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Bhiwani News: डेढ़ साल बाद 60 करोड़ से खरीदी रोवर मशीनों से अब लिया जाएगा भूमि पैमाइश संबंधी काम
Mon, 12 May 2025 10:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Mon, 12 May 2025 10:22 PM IST
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भिवानी में इलेक्ट्रॉनिक रोवर मशीन के बारे में पटवारियों को जानकारी देते मास्टर ट्रेनर फुन्साे
अशोक भारद्वाज
भिवानी। पिछले साल जनवरी में भूमि की पैमाइश के लिए प्रदेशभर में लगभग 60 करोड़ की लागत से खरीदी गई इलेक्ट्रॉनिक रोवर मशीनों से अब कार्य लिया जाएगा। डेढ़ साल तक ये मशीनें राजस्व विभाग के कमरों में कबाड़ की तरह पड़ी रही। इस कारण मशीनों की बैटरी भी खत्म हो गई।
इनको अब चार्ज करके काम में लिया जाएगा। प्रयोग न होने के कारण इनके अंदर मकड़ी के जाले बन गए थे। अब मशीनों को चलाने के लिए प्रदेशभर के पटवारियों को दो दिन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए चंडीगढ़ से प्रत्येक जिले में टीम भेजी जा रही।
सोमवार को लघु सचिवालय स्थित वीडियो कॉन्फ्रेंस रूम में मास्टर ट्रेनर व हेल्पर द्वारा मशीन चलाने के लिए तकनीकी जानकारियां दी गईं। वहीं मंगलवार को पटवारियों को खेतों में ले जाकर मशीनें प्रयोग करके दिखाई जाएंगी।
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दरअसल, प्रदेश सरकार द्वारा भूमि की पैमाइश के लिए पटवारियों को पिछले साल रोवर मशीनें दी गई थी। इससे पहले पटवारियों की ओर से मैन्युअल तरीके से ही जमीन की पैमाइश की जाती थी। जिससे पैमाइश में काफी बार इंच व फुट तक की गड़बड़ी होने की आंशका बनी रहती थी।
जमीन पैमाइश में गड़बड़ी होने के कारण किसानों में आपस में झगड़े होते रहते थे। इन सभी विवादों से निपटने के लिए सरकार ने मैनुअल तरीके से पैमाइश न करवाकर मशीन से पैमाइश करवाने का निर्णय लिया। जिसके लिए पिछले साल 300 इलेक्ट्रॉनिक मशीनें खरीदी गई थीं। रोवर मशीनों से भूमि की सटीक पैमाइश करने में मदद मिलती है।
इसमें एक इंच भर भी अंतर नहीं होता है। ये मशीनें खरीदकर सरकार ने सभी जिलों में भेज दी गई थी। लेकिन पटवारियों को ये मशीनें चलाने का अनुभव नहीं था। इसके लिए पटवारियों को प्रशिक्षण दिया जाना था। प्रशिक्षण देने की तैयारी में ही डेढ़ साल बीत गया। इस कारण ये मशीनें पड़ी-पड़ी कबाड़ होती रहीं।
बीस लाख रुपये है एक मशीन की कीमत
इलेक्ट्रॉनिक रोवर मशीन की कीमत करीब 20 लाख रुपये है। इन मशीनों को चलाने के लिए सभी जिलों में पटवारियों को तकनीकी जानकारियां दी जा रही हैं। इसके लिए प्रदेशभर में दो टीमें भेजी गई हैं। एक टीम में एक मास्टर ट्रेनर व हेल्पर है। पटवारियों को प्रशिक्षण देने का कार्य 22 अप्रैल से शुरू हो चुका है। अभी तक एक टीम की ओर से पलवल, फरीदाबाद, नूंह, झज्जर, गुरुग्राम, भिवानी में प्रशिक्षण दिया गया है। 14 मई को रोहतक के पटवारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं, दूसरी टीम ने करनाल से प्रशिक्षण देना शुरू किया था। जो अन्य जिलों में प्रशिक्षण दे रही है।
मास्टर ट्रेनरों को दिया गया है एक साल का प्रशिक्षण
रोवर मशीनों के बारे में पटवारियों को जानकारी देने वाले मास्टर ट्रेनरों को हैदराबाद में एक साल तक प्रशिक्षण दिया गया है। जहां पर इन मास्टर ट्रेनरों को लेवलिंग, रोवर, जीपीएस, टोटल मशीन चलाने की ट्रेनिंग दी गई है। अब ये मास्टर ट्रेनर प्रत्येक जिले में पटवारियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। मशीनों को प्रशिक्षण देने का ट्रेनिंग सेंटर हैदराबाद में स्थापित है। वहीं इनका हेडक्वार्टर देहरादून में है।
इलेक्ट्रॉनिक रोवर मशीनों को चलाने के लिए हैदराबाद में एक साल का प्रशिक्षण दिया गया है। अब प्रत्येक जिले के पटवारियों को रोवर मशीन चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए दो टीमें भेजी गई है। प्रशिक्षण देने का कार्य 22 अप्रैल से शुरू हुआ है। - फुन्साेंग आंगचुक, सर्वेक्षक, मास्टर ट्रेनर।
पिछले साल सरकार की ओर से सभी जिलों को रोवर मशीनें दी गई थीं। पटवारी प्रशिक्षित न होने के कारण मशीनों से काम नहीं लिया जा सका। अब पटवारियों को मशीन चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। एक मशीन की कीमत लगभग 20 लाख रुपये है। - शंकर, हेल्पर, एमटीएस।
रोवर मशीनों को चलाने के लिए पटवारियों को लघु सचिवालय में ट्रेनिंग दी गई। भूमि की पैमाइश के लिए रोवर मशीन से अब सटीक जानकारी मिल सकेगी। जमीन की पैमाइश में इंच भर भी फर्क नहीं आएगा। इससे किसानों को लाभ मिलेगा। - विकास राठी, राज्य उप प्रधान, पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन।
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भिवानी। पिछले साल जनवरी में भूमि की पैमाइश के लिए प्रदेशभर में लगभग 60 करोड़ की लागत से खरीदी गई इलेक्ट्रॉनिक रोवर मशीनों से अब कार्य लिया जाएगा। डेढ़ साल तक ये मशीनें राजस्व विभाग के कमरों में कबाड़ की तरह पड़ी रही। इस कारण मशीनों की बैटरी भी खत्म हो गई।
इनको अब चार्ज करके काम में लिया जाएगा। प्रयोग न होने के कारण इनके अंदर मकड़ी के जाले बन गए थे। अब मशीनों को चलाने के लिए प्रदेशभर के पटवारियों को दो दिन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए चंडीगढ़ से प्रत्येक जिले में टीम भेजी जा रही।
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सोमवार को लघु सचिवालय स्थित वीडियो कॉन्फ्रेंस रूम में मास्टर ट्रेनर व हेल्पर द्वारा मशीन चलाने के लिए तकनीकी जानकारियां दी गईं। वहीं मंगलवार को पटवारियों को खेतों में ले जाकर मशीनें प्रयोग करके दिखाई जाएंगी।
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दरअसल, प्रदेश सरकार द्वारा भूमि की पैमाइश के लिए पटवारियों को पिछले साल रोवर मशीनें दी गई थी। इससे पहले पटवारियों की ओर से मैन्युअल तरीके से ही जमीन की पैमाइश की जाती थी। जिससे पैमाइश में काफी बार इंच व फुट तक की गड़बड़ी होने की आंशका बनी रहती थी।
जमीन पैमाइश में गड़बड़ी होने के कारण किसानों में आपस में झगड़े होते रहते थे। इन सभी विवादों से निपटने के लिए सरकार ने मैनुअल तरीके से पैमाइश न करवाकर मशीन से पैमाइश करवाने का निर्णय लिया। जिसके लिए पिछले साल 300 इलेक्ट्रॉनिक मशीनें खरीदी गई थीं। रोवर मशीनों से भूमि की सटीक पैमाइश करने में मदद मिलती है।
इसमें एक इंच भर भी अंतर नहीं होता है। ये मशीनें खरीदकर सरकार ने सभी जिलों में भेज दी गई थी। लेकिन पटवारियों को ये मशीनें चलाने का अनुभव नहीं था। इसके लिए पटवारियों को प्रशिक्षण दिया जाना था। प्रशिक्षण देने की तैयारी में ही डेढ़ साल बीत गया। इस कारण ये मशीनें पड़ी-पड़ी कबाड़ होती रहीं।
बीस लाख रुपये है एक मशीन की कीमत
इलेक्ट्रॉनिक रोवर मशीन की कीमत करीब 20 लाख रुपये है। इन मशीनों को चलाने के लिए सभी जिलों में पटवारियों को तकनीकी जानकारियां दी जा रही हैं। इसके लिए प्रदेशभर में दो टीमें भेजी गई हैं। एक टीम में एक मास्टर ट्रेनर व हेल्पर है। पटवारियों को प्रशिक्षण देने का कार्य 22 अप्रैल से शुरू हो चुका है। अभी तक एक टीम की ओर से पलवल, फरीदाबाद, नूंह, झज्जर, गुरुग्राम, भिवानी में प्रशिक्षण दिया गया है। 14 मई को रोहतक के पटवारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं, दूसरी टीम ने करनाल से प्रशिक्षण देना शुरू किया था। जो अन्य जिलों में प्रशिक्षण दे रही है।
मास्टर ट्रेनरों को दिया गया है एक साल का प्रशिक्षण
रोवर मशीनों के बारे में पटवारियों को जानकारी देने वाले मास्टर ट्रेनरों को हैदराबाद में एक साल तक प्रशिक्षण दिया गया है। जहां पर इन मास्टर ट्रेनरों को लेवलिंग, रोवर, जीपीएस, टोटल मशीन चलाने की ट्रेनिंग दी गई है। अब ये मास्टर ट्रेनर प्रत्येक जिले में पटवारियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। मशीनों को प्रशिक्षण देने का ट्रेनिंग सेंटर हैदराबाद में स्थापित है। वहीं इनका हेडक्वार्टर देहरादून में है।
इलेक्ट्रॉनिक रोवर मशीनों को चलाने के लिए हैदराबाद में एक साल का प्रशिक्षण दिया गया है। अब प्रत्येक जिले के पटवारियों को रोवर मशीन चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए दो टीमें भेजी गई है। प्रशिक्षण देने का कार्य 22 अप्रैल से शुरू हुआ है। - फुन्साेंग आंगचुक, सर्वेक्षक, मास्टर ट्रेनर।
पिछले साल सरकार की ओर से सभी जिलों को रोवर मशीनें दी गई थीं। पटवारी प्रशिक्षित न होने के कारण मशीनों से काम नहीं लिया जा सका। अब पटवारियों को मशीन चलाने की ट्रेनिंग दी जा रही है। एक मशीन की कीमत लगभग 20 लाख रुपये है। - शंकर, हेल्पर, एमटीएस।
रोवर मशीनों को चलाने के लिए पटवारियों को लघु सचिवालय में ट्रेनिंग दी गई। भूमि की पैमाइश के लिए रोवर मशीन से अब सटीक जानकारी मिल सकेगी। जमीन की पैमाइश में इंच भर भी फर्क नहीं आएगा। इससे किसानों को लाभ मिलेगा। - विकास राठी, राज्य उप प्रधान, पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन।