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थाने तक पहुंची पति-पत्नी की तकरार, खाकी ने टूटने से बचाए 65 फीसदी परिवार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 01 Mar 2022 11:05 PM IST
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Husband-wife dispute reached the police station, Police saved 65 percent of the family from breaking up
हांसी रोड स्थित महिला थाना। संवाद - फोटो : Bhiwani
संजय वर्मा
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भिवानी। पति-पत्नी के बीच होने वाली तकरार घर की चहारदीवारी से निकलकर थाने तक पहुंच गई, लेकिन पुलिस की सूझबूझ से 65 फीसदी परिवार टूटने से बच गए। घरेलू हिंसा और पति-पत्नी की तकरार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इन मामलों में नौबत यह आ रही है कि दोनों का ही सब्र जवाब दे गया है। यही वजह है कि अधिकतर मामले पुलिस थाने में पहुंच रहे हैं। वहीं, पुलिस इन परिवारों को टूटने से बचाने के लिए भरसक प्रयास कर रही है।
अकेले भिवानी महिला पुलिस थाने में 2021 में 721 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 465 मामलों में महिला थाने की पुलिस की सूझबूझ काम आई और उन महिलाओं की काउंसिलिंग कराई गई। जिसके बाद पति पक्ष के लोगों से भी उनकी समस्याओं, सोच और विचार के मुताबिक गृहस्थी का माहौल बनाने का अनुरोध किया गया। इससे इन महिलाओं का घर टूटने से बच गया। वहीं समझाने पर महिलाएं भी अपने पति के साथ खुशी से रहने के लिए राजी हो गईं। महिला पुलिस थाने से 256 शिकायतों को ही संबंधित पुलिस थानों में कार्रवाई के लिए भेजा गया। इनमें पुलिस ने आरोपी पक्ष के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई के लिए आगे की तहकीकात बढ़ाई।
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आपसी अनबन से भी टूट रहे घर, बिखर रहे सपने
मियां-बीवी की आपसी अनबन से भी घर टूट रहे हैं और उनके बच्चों के भविष्य संवारने के सपने भी बिखर रहे हैं। ये ऐसे आंकड़े हैं, जिसने समाज को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है। भिवानी महिला सैल में 2021 में पीड़ित महिलाओं की 1014 शिकायतें आईं, जिनमें 270 महिलाओं की पुलिस ने काउंसिलिंग कराई। इन महिलाओं की गृहस्थी बसाने के लिए पुलिस को मध्यस्थता करनी पड़ी, जिसमें पुलिस की सूझबूझ ने न केवल उनके मनमुटाव को दूर किया, बल्कि भविष्य में उन महिलाओं को घरेलू हिंसा और प्रताड़ना के दर्द से भी निजात दिलाई। महिला सेल से 744 ऐसे मामले संबंधित पुलिस थानों में आगामी कार्रवाई के लिए भेजे गए, जिनमें महिलाओं के उत्पीड़न में आरोपी पक्ष की गलती साबित हुई। (संवाद)
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सुलह के बाद छह महीने तक करते हैं निगरानी
महिला उत्पीड़न और प्रताड़ना की अधिकतर शिकायतें थाने में आती हैं। इन शिकायतों पर हम सख्त कदम उठाने से पहले दोनों पक्षों को आमने-सामने कर सुलह का प्रयास करते हैं। अगर महिला ज्यादा डिप्रेशन में है तो उसकी काउंसिलिंग कराई जाती है। फिर परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उस महिला को अपनी गृहस्थी बसाने का मौका दिया जाता है। अपनी ससुराल में जाने के बाद छह माह तक पुलिस उससे लगातार संपर्क में रहकर उसकी वहां स्थिति पर नजर भी रखती है, ताकि भविष्य में उसके साथ कोई दिक्कत या परेशानी न आए।

-धर्मली देवी, एसएचओ, महिला पुलिस थाना भिवानी।
हमारा प्रयास रहता है खटास को मिठास में बदलें
महिला के विरुद्ध अपराधों के मामलों में काफी कमी आई है। महिला के विरुद्ध और बाल अपराध के मामलों में पुलिस तत्परता से कार्रवाई कर रही है। हालांकि घरेलू हिंसा और प्रताड़ना के मामलों में पुलिस का हमेशा से ही सकारात्मक रुख रहता है, ताकि आपसी रिश्तों में आई खटास दूर कर संबंधों में मिठास घोलकर उन्हें एक-दूसरे के साथ सम्मानपूर्वक रहने का अवसर मिले। पुलिस ऐसे मामलों में हर पहलू पर बारीकी से भी जांच पड़ताल करती है। अगर किसी मामले में वास्तव में महिला पर अत्याचार हुआ है तो फिर संबंधित आईपीसी के तहत आरोपियों पर कानूनी कार्रवाई कराई जा रही है।
-अजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक भिवानी।
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