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Bhiwani News: पराली जलाने के बजाय पावर प्लांटों में बेचें किसान, बढ़ेगी आमदनी

Wed, 29 Oct 2025 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Wed, 29 Oct 2025 01:20 AM IST
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Instead of burning stubble, farmers should sell it to power plants, this will increase their income.
गांव दिनोद स्थित जैम्को एनर्जी बॉयोमास पावर प्लांट का दौरा करते  कृषि वैज्ञानिक नसीब सिंह धनखड़
भिवानी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के तहत किसानों को पराली जलाने से रोकने और उसे आय का स्रोत बनाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में कृषि वैज्ञानिकों ने मंगलवार को गांव दिनोद स्थित जैम्को एनर्जी बॉयोमास पावर प्लांट का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य किसानों को पराली बेचकर अतिरिक्त आमदनी के लिए प्रेरित करना था। सहायक कृषि अभियंता नसीब सिंह धनखड़ ने कहा कि यदि किसान पराली जलाने के बजाय इसे पावर प्लांट को बेचेंगे, तो पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी।
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धनखड़ ने बताया कि जिले के सात खंडों में से भिवानी व बवानीखेड़ा खंडों में धान की खेती की जाती है जबकि अन्य पांच खंडों में किसानों से पराली की मांग रहती है। वर्ष 2025-26 में जिले के 14,362 किसानों ने 71,173 एकड़ में धान की फसल का ऑनलाइन पंजीकरण करवाया है। किसानों द्वारा पराली प्रबंधन के लिए इन-सीटू, एक्स-सीटू और फॉडर जैसे विकल्प चुने गए हैं।
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उन्होंने बताया कि डीसी द्वारा नियुक्त गांव स्तर के नोडल अधिकारी सीआरएम मोबाइल एप के माध्यम से खेतों का निरीक्षण करेंगे। सत्यापन के बाद कृषि निदेशालय की ओर से किसानों को 1,200 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से प्रोत्साहन राशि सीधे खातों में भेजी जाएगी।
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सहायक कृषि अभियंता नसीब सिंह धनखड़ और कृषि विकास अधिकारी तरुण कुमार ने जैम्को एनर्जी बॉयोमास पावर प्लांट का दौरा कर प्रबंधक नरेंद्र पानू से पराली खरीद को लेकर विस्तृत चर्चा की। प्रबंधक ने बताया कि पावर प्लांट में सालाना करीब 50 हजार मीट्रिक टन पराली की आवश्यकता होती है लेकिन भिवानी जिले से पर्याप्त मात्रा में पराली नहीं मिल पाती। इस कारण उन्हें अन्य जिलों से भी पराली खरीदनी पड़ती है। वर्तमान में किसान पराली को 250 से 300 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेच सकते हैं।
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