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स्वास्थ्य सुधारने के बजाय कहीं सेहत न बिगाड़ दे दवा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jun 2022 10:48 PM IST
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Instead of improving health, medicine should not spoil your health.
दवा पर लिखा सही तापमान की जानकारी। - फोटो : Bhiwani
भिवानी। सरकारी अस्पताल की जिन दवाइयों को मरीज अपनी बीमारियां ठीक करने के लिए ले रहे हैं, उनकी गारंटी नहीं कि वे सेहत पर असर करेगी या नहीं। स्वास्थ्य सुधारने की जगह ये दवाइयां मरीज की सेहत भी बिगाड़ सकती हैं। दरअसल स्वास्थ्य विभाग के पास दवाओं को सुरक्षित रखने और उनकी गुणवत्ता बनाए रखने की उचित व्यवस्था नहीं है। निर्धारित कूलिंग सिस्टम में न रखने के कारण दवा की प्रकृति तापमान बढ़ने के साथ ही बदल सकती है। बढ़े तापमान में रखी दवा के खराब होने से उनके सेवन करने से मरीज को रिएक्शन भी हो सकता है। ऐसे में अगर किसी मरीज की तबीयत इन दवाओं के सेवन से खराब हो जाए तो इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
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बता दें कि नागरिक अस्पताल में दी जाने वाले ज्यादातर दवा पर लिखा होता है प्लीज कीप इन कूल एंड ड्राई प्लेस (यानी की दवा को ठंडे और सूखे स्थान पर सहेजे)। अमूमन किसी भी दवा के भंडारण और उसको सुरक्षित तरीके से रखने के लिए 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान होना चाहिए। अगर इससे अधिक तापमान होगा तो दवा के खराब होने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता में कमी आने की आशंका हो जाती है। संवाद
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फिलहाल नहीं है कोई इंतजाम
दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने और उनके खराब होने से बचाने के लिए अस्पताल में निर्धारित इंतजाम की व्यवस्था कम ही है। हालांकि कागजी निर्देशों में सरकारी अस्पताल में दवा काउंटरों पर निर्धारित तापमान पर कूलिंग सिस्टम की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हुए हैं। लेकिन उसके बाद नियंत्रित तापमान पर दवाइयों को सहेजने के बंदोबस्त नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में क्यूपिक सीरप, एलबेंडाजोल, एमोक्सिसीलिन आदि दवाइयों के खराब होने या फिर उनकी गुणवत्ता पर असर पड़ने की अधिक आशंका बनी रहती है।
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रोजाना पहुंच रहे 1000 से 1200 मरीज
नागरिक अस्पताल की ओपीडी में चेकअप करवाने के लिए रोजाना 1000 से 1200 मरीज पहुंच रहे है। स्वास्थ्य विभाग ने दो जगह ओपीडी की व्यवस्था की हुई है। स्त्री रोग विशेषज्ञ की ओपीडी अल्ट्रासाउंड केंद्र में बनाई हुई है। इसके अलावा फिजिशियन, हड्डी रोग, दंत रोग, नेत्र रोग, बाल रोग पुरानी ओपीडी में ही मरीजों का चेकअप करते हैं। अस्पताल में आने वाले मरीजों के लिए दोनों जगह पर ही दवा वितरण की व्यवस्था की हुई है। इनमें पुरानी ओपीडी में बने दवा कक्ष में तो पिछले पांच साल से एसी बंद पड़ा है, जबकि अल्ट्रासाउंड केंद्र वाली ओपीडी वाले दवा कक्ष में एसी ही नहीं है।
अस्पताल की ओपीडी में दवा की खिड़की पर काफी भीड़ है। करीब दो घंटे से दवा के लिए इंतजार कर रहा हूं। चिकित्सक ने पांच दिन की दवा दी है मगर आराम नहीं होता है तो दोबारा अस्पताल में चेकअप के लिए आना पड़ेगा।
- नरेश सिंह, भारत नगर।
पिछले कुछ दिनों से तबीयत खराब चल रही है। इसके उपचार के लिए अस्पताल में आया हूं।
- सोनू, बलियाली।
दवा की खिड़की पर लंबी लाइन लगी हुई है। कितनी देर बाद नंबर आएगा पता नहीं। पहले भी दवाई ले चुका हूं मगर सेहत में कोई विशेष सुधार नहीं हो रहा। इसकी वजह से बार-बार अस्पताल आना पड़ रहा है।
- करतार सिंह।
कुछ दिनों से तबीयत खराब चल रही है, जिसके उपचार के लिए नागरिक अस्पताल में पहुंचा हूं। कई बार दवा ले चुका हूं मगर कोई खास असर नहीं दिख रहा। ऐसे में अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

- कुलदीप
नागरिक अस्पताल की ओपीडी में बने दवा कक्ष का एसी खराब होने का मामला मेरे संज्ञान में है। एसी खराब होने की वजह से दवाइयों की गुणवत्ता में कोई फर्क न आए इसके लिए पहले भी एसी की मरम्मत के लिए टेंडर जारी किया था मगर कोई कंपनी की तरफ से कोई आया ही नहीं है फिलहाल। अब उपायुक्त कार्यालय में पत्र लिखा है। दो से तीन दिन में एसी ठीक करवा दिया जाएगा।
- डॉ. एडविन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।

नागरिक अस्पताल के दवा कक्ष में खराब पड़ा एसी। संवाद

नागरिक अस्पताल के दवा कक्ष में खराब पड़ा एसी। संवाद- फोटो : Bhiwani

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