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विडंबना: गणित न अंग्रेजी, न ही विज्ञान की कोई तैयारी, कैसे होगी बेहतर परीक्षा हमारी
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राजकीय माध्यमिक विद्यालय लालावास। संवाद
- फोटो : Bhiwani
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भिवानी। गांव लालावास के राजकीय माध्यमिक विद्यालय में अध्यापक न होने की वजह से विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। स्कूल में विद्यार्थी पढ़ने के लिए तो आते है मगर अध्यापक न होने की वजह से वे घंटों बैठकर वापस घर चले जाते है। इस संबंध में स्कूल के मुखिया ने कई बार खंड शिक्षा अधिकारी से बातचीत की मगर कोई समाधान नहीं हुआ है। मार्च 2021 में आठवीं कक्षा की बोर्ड की परीक्षा होनी है मगर पाठ्यक्रम पूरा न होने के कारण विद्यार्थी और अभिभावक परेशान है। स्कूल में 39 विद्यार्थी तो महज दो शिक्षक है, जिनमें से एक तो गेस्ट टीचर है। ऐसे में विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी न होने बड़ी परेशानी बना हुआ है।
राजकीय माध्यमिक विद्यालय लालावास की छठी कक्षा में 10, सातवीं में 17 और आठवीं कक्षा में 12 विद्यार्थी है। इन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए हिंदी विषय का रेगुलर शिक्षक है और संस्कृति विषय का गेस्ट टीचर है। इनमें से भी एक अध्यापक तो कार्यालय कार्य में लगा रहता है। इसकी वजह से विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। वहीं स्कूल में अंग्रेजी, गणित, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, पीटीआई और ड्राईंग का कोई अध्यापक नहीं है। मार्च में आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों की परीक्षा होनी है। ऐसे में अध्यापक न होने की वजह से विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
500 से 800 रुपये में ले रहे ट्यूशन
सरकारी स्कूल में अध्यापक न होने के कारण विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए परेशानी बनी हुई है। मजबूरी में अभिभावक अपने बच्चों को गांव में ही ट्यूशन पर भेज रहे है। इसकी वजह से उन पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। गांव में वे अपने बच्चों के ट्यूशन के लिए प्रति माह 500 से 800 रुपये दे रहे है।
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अब तक नहीं आए है वर्दी और स्वेटर की शुल्क
सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले विद्यार्थियों को निशुल्क रूप से वर्दी, स्वेटर, जूते और मोजे उपलब्ध करवाए जाते है। इस साल शिक्षा विभाग की ओर से इन सब चीजों का शुल्क विद्यार्थियों के बैंक अकांउट में डलवाना था मगर अब तक बच्चों के बैंक खातों में कोई शुल्क नहीं आया है। सर्दी के मौसम मेें विद्यार्थी बिना स्कूल की वर्दी और स्वेटर के ही स्कूल जा रहे है।
वर्जन:
स्कूल में फिलहाल तीन विषयों के अध्यापकों की पोस्ट खाली है। इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारी से भी बातचीत की गई थी, मगर अब तक अध्यापकों की नियुक्ति नहीं हुई है। बोर्ड परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए अन्य विषय के अध्यापक ही विद्यार्थियों की पढ़ाई करवा रहे है। इस साल विद्यार्थियों के बैंक खाता में ही वर्दी और स्वेटर का शुल्क आना था, उम्मीद है जल्द ही शुल्क आएगा। - नरेश, मुख्याध्यापक, राजकीय माध्यमिक विद्यालय, लालावास।
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राजकीय माध्यमिक विद्यालय लालावास की छठी कक्षा में 10, सातवीं में 17 और आठवीं कक्षा में 12 विद्यार्थी है। इन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए हिंदी विषय का रेगुलर शिक्षक है और संस्कृति विषय का गेस्ट टीचर है। इनमें से भी एक अध्यापक तो कार्यालय कार्य में लगा रहता है। इसकी वजह से विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है। वहीं स्कूल में अंग्रेजी, गणित, सामाजिक विज्ञान, विज्ञान, पीटीआई और ड्राईंग का कोई अध्यापक नहीं है। मार्च में आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों की परीक्षा होनी है। ऐसे में अध्यापक न होने की वजह से विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
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500 से 800 रुपये में ले रहे ट्यूशन
सरकारी स्कूल में अध्यापक न होने के कारण विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए परेशानी बनी हुई है। मजबूरी में अभिभावक अपने बच्चों को गांव में ही ट्यूशन पर भेज रहे है। इसकी वजह से उन पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। गांव में वे अपने बच्चों के ट्यूशन के लिए प्रति माह 500 से 800 रुपये दे रहे है।
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अब तक नहीं आए है वर्दी और स्वेटर की शुल्क
सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले विद्यार्थियों को निशुल्क रूप से वर्दी, स्वेटर, जूते और मोजे उपलब्ध करवाए जाते है। इस साल शिक्षा विभाग की ओर से इन सब चीजों का शुल्क विद्यार्थियों के बैंक अकांउट में डलवाना था मगर अब तक बच्चों के बैंक खातों में कोई शुल्क नहीं आया है। सर्दी के मौसम मेें विद्यार्थी बिना स्कूल की वर्दी और स्वेटर के ही स्कूल जा रहे है।
वर्जन:
स्कूल में फिलहाल तीन विषयों के अध्यापकों की पोस्ट खाली है। इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारी से भी बातचीत की गई थी, मगर अब तक अध्यापकों की नियुक्ति नहीं हुई है। बोर्ड परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए अन्य विषय के अध्यापक ही विद्यार्थियों की पढ़ाई करवा रहे है। इस साल विद्यार्थियों के बैंक खाता में ही वर्दी और स्वेटर का शुल्क आना था, उम्मीद है जल्द ही शुल्क आएगा। - नरेश, मुख्याध्यापक, राजकीय माध्यमिक विद्यालय, लालावास।