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होमगार्ड के जवान बने कंडक्टर, कौशल विकास के चालकों ने संभाली स्टीयरिंग
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रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के चलते बूथों पर लगीं प्राइवेट बसें। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। राष्ट्रव्यापी हड़ताल के दूसरे दिन मंगलवार को रोडवेज प्रबंधन ने व्यवस्था बनाने के लिए होमगार्ड के जवानों को कंडक्टर बनाया तो कौशल विकास के चालकों को बसों का स्टीयरिंग थमाई। इसी का नतीजा रहा कि रोडवेज के 270 में से 246 कर्मचारी हड़ताल पर होने के बावजूद 93 में से 51 बसें चलीं और यात्रियों की परेशानी कुछ कम हुई। मंगलवार को हड़ताल खत्म हो गई। उम्मीद है कि बुधवार से सभी कर्मचारी काम पर लौट आएंगे।
हालांकि रोडवेज कर्मचारी नेता बोलते रहे कि कौशल विकास के चालक पूरी तरह निपुण नहीं हैं और प्रबंधन यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। वहीं नगर परिषद के कर्मचारियों की झाडू लगातार तीसरे दिन थमी रही। एक दिन रविवार के कारण सफाई नहीं की तो दो दिन से हड़ताल। इस कारण शहर में सड़क किनारे से कचरा सड़क के बीच तक फैला रहा। कुछ जगह तो कचरा निस्तारण के लिए उसमें आग ही लगा दी गई। सरकारी बैंकों में भी लगातार दूसरे दिन कामकाज ठप रहा और दो दिन में करीब 650 करोड़ का लेनदेन प्रभावित रहा। विभिन्न विभागों के कर्मचारी दिनभर नारेबाजी कर धरना देकर रोष जताते रहे।
बैंक बंद, धरने पर कर्मचारी, उपभोक्ता परेशान
एसबीआई में थोड़ा बहुत काम जरूर हुआ, मगर बाकी सभी सरकारी बैंक बंद रहे। कहीं ताले लगे थे तो कहीं हड़ताल के नोटिस लगाए हुए थे। कर्मचारी धरना देकर रोष जताते रहे। मगर सबसे ज्यादा समस्या उपभोक्ताओं को झेलनी पड़ी। कोई पेंशन के लिए भटकता रहा तो व्यापारी, दुकानदार भी परेशान रहे। कुछ बैंकों की तो एटीएम भी खाली हो गई। इस वजह से लोगों ने निजी बैंकों की एटीएम से रुपये निकाले। बैंक कर्मचारी नेताओं, अधिकारियों की माने तो जिले में करीब 650 करोड़ का लेनदेन दो दिन में प्रभावित हुआ है।
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बैंक उपभोक्ताओं की परेशानी, उन्हीं की जुबानी
घरेलू कार्य के चलते मंगलवार को एटीएम से रुपये निकलवाने के लिए आया था। मगर शहर की अधिकतर एटीएम में चक्कर काट चुका हूं, किसी भी एटीएम में पैसे नहीं है। ऐसे में बिना पैसे लिए भी घर लौटना पड़ेगा।
- अजय, खरकड़ी फाटक।
दो माह से पेंशन नहीं मिली है। इसकी वजह से काफी परेशानी बनी हुई है। मंगलवार को बैंक से पेंशन निकलवाने के लिए आई थी, यहां आकर पता चला कि बैंक में हड़ताल है। ऐसे में बिना पेंशन लिए भी वापस घर जाना पड़ रहा है।
- बिमला देवी, खरकड़ी फाटक।
गांव से शहर में किसी काम के लिए आया था। कुछ रुपयों की जरूरत थी तो एटीएम गया, वहां रुपये ही नहीं मिले। बैंक कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चार दिन से बैंक बंद हैं, इसकी वजह से काफी कार्य बाधित हो गए हैं।
- नवीन वर्मा, लालावास।
शहर में कहीं लगे गंदगी के ढेर, कहीं जलाया कचरा
दो दिन की हड़ताल ने शहर की स्वच्छता को ग्रहण लगा दिया है। पहले रविवार और फिर दो दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल। तीन दिन से सफाई नहीं होने के कारण करीब 30 टन कचरा शहर की सड़कों, सड़क किनारों पर पड़ा है और लावारिस पशु इन्हें फैला रहे हैं। शहर के बाजार हो या मुख्य सड़कें, सब जगह कचरा ही कचरा नजर आ रहा है। जिस कारण राहगीरों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। कई जगह तो लोगों ने कचरे के ढेर को ही आग के हवाले कर दिया, जिससे पर्यावरण प्रदूषण व धुएं से आसपास के लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। नगर परिषद के सभी 146 नियमित और 160 कच्चे सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं।
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हालांकि रोडवेज कर्मचारी नेता बोलते रहे कि कौशल विकास के चालक पूरी तरह निपुण नहीं हैं और प्रबंधन यात्रियों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा है। वहीं नगर परिषद के कर्मचारियों की झाडू लगातार तीसरे दिन थमी रही। एक दिन रविवार के कारण सफाई नहीं की तो दो दिन से हड़ताल। इस कारण शहर में सड़क किनारे से कचरा सड़क के बीच तक फैला रहा। कुछ जगह तो कचरा निस्तारण के लिए उसमें आग ही लगा दी गई। सरकारी बैंकों में भी लगातार दूसरे दिन कामकाज ठप रहा और दो दिन में करीब 650 करोड़ का लेनदेन प्रभावित रहा। विभिन्न विभागों के कर्मचारी दिनभर नारेबाजी कर धरना देकर रोष जताते रहे।
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बैंक बंद, धरने पर कर्मचारी, उपभोक्ता परेशान
एसबीआई में थोड़ा बहुत काम जरूर हुआ, मगर बाकी सभी सरकारी बैंक बंद रहे। कहीं ताले लगे थे तो कहीं हड़ताल के नोटिस लगाए हुए थे। कर्मचारी धरना देकर रोष जताते रहे। मगर सबसे ज्यादा समस्या उपभोक्ताओं को झेलनी पड़ी। कोई पेंशन के लिए भटकता रहा तो व्यापारी, दुकानदार भी परेशान रहे। कुछ बैंकों की तो एटीएम भी खाली हो गई। इस वजह से लोगों ने निजी बैंकों की एटीएम से रुपये निकाले। बैंक कर्मचारी नेताओं, अधिकारियों की माने तो जिले में करीब 650 करोड़ का लेनदेन दो दिन में प्रभावित हुआ है।
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बैंक उपभोक्ताओं की परेशानी, उन्हीं की जुबानी
घरेलू कार्य के चलते मंगलवार को एटीएम से रुपये निकलवाने के लिए आया था। मगर शहर की अधिकतर एटीएम में चक्कर काट चुका हूं, किसी भी एटीएम में पैसे नहीं है। ऐसे में बिना पैसे लिए भी घर लौटना पड़ेगा।
- अजय, खरकड़ी फाटक।
दो माह से पेंशन नहीं मिली है। इसकी वजह से काफी परेशानी बनी हुई है। मंगलवार को बैंक से पेंशन निकलवाने के लिए आई थी, यहां आकर पता चला कि बैंक में हड़ताल है। ऐसे में बिना पेंशन लिए भी वापस घर जाना पड़ रहा है।
- बिमला देवी, खरकड़ी फाटक।
गांव से शहर में किसी काम के लिए आया था। कुछ रुपयों की जरूरत थी तो एटीएम गया, वहां रुपये ही नहीं मिले। बैंक कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से आमजन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चार दिन से बैंक बंद हैं, इसकी वजह से काफी कार्य बाधित हो गए हैं।
- नवीन वर्मा, लालावास।
शहर में कहीं लगे गंदगी के ढेर, कहीं जलाया कचरा
दो दिन की हड़ताल ने शहर की स्वच्छता को ग्रहण लगा दिया है। पहले रविवार और फिर दो दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल। तीन दिन से सफाई नहीं होने के कारण करीब 30 टन कचरा शहर की सड़कों, सड़क किनारों पर पड़ा है और लावारिस पशु इन्हें फैला रहे हैं। शहर के बाजार हो या मुख्य सड़कें, सब जगह कचरा ही कचरा नजर आ रहा है। जिस कारण राहगीरों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। कई जगह तो लोगों ने कचरे के ढेर को ही आग के हवाले कर दिया, जिससे पर्यावरण प्रदूषण व धुएं से आसपास के लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। नगर परिषद के सभी 146 नियमित और 160 कच्चे सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं।

शहर के हांसी गेट पर प्रदर्शन करते विभिन्न जनसंगठनों के सदस्य। संवाद- फोटो : Bhiwani