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होली मुहूर्त : 14 मार्च से खरमास के साथ पहला चंद्रग्रहण भी पड़ेगा

Mon, 10 Mar 2025 12:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Mon, 10 Mar 2025 12:48 AM IST
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Holi Muhurat: From March 14, the first lunar eclipse will also occur along with Kharmas
तोशाम। इस वर्ष होली के त्योहार कई संयोग बन रहे हैं। सात मार्च से जहां होलाष्टक लग चुके हैं। वहीं 14 मार्च से खरमास भी लगने जा रहा है। इतना ही नहीं इसी दिन वर्ष का पहला चंद्रग्रहण भी पड़ेगा, हालांकि भारत में यह दिखाई नहीं देगा। फिर भी इन तीनों योग की नकारात्मक ऊर्जा से भरी इस अवधि में शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे।
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श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि होलिका दहन प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा के दिन किया जाएगा। ऐसा संयोग होने से यदि होलिका दहन निर्धारित समय पर किया जाए तो व्यक्ति को अनेक प्रकार के लाभ मिलते हैं। फाल्गुन शुक्ल पक्ष के चतुर्दशी तिथि 13 मार्च की 10:35 तक रहेगी।
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पूर्णिमा की तिथि शुरू हो जाएगी। फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा की उदया तिथि 14 मार्च होगी, लेकिन 13 मार्च को प्रदोष व्यापनी पूर्णिमा की रात 11:26 से तड़के 12:23 तक, इससे पहले भद्रा का साया रहने से दहन करना अशुभ है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 57 मिनट के इस समय के बीच ही होलिका दहन शुभ रहेगा।
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पंडित श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि हिंदू धर्म में फाल्गुन पूर्णिमा तिथि पर होली का त्योहार मनाया जाता है। होलिका दहन से ठीक आठ दिन पूर्व होलाष्टक लगते हैं। इस वर्ष होलिका दहन 13 मार्च को होगा और रंगों से होली 14 मार्च को खेली जाएगी। इस स्थिति में सात मार्च, शुक्रवार से होलाष्टक शुरू हो चुके हैं। इसी माह सूर्य देव 14 मार्च को शाम 6:49 बजे मीन राशि में गोचर करेंगे, सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही खरमास प्रारंभ हो जाएगा। होलाष्टक और खरमास को नकारात्मक ऊर्जाओं से भरी हुई अवधि माना जाता है, इसलिए इस अवधि में शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।

यह है खरमास : खरमास का शाब्दिक अर्थ है कि अशुभ मास या महीना। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य देव जब भी देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु और मीन में गोचर करते हैं, तो उस समय खरमास लगता है। यह पूरे एक महीने चलता है।
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