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विजिलेंस विभाग की टीम ने खंगाला अस्पताल का रिकार्ड
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अस्पताल में निशक्त जन कार्यालय।
- फोटो : Bhiwani
वर्ष 1999 के दिव्यांग प्रमाण पत्रों का रिकार्ड गुम होने व गलत ढंग प्रमाण पत्र जारी किए जाने के मामले की जांच सात साल बाद फिर शुरू हो गई है। इसकी जांच के लिए शुक्रवार को हिसार से आई विजिलेंस टीम ने रिकार्ड खंगाला। इस संबंध में वर्ष 2015 में एफआईआर दर्ज हुई थी। इस प्रकरण में डिप्टी सिविल सर्जन समेत कई कर्मचारियों के शामिल होने की आशंका है।
आरटीआई शाखा के रिकॉर्ड अनुसार दिसंबर 2014 में जिले के गांव द्वारका निवासी कृष्ण कुमार ने एक जनवरी 1990 से 31 दिसंबर 2005 के बीच एक व्यक्ति के दिव्यांगता प्रमाण पत्र संबंधित आरटीआई लगाई थी। जिसमें उन्होंने तत्कालिन चेयरमैन हैंडीकैप बोर्ड से जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए आरटीआई लगाई थी। इस संबंध में विभाग द्वारा उसे रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाया गया। बल्कि उन्हें जवाब दिया कि सूचना थर्ड पार्टी से संबंधित है तो आपको उपलब्ध नहीं करवाई जाएगी। जिसके बाद प्रार्थी ने फिर से आरटीआई में दिव्यांगता प्रमाण पत्र की जानकारी मांगी मगर विभाग के तत्कालीन चेयरमैन दिव्यांग बोर्ड व वर्तमान में उपसिविल सर्जन व दिव्यांग बोर्ड के डिलिंग सहायक ने राज्य चौकसी ब्यूरी द्वारा की जा रही जांच की गंभीरता को ना समझते हुए व जांच को प्रभावित करने के लिए भिन्न-भिन्न तरह की 15 पेजों की भ्रामक व गुमराह करने वाली सूचना उपलब्ध करवाई गई। एक जवाब में रिकार्ड गुम होने की बात भी कही। जबकि गुम हुए रिकार्ड से संबंधित कोई एफआईआर दर्ज नहीं करवाई गई। सिर्फ दो माह का ही रिकार्ड गुम होना सवाल खड़े कर रहा था।
हिसार मंडल की राज्य चौकसी ब्यूरो द्वारा की जांच के दौरान पाया कि जिला सामान्य अस्पताल में 23 सिंतबर 1999 से 30 नवरंबर 1999 तक अवधि का रजिस्टर उपलब्ध नहीं है और कार्यालय के अनुसार किसी तरह का रिकार्ड डिस्ट्रॉय या पुलिस मिसिंग रिपोर्ट नहीं की गई। विजिलेंस की जांच से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है और इसकी चर्चाएं हर किसी की जुबान पर है।
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जिला सामान्य अस्पताल में दिव्यांगों के दो महीने को सर्टिफिकेट गायब होने का मामला पहले था। जिसकी जांच विजिलेंस टीम हिसार कर रही है। जो भी तथ्य सामने आएगें उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन।
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आरटीआई शाखा के रिकॉर्ड अनुसार दिसंबर 2014 में जिले के गांव द्वारका निवासी कृष्ण कुमार ने एक जनवरी 1990 से 31 दिसंबर 2005 के बीच एक व्यक्ति के दिव्यांगता प्रमाण पत्र संबंधित आरटीआई लगाई थी। जिसमें उन्होंने तत्कालिन चेयरमैन हैंडीकैप बोर्ड से जानकारी उपलब्ध करवाने के लिए आरटीआई लगाई थी। इस संबंध में विभाग द्वारा उसे रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाया गया। बल्कि उन्हें जवाब दिया कि सूचना थर्ड पार्टी से संबंधित है तो आपको उपलब्ध नहीं करवाई जाएगी। जिसके बाद प्रार्थी ने फिर से आरटीआई में दिव्यांगता प्रमाण पत्र की जानकारी मांगी मगर विभाग के तत्कालीन चेयरमैन दिव्यांग बोर्ड व वर्तमान में उपसिविल सर्जन व दिव्यांग बोर्ड के डिलिंग सहायक ने राज्य चौकसी ब्यूरी द्वारा की जा रही जांच की गंभीरता को ना समझते हुए व जांच को प्रभावित करने के लिए भिन्न-भिन्न तरह की 15 पेजों की भ्रामक व गुमराह करने वाली सूचना उपलब्ध करवाई गई। एक जवाब में रिकार्ड गुम होने की बात भी कही। जबकि गुम हुए रिकार्ड से संबंधित कोई एफआईआर दर्ज नहीं करवाई गई। सिर्फ दो माह का ही रिकार्ड गुम होना सवाल खड़े कर रहा था।
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हिसार मंडल की राज्य चौकसी ब्यूरो द्वारा की जांच के दौरान पाया कि जिला सामान्य अस्पताल में 23 सिंतबर 1999 से 30 नवरंबर 1999 तक अवधि का रजिस्टर उपलब्ध नहीं है और कार्यालय के अनुसार किसी तरह का रिकार्ड डिस्ट्रॉय या पुलिस मिसिंग रिपोर्ट नहीं की गई। विजिलेंस की जांच से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है और इसकी चर्चाएं हर किसी की जुबान पर है।
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जिला सामान्य अस्पताल में दिव्यांगों के दो महीने को सर्टिफिकेट गायब होने का मामला पहले था। जिसकी जांच विजिलेंस टीम हिसार कर रही है। जो भी तथ्य सामने आएगें उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. सपना गहलावत, सिविल सर्जन।