंह तंवर (92) पुत्र मूला सिंह तंवर निवासी देवसर जिला भिवानी हरियाणा का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। उनके अंतिम संस्कार में चीते का शिकार करने की चर्चा लोग करते रहे।
विज्ञापन

उनका जन्म गांव में सन 1931 में हुआ था। चीते को मारकर ग्रामीणों को उसके आतंक से मुक्ति दिलाने पर मेघ सिंह को ग्राम पंचायत की ओर से चार बीघा जमीन दी गई थी। यह उनकी दिलेरी की हमेशा याद दिलाती रहेगी। मेघ सिंह के नवासे एडवोकेट विक्रम सिंह शेखावत ने बताया कि उनका पूरा जीवन सादगी भरा रहा। चीते को मारने की घटना ने उन्हें अमर कर दिया। मेघ सिंह के पुत्र राजेंद्र सिंह तंवर एवं विजेन्द्र सिंह तंवर बताते हैं कि गांव के बुजुर्ग आज भी किस्से-कहानियों के रूप में उनके सादगीपूर्ण जीवन और दिलेरी के किस्से सुनाते हैं। उनका पूरा जीवन लोगों की सेवा को समर्पित रहा। वीरवार रात्रि करीब साढ़े नौ बजे उन्होंने परिजनों से बात की और चलते-फिरते प्राण त्यागे। वह 92 साल की उम्र में भी अपने सारे काम खुद ही करते थे। मेघ सिंह तंवर अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़कर गए हैं। शुक्रवार को उनके अंतिम संस्कार में सरपंच संजय देवसरिया सहित अन्य ग्राम पंचायतों के बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं आमजन शामिल हुए।
विज्ञापन

गांव के बड़े बुजर्गों के मुंह से हमने काफी बार मेघ सिंह के चीता मारने की बहादुरी की बातें सुनी हैं। ये काफी जिंदादिल इंसान और आखिरी वक्त तक सक्रिय रहने वाले गांव के मौजिज बुजुर्गों में शामिल रहे हैं। उनका परिवार गांव में उनकी बहादुरी के इनाम के तौर पर दी गई भूमि पर खेतीबाड़ी भी कर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

-संजय देवसरिया सरपंच देवसर।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article