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विडंबना: आखिर कब बंटेगा गरीबों को सूखा राशन, एक माह से योजना की मैपिंग में उलझा हुआ है प्रशासन

Sun, 03 May 2020 09:54 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2020 09:54 PM IST
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Irony: When will the poor get dry ration, the administration is entangled in the mapping of the scheme for one month
Irony: When will the poor get dry ration, the administration is entangled in the mapping of the scheme for one month - फोटो : Bhiwani
लॉकडाउन में फंसे गरीबों को आखिर सूखा राशन कब तक मिलेगा। यह अभी तय भी नहीं हो पा रहा था कि ऑनलाइन एफपीएस (फेयर प्राइज शॉप) मैपिंग का काम बीच में ही रोक कर ऑफ लाइन डोर टू डोर सर्वेक्षण के लिए फार्म बांटे जा रहे हैं। पूरा अप्रैल का महीना गरीबों की मैपिंग करने में ही बीत गया, जबकि जरूरतमंदों तक राशन पहुंचने की उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है। पहले पार्षदों से वार्ड स्तर पर जरूरतमंदों की सूची मांगी गई थी। मगर यह मामला बीच में ही खटाई में पड़ गया। इसके बाद अप्रैल माह में डिस्टे्रस (संकट) राशन टोकन योजना शुरू हुई, इसकी भी ऑनलाइन एफपीएस मैपिंग में प्रदेशभर से एक लाख 73 हजार 325 आवेदन हुए, अकेले भिवानी से 17520 गरीब परिवारों ने आवेदन किए थे।
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हरियाणा सरकार की ओर से ऐसे लोगों की पहचान के लिए चार स्तरीय कमेटी बनाई है। इसमेें यूनिट कमेटी, सेक्टर कमेटी और जोनल कमेटी के अलावा जिला स्तरीय कमेटी शामिल हैं। यूनिट कमेटी के माध्यम से डोर टू डोर सर्वे भी बीएलओ द्वारा कराया गया। इसके अलावा जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ऐसे परिवारों की एफपीएस मैपिंग का कार्य कर रहा था, जिसे मुख्यालय के आदेशों ने बीच में ही रुकवा दिया है। अब ये कार्य बीएलओ मैनुअल तरीके से डोर टू डोर फार्म बांटकर कर रहे हैं। जिला कमेटी के इस फार्म में कई बिंदुओं पर परिवार की स्थिति जानने के लिए सवाल पूछे गए हैं।
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ये तय किए गए थे मापदंड
डिस्ट्रेस राशन टोकन पाने के लिए पात्रता मापदंड भी तय किए गए। इसमें हरियाणा में रह रहा कोई भी ऐसा परिवार जिसकी मासिक आय 15 हजार से कम है। उसका राशन कार्ड भी नहीं है। वे डिस्ट्रेस राशन कार्ड के लिए आवेदन कर सकता है। उसके पास ऐसा दस्तावेज होना चाहिए, जोकि यह दर्शायें कि वह वर्तमान में हरियाणा में निवास कर रहा है।
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ऐसे शुरू की गई थी एफपीएस मैपिंग
सामान्य श्रेणी के राशन कार्ड धारक या फिर बिना कार्ड धारक कोई भी व्यक्ति एनआईसी(नेशनल इन्फार्मेटिक्स सेंटर) के माध्यम से डिस्टे्रेस राशन टोकन योजना का ऑनलाइन आवेदन कर सकता था। एनआईसी के माध्यम से प्राप्त हुए आवेदन की जानकारी जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के पास भेजी आती थी। इसके बाद खाद्य आपूर्ति विभाग एफपीएस (फेयर प्राइज शॉप) मैपिंग यानी नजदीकी सरकारी राशन डिपो के साथ जोडने का काम किया जाता था। ताकि पात्र परिवार को नजदीकी राशन डिपो से टोकन के जरिए राशन मिल सके। विभाग डबलएवाई, बीपीएल और ओपीएच(प्राथमिक परिवार) को पहले से ही कोविड-19 के दौरान अप्रैल माह में मुफ्त राशन मुहैया करा चुका है। जबकि इस योजना में सामान्य यानी हरा राशन कार्ड जिन्हें विभाग से पहले कोई खाद्य वस्तु रियायती दरों पर नहीं मिलती थी, या वे लोग जिनका राशन कार्ड ही नहीं बना था। उन्हें इसमें शामिल किया जाना था। फिलहाल फेयर प्राइज शॉप मैपिंग का काम निदेशालय के आदेशों से बीच में ही बंद हो चुका ऱ्है।
इंतजार में गुजार दिया गरीबों ने अप्रैल का महीना, नहीं बंटा सूखा राशन
पार्षद हरिराम, ईश्वर मान सहित अन्य पार्षदों का कहना है कि गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को राशन वितरण नहीं हुआ है। केवल सर्वे चल रहा है। अब सर्वे में भी जिला कमेटी द्वारा नया फार्म पार्षदों पर थोप दिया है। जबकि अप्रैल का पूरा महीनों गरीबों ने राशन के इंतजार में बिता दिया है। सरकार ने कोविड-19 के चलते तीन माह तक गरीबों को मुफ्त राशन की योजना बनाई थी। इसमें एक महीना तो सर्वे में ही निकल गया है। अधिकारी यह भी सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं कि आखिर कब तक राशन बांटा जाएगा और किन लोगों को ये राशन मिलेगा।
वर्जन:::खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले निदेशालय ने फिलहाल ऑनलाइन मैपिंग के कार्य पर रोक लगा दी है। इसमें वजह स्पष्ट नहीं की गई है। मुख्यालय के आदेशों के बाद भिवानी में मैपिंग का काम बंद कर दिया है।

-अनिल कालरा, जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक भिवानी।
वर्जन:::सरकार की हिदायतों के अनुसार कोविड-19 की चार स्तरीय कमेटी के माध्यम से राशन का वितरण होना है। सरकार की डिस्ट्रेस राशन टोकन योजना के तहत राशन का वितरण होना है। जिसकी प्रक्रिया चल रही है।
-डॉ मनोज कुमार, अतिरिक्त उपायुक्त भिवानी।
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