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Bhiwani News: सरकारी विभागों में तालमेल की कमी अब आचार संहिता के फेर में उलझी रेलवे ओवरब्रिज परियोजनाएं, रुका काम
Fri, 29 Mar 2024 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 29 Mar 2024 12:38 AM IST
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भिवानी। सरकारी विभागों में तालमेल का अभाव तो था ही अब आचार संहिता के फेर में शहर की दो रेलवे ओवरब्रिज परियोजनाएं उलझ गई हैं, जिसकी वजह से उनका काम भी रुका हुआ है। समय से टेंडर नहीं होने की वजह से दिनोद रोड जीतुवाला रेलवे फाटक और लोहारू रोड के रेलवे क्रॉसिंग पर सीवर और पानी की लाइन शिफ्ट नहीं हो पाई हैं।
पीडब्ल्यूडी विभाग अधिकारियों का कहना है कि दो साल में डेढ़ करोड़ रुपये की राशि जमा कराने के बावजूद करीब 100 रिमाइंडर जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को दिए जा चुके हैं, मगर फिर भी पुल निर्माण में आड़े आ रही सीवर और पानी की लाइनों को शिफ्ट नहीं किया है। वहीं जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अधिकारियों का तर्क है कि टेंडर में अब चुनावी आचार संहिता का पेंच फंसा है, जून में ही सीवर और पानी की लाइन शिफ्टिंग के टेंडर हो पाएंगे। इस बीच दोनों पुलों का काम अधर में ही लटका रहने की संभावना है।
भिवावानी के कृष्णा कॉलोनी से दिनोद रोड जीतुवाला फाटक संख्या सी-52 पर रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का काम चल रहा है। शहर का सबसे छोटा 600 मीटर का रेलवे ओवरब्रिज करीब 18 करोड़ की लागत से बनना है। इस पुल का करीब 80 से 85 फीसदी काम भी पूरा हो गया है। लेकिन पुल के दोनों छौर पर अब मिट्टी भराई होनी बाकी है। हालांकि पुल निर्माण मार्च में पूरा हो जाना था, मगर ये काम तभी संभव होगा जब पुल निर्माण कार्य के आड़े आने वाली सीवर और पानी की लाइनों को यहां से शिफ्ट किया जाएगा। हालांकि पीडब्ल्यूडी विभाग ने काफी पहले ही लाइन शिफ्ट किए जाने संबंधी अपनी औपचारिकताएं पूरी कर दी थी, मगर जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अधिकारी पहले तो आनाकानी करते रहे, अब लाइन शिफ्टिंग के टेंडर कराने में आचार संहिता का पेंच फंस गया।
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इसी तरह लोहारू रोड पर 52 साल पुराने पुल को तोड़कर नए पुल निर्माण का काम भी बड़ी सीवर लाइन शिफ्ट नहीं होने से शुरुआत में ही अटक गया। यहां पर भी रेलवे लाइन की क्रॉसिंग है और डिस्पोजल से ट्रीटमेंट प्लांट तक जाने वाली बड़ी सीवर लाइन शिफ्ट होनी है।
महम रोड कालुवास पुल में भी अब आड़े आई बिजली लाइन
भिवानी-महम रोड पर भी गांव कालुवास के पास 900 मीटर लंबा रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का काम चल रहा है। पुल करीब 80 फीसदी बन चुका है। मगर अब यहां बिजली की लाइन आड़े आ रही है। इसे शिफ्ट किया जाना है। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी ने बिजली निगम को भी लाइन शिफ्ट का अनुरोध कर पैसा जमा कराया है। पहले ये पुल 18 करोड़ से बनना था, मगर इसके डिजाइन में बदलाव के बाद अब पांच करोड़ से इसका री टेंडर हुआ है। इसका काम छह माह में पूरा होना है।
हमने जनस्वास्थ्य विभाग को दिनोद रोड पर पुल निर्माण के लिए पानी और सीवर लाइन शिफ्ट करने के लिए करीब सौ बार रिमाइंडर दिए हैं, जबकि काफी बार अधिकारियों से भी बातचीत की है, इसके बावजूद अधिकतर हिस्से की सीवर और पानी की लाइनें शिफ्ट नहीं हुई हैं। पुलिस निर्माण 85 फीसदी पूरा हो चुका है। अब पुल को दोनों तरफ कनेक्टिविटी देने के लिए मिट्टी का काम होना है। ये कार्य तभी संभव होगा जब सीवर और पानी की लाइन शिफ्ट हो जाएंगी। लाइन शिफ्ट होने के दो माह बाद ही पुल का काम पूरा करा देंगे।
-सोनू हुड्डा, कनिष्ठ अभियंता, पीडब्ल्यूडी भिवानी।
फिलहाल रेलवे ओवरब्रिज निर्माण साइट पर पानी और सीवर की लाइनों को शिफ्ट किए जाने संबंधी कोई भी टेंडर चुनावी आचार संहिता की वजह से नहीं हो पाएंगे। जून में ही लाइन शिफ्टिंग के टेंडर करा पाएंगे। फिलहाल हमारी वजह से पुल निर्माण में कोई दिक्कत नहीं है। जिस हिस्से में पुल बन रहा है, उस हिस्से में लाइनों को बंद कर दिया गया है। जब भी जरूरत पड़ती है विभाग के कर्मचारी उनका सहयोग करने जाते हैं।
-सुनील कुमार, कार्यकारी अभियंता, शहरी सीवरेज शाखा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, भिवानी।
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पीडब्ल्यूडी विभाग अधिकारियों का कहना है कि दो साल में डेढ़ करोड़ रुपये की राशि जमा कराने के बावजूद करीब 100 रिमाइंडर जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को दिए जा चुके हैं, मगर फिर भी पुल निर्माण में आड़े आ रही सीवर और पानी की लाइनों को शिफ्ट नहीं किया है। वहीं जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अधिकारियों का तर्क है कि टेंडर में अब चुनावी आचार संहिता का पेंच फंसा है, जून में ही सीवर और पानी की लाइन शिफ्टिंग के टेंडर हो पाएंगे। इस बीच दोनों पुलों का काम अधर में ही लटका रहने की संभावना है।
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भिवावानी के कृष्णा कॉलोनी से दिनोद रोड जीतुवाला फाटक संख्या सी-52 पर रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का काम चल रहा है। शहर का सबसे छोटा 600 मीटर का रेलवे ओवरब्रिज करीब 18 करोड़ की लागत से बनना है। इस पुल का करीब 80 से 85 फीसदी काम भी पूरा हो गया है। लेकिन पुल के दोनों छौर पर अब मिट्टी भराई होनी बाकी है। हालांकि पुल निर्माण मार्च में पूरा हो जाना था, मगर ये काम तभी संभव होगा जब पुल निर्माण कार्य के आड़े आने वाली सीवर और पानी की लाइनों को यहां से शिफ्ट किया जाएगा। हालांकि पीडब्ल्यूडी विभाग ने काफी पहले ही लाइन शिफ्ट किए जाने संबंधी अपनी औपचारिकताएं पूरी कर दी थी, मगर जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग अधिकारी पहले तो आनाकानी करते रहे, अब लाइन शिफ्टिंग के टेंडर कराने में आचार संहिता का पेंच फंस गया।
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इसी तरह लोहारू रोड पर 52 साल पुराने पुल को तोड़कर नए पुल निर्माण का काम भी बड़ी सीवर लाइन शिफ्ट नहीं होने से शुरुआत में ही अटक गया। यहां पर भी रेलवे लाइन की क्रॉसिंग है और डिस्पोजल से ट्रीटमेंट प्लांट तक जाने वाली बड़ी सीवर लाइन शिफ्ट होनी है।
महम रोड कालुवास पुल में भी अब आड़े आई बिजली लाइन
भिवानी-महम रोड पर भी गांव कालुवास के पास 900 मीटर लंबा रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का काम चल रहा है। पुल करीब 80 फीसदी बन चुका है। मगर अब यहां बिजली की लाइन आड़े आ रही है। इसे शिफ्ट किया जाना है। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी ने बिजली निगम को भी लाइन शिफ्ट का अनुरोध कर पैसा जमा कराया है। पहले ये पुल 18 करोड़ से बनना था, मगर इसके डिजाइन में बदलाव के बाद अब पांच करोड़ से इसका री टेंडर हुआ है। इसका काम छह माह में पूरा होना है।
हमने जनस्वास्थ्य विभाग को दिनोद रोड पर पुल निर्माण के लिए पानी और सीवर लाइन शिफ्ट करने के लिए करीब सौ बार रिमाइंडर दिए हैं, जबकि काफी बार अधिकारियों से भी बातचीत की है, इसके बावजूद अधिकतर हिस्से की सीवर और पानी की लाइनें शिफ्ट नहीं हुई हैं। पुलिस निर्माण 85 फीसदी पूरा हो चुका है। अब पुल को दोनों तरफ कनेक्टिविटी देने के लिए मिट्टी का काम होना है। ये कार्य तभी संभव होगा जब सीवर और पानी की लाइन शिफ्ट हो जाएंगी। लाइन शिफ्ट होने के दो माह बाद ही पुल का काम पूरा करा देंगे।
-सोनू हुड्डा, कनिष्ठ अभियंता, पीडब्ल्यूडी भिवानी।
फिलहाल रेलवे ओवरब्रिज निर्माण साइट पर पानी और सीवर की लाइनों को शिफ्ट किए जाने संबंधी कोई भी टेंडर चुनावी आचार संहिता की वजह से नहीं हो पाएंगे। जून में ही लाइन शिफ्टिंग के टेंडर करा पाएंगे। फिलहाल हमारी वजह से पुल निर्माण में कोई दिक्कत नहीं है। जिस हिस्से में पुल बन रहा है, उस हिस्से में लाइनों को बंद कर दिया गया है। जब भी जरूरत पड़ती है विभाग के कर्मचारी उनका सहयोग करने जाते हैं।
-सुनील कुमार, कार्यकारी अभियंता, शहरी सीवरेज शाखा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, भिवानी।