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Bhiwani News: पुराने ऐतिहासिक बरसाती कुंड की गलत रजिस्ट्री के मामले में राजस्व विभाग के वित्तायुक्त ने डीसी से तलब की रिपोर्ट
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भिवानी डेढ़ सौ साल पुराना बरसाती कुंड। फाइल फोटो
संजय वर्मा
भिवानी। करीब डेढ़ सौ साल पुराने ऐतिहासिक बरसाती कुंड के मामले में राजस्व विभाग के वित्तायुक्त ने संज्ञान लेते हुए भिवानी के उपायुक्त से रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद उपायुक्त ने भिवानी के तहसीलदार को पत्र लिखकर ऐतिहासिक कुंड की भूमि की बिक्री से संबंधित तत्कालीन तहसीलदार द्वारा गलत रजिस्ट्री किए जाने की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
अब वर्तमान तहसीलदार सुरेश कुमार ने इस मामले में संबंधित पटवारी और कानूनगो से पुराना रिकाॅर्ड तलब किया है, ताकि सही स्थिति का पता लगाया जा सके। यह रिपोर्ट अब मुख्यालय भेजी जानी है। चौंकाने वाली बात यह है कि पटवारी ने राजस्व विभाग के रिकाॅर्ड में प्राचीन कुंड की भूमि की रजिस्ट्री में नए मालिकों को दर्ज किया है, जबकि दान में दी गई भूमि से संबंधित हिब्बानामा गायब पाया गया। वित्तायुक्त के दखल के बाद तहसीलदारों और अन्य अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। अब अधिकारी अपनी खामियों को छुपाने में जुटे हैं, जबकि तत्कालीन तहसीलदार को इस मामले में मुख्य संदिग्ध माना जा रहा है।
गांव देवसर निवासी मंगल सिंह चौहान ने हिब्बानामा से 11 जून 1910 में कुसुंभी मोड़ स्थित दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे के साथ लगती करीब सवा एकड़ भूमि लुधियाना के टोहरमल को धर्मार्थ कार्य के लिए दान में दी थी। उस समय इसमें कुछ मकान भी बने थे, जिसके बाद इस भूमि में बरसाती कुंड का निर्माण किया गया। राजस्व विभाग की 1908-09 की जमाबंदी रिपोर्ट में भी हिब्बानामा से ये भूमि धर्मार्थ कार्य के लिए दान में दी गई दर्शायी गई है। इसके बावजूद इस भूमि को हड़पने के लिए तत्कालीन तहसीलदार ने अपने रिश्तेदार के नाम से भूमि में हिस्सेदारी में रजिस्ट्री कराकर नए लोगों को मालिक बना डाला। राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से दान में दी गई भूमि का हिब्बानामा से जुड़ा रिकाॅर्ड को छिपाया गया।
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स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बरसाती कुंड भूमि की बिक्री मामले की शिकायत 23 अप्रैल को हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव व राजस्व विभाग के वित्तायुक्त एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो मुख्यालय में दी थी। इसके बाद वित्तायुक्त ने इस मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए 26 मई को उपायुक्त भिवानी से बरसाती कुंड भूमि की गलत रजिस्ट्री की रिपोर्ट तलब की। उपायुक्त ने 27 मई को भिवानी तहसीलदार को पत्र भेजकर कुंड भूमि की तत्कालीन तहसीलदार द्वारा गलत रजिस्ट्री की रिपोर्ट मांगी। संवाद
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ऐसे बनाए राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से बरसाती कुंड में नए भूमि मालिक
दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे 709 ई पर कुसुंभी मोड़ के समीप करीब सवा एकड़ भूमि पर बरसाती कुंड बना था। जिसे अब तोड़कर भूमि समतल कर दी गई है और पुरानी दीवार हटाकर नई बाडबंदी की गई है। राजस्व विभाग के पुराने रिकार्ड के मुताबिक, देवसर के मंगल सिंह द्वारा हिब्बानामा से 1910 में लुधियाना के टोहरमल के नाम कराई गई इस धर्मार्थ की भूमि को खरीदा और बेचा नहीं जा सकता था। जबकि इस भूमि का बरसाती कुंड निर्माण के बाद सामूहिक इस्तेमाल ही किया जा सकता है।
भिवानी तहसील कार्यालय के अधिकारियों की मिलीभगत से 11 मई 2022 को सवा एकड़ में बने बरसाती कुंड को पानीपत के साहपुर और ढाणी ब्राह्मण निवासी दो लोगों ने खरीदा है। जबकि रोहतक के बैंक कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ने मुख्तयारनामा के जरिये बरसाती कुंड भूमि की बिक्री की है। 11 अप्रैल 2022 को विरासत का इंतकाल तहसील कार्यालय में दर्ज है। इससे पहले 2021 में इस भूमि का मुख्तयारनामा तैयार कराया गया था। 11 मई 2022 को कुंड की भूमि 39 लाख 75 हजार रुपये में बेच दी गई। इसकी रजिस्ट्री के दौरान दो लाख 78 हजार 250 रुपये का स्टॉप भी इस्तेमाल किया गया। इस भूमि का इंतकाल भी नए मालिकों के नाम दर्ज हो चुका है, जिसमें कुंड तो दर्शाया गया है, लेकिन प्राचीन रिकाॅर्ड के हिब्बानामा शब्द को ही गायब कर डाला है।
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बरसाती कुंड भूमि की गलत रजिस्ट्री मामले में तत्कालीन तहसीलदार रवींद्र मलिक की मिलीभगत से कराई गई थी। इस संबंध में संगठन ने मुख्य सचिव हरियाणा सरकार और राजस्व विभाग के वित्तायुक्त एवं विजिलेंस को शिकायत दी थी। इस शिकायत पर उपायुक्त और भिवानी तहसील कार्यालय से बरसाती कुड़ की जांच कर इसकी रिपोर्ट तलब की गई है, लेकिन अधिकारी अब भी मामले को दबाने और रिपोर्ट में लीपापोती का प्रयास कर रहे हैं। विस्तृत विजिलेंस जांच कराई जाए तो कई भूमि घोटाले सामने आएंगे। - बृजपाल सिंह परमार अध्यक्ष स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन भिवानी।
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वित्तायुक्त के पत्र का हवाला देते हुए उपायुक्त भिवानी कार्यालय ने बरसाती कुंड मामले में रिपोर्ट तलब की है। इस संबंध में संबंधित पटवारी और कानूनगो को इस भूमि से जुड़ा पुराना रिकाॅर्ड से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। इसके बाद ही इस कुंड की भूमि संबंधी रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। - सुरेश कुमार, तहसीलदार तहसील भिवानी
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भिवानी। करीब डेढ़ सौ साल पुराने ऐतिहासिक बरसाती कुंड के मामले में राजस्व विभाग के वित्तायुक्त ने संज्ञान लेते हुए भिवानी के उपायुक्त से रिपोर्ट तलब की है। इसके बाद उपायुक्त ने भिवानी के तहसीलदार को पत्र लिखकर ऐतिहासिक कुंड की भूमि की बिक्री से संबंधित तत्कालीन तहसीलदार द्वारा गलत रजिस्ट्री किए जाने की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
अब वर्तमान तहसीलदार सुरेश कुमार ने इस मामले में संबंधित पटवारी और कानूनगो से पुराना रिकाॅर्ड तलब किया है, ताकि सही स्थिति का पता लगाया जा सके। यह रिपोर्ट अब मुख्यालय भेजी जानी है। चौंकाने वाली बात यह है कि पटवारी ने राजस्व विभाग के रिकाॅर्ड में प्राचीन कुंड की भूमि की रजिस्ट्री में नए मालिकों को दर्ज किया है, जबकि दान में दी गई भूमि से संबंधित हिब्बानामा गायब पाया गया। वित्तायुक्त के दखल के बाद तहसीलदारों और अन्य अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। अब अधिकारी अपनी खामियों को छुपाने में जुटे हैं, जबकि तत्कालीन तहसीलदार को इस मामले में मुख्य संदिग्ध माना जा रहा है।
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गांव देवसर निवासी मंगल सिंह चौहान ने हिब्बानामा से 11 जून 1910 में कुसुंभी मोड़ स्थित दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे के साथ लगती करीब सवा एकड़ भूमि लुधियाना के टोहरमल को धर्मार्थ कार्य के लिए दान में दी थी। उस समय इसमें कुछ मकान भी बने थे, जिसके बाद इस भूमि में बरसाती कुंड का निर्माण किया गया। राजस्व विभाग की 1908-09 की जमाबंदी रिपोर्ट में भी हिब्बानामा से ये भूमि धर्मार्थ कार्य के लिए दान में दी गई दर्शायी गई है। इसके बावजूद इस भूमि को हड़पने के लिए तत्कालीन तहसीलदार ने अपने रिश्तेदार के नाम से भूमि में हिस्सेदारी में रजिस्ट्री कराकर नए लोगों को मालिक बना डाला। राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से दान में दी गई भूमि का हिब्बानामा से जुड़ा रिकाॅर्ड को छिपाया गया।
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स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बरसाती कुंड भूमि की बिक्री मामले की शिकायत 23 अप्रैल को हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव व राजस्व विभाग के वित्तायुक्त एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो मुख्यालय में दी थी। इसके बाद वित्तायुक्त ने इस मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए 26 मई को उपायुक्त भिवानी से बरसाती कुंड भूमि की गलत रजिस्ट्री की रिपोर्ट तलब की। उपायुक्त ने 27 मई को भिवानी तहसीलदार को पत्र भेजकर कुंड भूमि की तत्कालीन तहसीलदार द्वारा गलत रजिस्ट्री की रिपोर्ट मांगी। संवाद
ऐसे बनाए राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से बरसाती कुंड में नए भूमि मालिक
दिल्ली-पिलानी नेशनल हाईवे 709 ई पर कुसुंभी मोड़ के समीप करीब सवा एकड़ भूमि पर बरसाती कुंड बना था। जिसे अब तोड़कर भूमि समतल कर दी गई है और पुरानी दीवार हटाकर नई बाडबंदी की गई है। राजस्व विभाग के पुराने रिकार्ड के मुताबिक, देवसर के मंगल सिंह द्वारा हिब्बानामा से 1910 में लुधियाना के टोहरमल के नाम कराई गई इस धर्मार्थ की भूमि को खरीदा और बेचा नहीं जा सकता था। जबकि इस भूमि का बरसाती कुंड निर्माण के बाद सामूहिक इस्तेमाल ही किया जा सकता है।
भिवानी तहसील कार्यालय के अधिकारियों की मिलीभगत से 11 मई 2022 को सवा एकड़ में बने बरसाती कुंड को पानीपत के साहपुर और ढाणी ब्राह्मण निवासी दो लोगों ने खरीदा है। जबकि रोहतक के बैंक कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ने मुख्तयारनामा के जरिये बरसाती कुंड भूमि की बिक्री की है। 11 अप्रैल 2022 को विरासत का इंतकाल तहसील कार्यालय में दर्ज है। इससे पहले 2021 में इस भूमि का मुख्तयारनामा तैयार कराया गया था। 11 मई 2022 को कुंड की भूमि 39 लाख 75 हजार रुपये में बेच दी गई। इसकी रजिस्ट्री के दौरान दो लाख 78 हजार 250 रुपये का स्टॉप भी इस्तेमाल किया गया। इस भूमि का इंतकाल भी नए मालिकों के नाम दर्ज हो चुका है, जिसमें कुंड तो दर्शाया गया है, लेकिन प्राचीन रिकाॅर्ड के हिब्बानामा शब्द को ही गायब कर डाला है।
बरसाती कुंड भूमि की गलत रजिस्ट्री मामले में तत्कालीन तहसीलदार रवींद्र मलिक की मिलीभगत से कराई गई थी। इस संबंध में संगठन ने मुख्य सचिव हरियाणा सरकार और राजस्व विभाग के वित्तायुक्त एवं विजिलेंस को शिकायत दी थी। इस शिकायत पर उपायुक्त और भिवानी तहसील कार्यालय से बरसाती कुड़ की जांच कर इसकी रिपोर्ट तलब की गई है, लेकिन अधिकारी अब भी मामले को दबाने और रिपोर्ट में लीपापोती का प्रयास कर रहे हैं। विस्तृत विजिलेंस जांच कराई जाए तो कई भूमि घोटाले सामने आएंगे। - बृजपाल सिंह परमार अध्यक्ष स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन भिवानी।
वित्तायुक्त के पत्र का हवाला देते हुए उपायुक्त भिवानी कार्यालय ने बरसाती कुंड मामले में रिपोर्ट तलब की है। इस संबंध में संबंधित पटवारी और कानूनगो को इस भूमि से जुड़ा पुराना रिकाॅर्ड से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। इसके बाद ही इस कुंड की भूमि संबंधी रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। - सुरेश कुमार, तहसीलदार तहसील भिवानी