फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Bhiwani News ›   Investigation: How will Corona's enemies be protected from fake personal protective equipment

पड़ताल: नकली पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूमेंट से कैसे सुरक्षित रहेंगे कोरोना के जांबाज

Sun, 12 Apr 2020 09:39 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 12 Apr 2020 09:39 PM IST
विज्ञापन
Investigation: How will Corona's enemies be protected from fake personal protective equipment
Investigation: How will Corona's enemies be protected from fake personal protective equipment - फोटो : Bhiwani
अगर आप पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूमेंट (पीपीई) किट पहनकर खुद को कोरोना से सुरक्षित समझ रहे हैं तो जरा संभल जाइएगा, क्योंकि ये किट नकली भी हो सकती है। अमर उजाला की पड़ताल में घरों के अंदर ही मेडिकल मापदंडों को ताक पर रखकर नॉन वुवेन कपड़े से पीपीई किट तैयार की जा रही हैं। अचरज तो इस बात का भी है कि पीपीई किट किसी फैक्टरी के अंदर नहीं महिलाएं और छोटे बच्चे घरों के अंदर तैयार कर रहे हैं, जिन्हें इन्हें तैयार करने के लिए सुरक्षित मापदंडों तक का कोई ज्ञान नहीं है। इतना ही नहीं महिलाएं और बच्चे भी दिनभर इन कपड़ों को जमीन पर ही गिराकर घरेलू मशीन से नंगे हाथों से सिलाई कर तैयार कर रही हैं। इन तैयार किटों को बिना सैनिटाइज और सुरक्षित मापदंडों के सीधे बाजार में पहुंचाया जा रहा है। जिस पर न तो कोई आईएसआई मार्का लगा है न ही ब्रांड का कोई जिक्र है।
विज्ञापन

भिवानी शहर के औद्योगिक सेक्टर में करीब 25 से अधिक नॉन वुवेन कपड़े से कैरी बैग तैयार करने की फैक्ट्रियां चल रही हैं। इन फैक्ट्रियों के अंदर पहले मास्क तैयार करने का गोरखधंधा भी खूब चला था, लेकिन इन्हें डस्ट पट्टी का नाम देकर प्रशासनिक अधिकारियों और स्वास्थ्य अधिकारियों के आंखों में धूल झोंक दी गई। लेकिन अब कोरोना का कहर बढ़ा तो इन फैक्टरियों के अंदर भी डस्ट पट्टी मास्क के साथ पीपीई किट यानी कैरी बैग बनाने में इस्तेमाल होने वाले कपड़े से गाउन बनाने का गोरखधंधा भी धड़ल्ले से चल पड़ा। फैक्टरी संचालक नॉन वुवेन कपड़े को घरों के अंदर भेज रहे हैं, जहां पर गली मोहल्लों में हर तीसरे या चौथे घर में महिलाएं और बच्चे थोड़े से पैसों के लालच में आकर इस गैर कानूनी कार्य के लिए तैयार हो रहे हैं। महिलाएं और बच्चे नॉन वुवेन कपड़े से पीपीई किट बनाने में जुटे हैं।
विज्ञापन

चोरी छीपे यह गोरखधंधा पिछले कुछ अर्से से तो और जोर पकड़ गया है। ऐसा नहीं है कि प्रशासन और पुलिस इस गोरखधंधे से अनजान हैं, बल्कि शिकायतों के बावजूद भी जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से आंख मूंदे है। कहने को तो प्रशासन इस समय कोरोना वायरस की सुरक्षा से प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित रखने का दम भर रहा है। मगर इस तरह नॉन वुवेन कपड़े से तैयार हो रही पीपीई किट में अभी तक प्रशासन की शायद नींद नहीं टूटी है। नींद भी जब टूटेगी जब कोई ऐसी किट का इस्तेमाल की भूल कर वायरस से संक्रमित होने का न्यौता दे बैठेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

ऐसे चल रहा नकली पीपीई किट का गोरखधंधा
नॉन वुवेन कपड़े से कैरी बैग बनाने वाली फैक्टरियों के मालिक कच्चा माल घरों के अंदर महिलाओं को उपलब्ध करा रहे हैं, ये महिलाएं घरेलू सिलाई मशीन से इन्हें तैयार कर देती हैं फिर इन्हें वापस फैक्ट्री भेजा जाता है। इस गोरखधंधे में कमीशनखोर दलाल भी सक्रिय हैं। इन्हें बनाने वाली महिलाओं को मामूली पैसे का लालच दिया जा रहा है। ये गैर कानूनी और दंडनीय अपराध भी है। अब तो झुग्गी झोपडिय़ों में भी पीपीई किट बनने लगी हैं।
औद्योगिक क्षेत्र में करीब 25 कैरी बैग बनाने की फैक्टरियां हैं, जो नॉन वुवेन कपड़े से मास्क (डस्ट पट्टी) और नॉन वुवेन कपड़े से गाउन (पीपीई किट) तैयार कर रही हैं। लेकिन घरों के अंदर महिलाओं और बच्चों द्वारा पीपीई किट तैयार किया जाना खतरे से खाली नहीं हैं। कोई भी घर में पीपीई किट तैयार नहीं कर सकता है। ये किट फैक्टरियों में या फिर टेलर्स द्वारा ही निर्धारित मापदंडों के हिसाब से होना जरूरी है।

-धर्मबीर नेहरा, प्रधान जिला उद्योग संघ।
ये मामला हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। ड्रग एक्ट के तहत जो भी वस्तुएं आती हैं, उनके मापदंड पूरे नहीं मिलने पर एक्ट के तहत ही संबंधित संस्थान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराई जाती है। इस संबंध में वे ज्यादा कुछ नहीं जानते।
हेमंत ग्रोवर, जिला औषधि नियंत्रक।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed