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Bhiwani News: तीन दशक से बरसाती जलभराव की समस्या झेल रहे चार गांवों में अब होगा स्थायी बंदोबस्त, सूखाग्रस्त इलाके में सिंचित होगी भूमि
Thu, 27 Jun 2024 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Thu, 27 Jun 2024 01:52 AM IST
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भिवानी गांव खरक में बरसाती पानी की निकासी के लिए तैयार किया जा रहा चैनल।
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संजय वर्मा
भिवानी। पिछले तीन दशकों से बरसाती जलभराव की समस्या झेल रहे जिले के चार बड़े गांव खरक, कलिंगा, फूलपुरा, सैय में अब 1,800 एकड़ भूमि पर स्थायी बंदोबस्त होंगे। इसके लिए सिंचाई विभाग की बौंद डिविजन ने खरक, फुलपुरा, सैय और कालिंगा के लिए अलग-अलग बरसाती पानी निकासी की परियोजनाओं पर काम शुरू कराया है।
बरसाती पानी को आबादी भरे इलाके व खेतों से निकासी कर ऐसे किसानों के खेतों तक पाइप लाइन के जरिये पहुंचाया जाएगा। जो फिलहाल सूखाग्रस्त हैं। यहां किसान बरसाती पानी को अपनी फसलों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे। बरसाती पानी की निकासी की परियोजनाओं पर दिसंबर तक काम भी पूरा हो जाएगा। इस क्षेत्र में करीब 1,800 एकड़ इलाके व खेतों में बरसाती पानी से जलभराव होता है।
सिंचाई विभाग की बौंद डिविजन ने गांव खरककलां में करीब 400 एकड़ भूमि क्षेत्र में होने वाले बरसाती जलभराव की निकासी के लिए 90 लाख के बजट से 4,500 फीट लंबाई की पाइप लाइन डालने का काम शुरू किया है। गांव खरक कलां की आबादी भरे इलाके और खेतों से इन पाइप लाइनों के जरिए पानी ऐसे किसानों तक पहुंचेगा, जहां पानी की गंभीर समस्या बनी रहती है।
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इसी तरह गांव फूलपुरा में भी सिंचाई विभाग की करीब डेढ़ करोड़ की लागत से बरसाती पानी की निकासी की परियोजना पर काम चल रहा है। यहां भी हर बार मानसून में करीब 400 एकड़ में बरसाती जलभराव होता है। इस क्षेत्र में करीब नौ हजार फीट लंबाई तक पाइप डालकर बरसाती पानी की निकासी का स्थायी बंदोबस्त किया जाएगा।
गांव सैय में भी करीब 60 लाख के बजट से सिंचाई विभाग द्वारा 4,200 फीट लंबी पाइप लाइन डालने का चल रहा है। गांव सैय में आबादी के आसपास और करीब 50 एकड़ भूमि से भी बरसाती पानी का स्थायी बंदोबस्त होगा। ये पानी किसानों की रेतीले टीलों में फसल लहलहाने में इस्तेमाल होगा।
बौंद डिविजन के अंतर्गत कोई भी ड्रेन और माइनर नहीं आती है। इस डिविजन में अधिकांश इलाका सूखाग्रस्त ही है। जबकि कुछ बड़े गांवों के निचले इलाके में बारिश का पानी जमा हो जाता है। जिससे कई गांवों में तो ग्रामीणों के पलायन की भी नौबत आती है। सैकड़ों एकड़ में खड़ी फसल में भी पानी जमा हो जाता है।
कलिंगा में 3.90 करोड़ के बजट से 15,000 फीट लंबी डाली जाएगी पाइपलाइन
गांव कलिंगा में 3.90 करोड़ के बजट से करीब 15,000 फीट लंबी पाइप लाइन डाली जाएगी। इसके बाद कलिंगा में करीब एक हजार एकड़ भूमि में बरसाती जलभराव से निजात मिलेगी। कलिंगा में कई आबादी वाले इलाकों में भी बारिश का पानी जमा हो जाता है। इसकी निकासी के भी अब स्थायी बंदोबस्त होंगे। इस परियोजना पर काम शुरू हुआ है। इस पर अगले साल मार्च तक काम पूरा होगा। कलिंगा में बरसाती जलभराव किसानों और ग्रामीणों के लिए काफी बड़ी समस्या बनता है। बारिश के पांच माह बाद भी यहां पानी की निकासी नहीं हो पाती है। ऐसे में अब एक हजार एकड़ में होने वाले जलभराव के बरसाती पानी को सूखाग्रस्त यानी बिरानी वाले इलाके में किसानों की फसलों में अच्छी पैदावार लेने में इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए सिंचाई विभाग ने होद तैयार कराए हैं और पाइप लाइन के जरिए ये पानी काफी दूर तक खेतों में इस्तेमाल होकर फसल उत्पादन में भी अहम भागीदारी निभाएगा।
बौंद डिविजन के अंतर्गत आने वाले गांव खरक, कलिंगा, सैय और फूलपुरा में अलग-अलग परियोजनाओं पर काम चल रहा है। बरसाती जलभराव की समस्या से इन गांवों को स्थायी तौर पर निजात दिलाने के लिए पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं। जलभराव संभावित इलाकों में पाइप लाइन डाली जा रही है, जिस पानी को सूखाग्रस्त इलाके के किसानों को सिंचाई में इस्तेमाल लाया जाएगा। परियोजनाओं पर तय समय के अंदर काम पूरा करा दिया जाएगा। जिन हिस्सों में मानसून के दौरान जलभराव के हालात बन रहे हैं, वहां पर पहले पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं।
- गौरव लांबा कार्यकारी अभियंता बौंद डिविजन सिंचाई विभाग भिवानी।
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भिवानी। पिछले तीन दशकों से बरसाती जलभराव की समस्या झेल रहे जिले के चार बड़े गांव खरक, कलिंगा, फूलपुरा, सैय में अब 1,800 एकड़ भूमि पर स्थायी बंदोबस्त होंगे। इसके लिए सिंचाई विभाग की बौंद डिविजन ने खरक, फुलपुरा, सैय और कालिंगा के लिए अलग-अलग बरसाती पानी निकासी की परियोजनाओं पर काम शुरू कराया है।
बरसाती पानी को आबादी भरे इलाके व खेतों से निकासी कर ऐसे किसानों के खेतों तक पाइप लाइन के जरिये पहुंचाया जाएगा। जो फिलहाल सूखाग्रस्त हैं। यहां किसान बरसाती पानी को अपनी फसलों में सिंचाई के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे। बरसाती पानी की निकासी की परियोजनाओं पर दिसंबर तक काम भी पूरा हो जाएगा। इस क्षेत्र में करीब 1,800 एकड़ इलाके व खेतों में बरसाती पानी से जलभराव होता है।
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सिंचाई विभाग की बौंद डिविजन ने गांव खरककलां में करीब 400 एकड़ भूमि क्षेत्र में होने वाले बरसाती जलभराव की निकासी के लिए 90 लाख के बजट से 4,500 फीट लंबाई की पाइप लाइन डालने का काम शुरू किया है। गांव खरक कलां की आबादी भरे इलाके और खेतों से इन पाइप लाइनों के जरिए पानी ऐसे किसानों तक पहुंचेगा, जहां पानी की गंभीर समस्या बनी रहती है।
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इसी तरह गांव फूलपुरा में भी सिंचाई विभाग की करीब डेढ़ करोड़ की लागत से बरसाती पानी की निकासी की परियोजना पर काम चल रहा है। यहां भी हर बार मानसून में करीब 400 एकड़ में बरसाती जलभराव होता है। इस क्षेत्र में करीब नौ हजार फीट लंबाई तक पाइप डालकर बरसाती पानी की निकासी का स्थायी बंदोबस्त किया जाएगा।
गांव सैय में भी करीब 60 लाख के बजट से सिंचाई विभाग द्वारा 4,200 फीट लंबी पाइप लाइन डालने का चल रहा है। गांव सैय में आबादी के आसपास और करीब 50 एकड़ भूमि से भी बरसाती पानी का स्थायी बंदोबस्त होगा। ये पानी किसानों की रेतीले टीलों में फसल लहलहाने में इस्तेमाल होगा।
बौंद डिविजन के अंतर्गत कोई भी ड्रेन और माइनर नहीं आती है। इस डिविजन में अधिकांश इलाका सूखाग्रस्त ही है। जबकि कुछ बड़े गांवों के निचले इलाके में बारिश का पानी जमा हो जाता है। जिससे कई गांवों में तो ग्रामीणों के पलायन की भी नौबत आती है। सैकड़ों एकड़ में खड़ी फसल में भी पानी जमा हो जाता है।
कलिंगा में 3.90 करोड़ के बजट से 15,000 फीट लंबी डाली जाएगी पाइपलाइन
गांव कलिंगा में 3.90 करोड़ के बजट से करीब 15,000 फीट लंबी पाइप लाइन डाली जाएगी। इसके बाद कलिंगा में करीब एक हजार एकड़ भूमि में बरसाती जलभराव से निजात मिलेगी। कलिंगा में कई आबादी वाले इलाकों में भी बारिश का पानी जमा हो जाता है। इसकी निकासी के भी अब स्थायी बंदोबस्त होंगे। इस परियोजना पर काम शुरू हुआ है। इस पर अगले साल मार्च तक काम पूरा होगा। कलिंगा में बरसाती जलभराव किसानों और ग्रामीणों के लिए काफी बड़ी समस्या बनता है। बारिश के पांच माह बाद भी यहां पानी की निकासी नहीं हो पाती है। ऐसे में अब एक हजार एकड़ में होने वाले जलभराव के बरसाती पानी को सूखाग्रस्त यानी बिरानी वाले इलाके में किसानों की फसलों में अच्छी पैदावार लेने में इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए सिंचाई विभाग ने होद तैयार कराए हैं और पाइप लाइन के जरिए ये पानी काफी दूर तक खेतों में इस्तेमाल होकर फसल उत्पादन में भी अहम भागीदारी निभाएगा।
बौंद डिविजन के अंतर्गत आने वाले गांव खरक, कलिंगा, सैय और फूलपुरा में अलग-अलग परियोजनाओं पर काम चल रहा है। बरसाती जलभराव की समस्या से इन गांवों को स्थायी तौर पर निजात दिलाने के लिए पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं। जलभराव संभावित इलाकों में पाइप लाइन डाली जा रही है, जिस पानी को सूखाग्रस्त इलाके के किसानों को सिंचाई में इस्तेमाल लाया जाएगा। परियोजनाओं पर तय समय के अंदर काम पूरा करा दिया जाएगा। जिन हिस्सों में मानसून के दौरान जलभराव के हालात बन रहे हैं, वहां पर पहले पुख्ता प्रबंध किए जा रहे हैं।
- गौरव लांबा कार्यकारी अभियंता बौंद डिविजन सिंचाई विभाग भिवानी।