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Bhiwani News: फैमिली आईडी में एक रुपया बढ़ाई आमदनी, बीपीएल कटा
Tue, 16 Apr 2024 02:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 16 Apr 2024 02:04 AM IST
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भिवानी। परिवार पहचान पत्र में मात्र एक रुपया आमदनी बढ़ाकर एक गरीब परिवार का बीपीएल राशन कार्ड काट दिया। इस संबंध में प्रदेश सरकार व अतिरिक्त उपायुक्त को लीगल नोटिस भेजा गया है।
गांव जताई निवासी बिजेंद्र सिंह ने बताया कि इस माह जब वे बीपीएल कार्ड से राशन लेने राशन डिपो पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि उनका राशन कार्ड काट दिया गया है। जब उन्होंने पता करवाया तो पता चला कि परिवार पहचान पत्र में उनकी आमदनी मात्र एक रुपया बढ़ाकर एक लाख 80 हजार एक रुपया कर दी गई है। बीपीएल राशन कार्ड एक लाख 80 हजार रुपये तक ही बनता है। एक रुपया आमदनी ज्यादा होने से बीपीएल कार्ड काट दिया है।
उन्होंने बताया कि वास्तव में उनकी आमदनी एक लाख अस्सी हजार भी नहीं है। इस संबंध में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अनेक बार संपर्क किया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने इस संबंध में अपने वकील चरण सिंह दहिया के माध्यम से प्रदेश सरकार व अतिरिक्त उपायुक्त को लीगल नोटिस भेजा है। नोटिस में पूछा गया है कि यह एक रुपए की आमदनी कहां से आई है और बीपीएल कार्ड क्यों काट दिया गया है। अगर नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो पूरे खर्चे की जिम्मेदार प्रदेश सरकार होगी।
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गांव जताई निवासी बिजेंद्र सिंह ने बताया कि इस माह जब वे बीपीएल कार्ड से राशन लेने राशन डिपो पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि उनका राशन कार्ड काट दिया गया है। जब उन्होंने पता करवाया तो पता चला कि परिवार पहचान पत्र में उनकी आमदनी मात्र एक रुपया बढ़ाकर एक लाख 80 हजार एक रुपया कर दी गई है। बीपीएल राशन कार्ड एक लाख 80 हजार रुपये तक ही बनता है। एक रुपया आमदनी ज्यादा होने से बीपीएल कार्ड काट दिया है।
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उन्होंने बताया कि वास्तव में उनकी आमदनी एक लाख अस्सी हजार भी नहीं है। इस संबंध में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से अनेक बार संपर्क किया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने इस संबंध में अपने वकील चरण सिंह दहिया के माध्यम से प्रदेश सरकार व अतिरिक्त उपायुक्त को लीगल नोटिस भेजा है। नोटिस में पूछा गया है कि यह एक रुपए की आमदनी कहां से आई है और बीपीएल कार्ड क्यों काट दिया गया है। अगर नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो पूरे खर्चे की जिम्मेदार प्रदेश सरकार होगी।
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