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Bhiwani News: ईंट भट्ठों पर जाकर काम करने वाले मजदूरों की टीबी जांच के लिए स्क्रीनिंग कर रहा स्वास्थ्य विभाग
Tue, 28 May 2024 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 28 May 2024 11:27 PM IST
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भिवानी। टीबी जागरुकता कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग टीबी के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान कर उसकी रोकथाम के लिए पुख्ता कदम उठा रहा है। प्रदेश के 11 जिलों में टीबी संभावितों को बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (बीसीजी) की वैक्सीन लगाई जा रही है। वैक्सीन से पहले संभावित व्यक्ति से इसकी अनुमति ली जा रही है, बिना अनुमति वैक्सीनेशन नही किया जा रहा।
वहीं विभाग की तरफ से एक विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है। जिसमें ईंट भट्ठों पर काम करने वालों मजदूर की जांच की जा रही है। विभाग की टीम ईंट भट्ठों की जगह पर जाकर वहां पर काम करने वाले मरीजों की पोर्टेबल हैंडल्ड एक्स-रे मशीन से स्क्रीनिंग की जा रही। ये मशीन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग करके साथ की साथ रिपोर्ट तैयार करके दे देती है। इससे तुरंत पता चल जाता है कि व्यक्ति को टीबी है या नहीं।
भिवानी जिले में सात लाख लोगों पर स्वास्थ्य विभाग ने सर्वेक्षण किया है। इसमें घर-घर सर्वेक्षण के दौरान करीब 90 हजार टीबी संभावित लोग वैक्सीनेशन की सहमति भी दे चुके हैं। जबकि संभावित व्यक्ति की बिना सहमति के वैक्सीनेशन नहीं होगा। उप सिविल सर्जन डॉ. सुमन विश्वकर्मा ने बताया कि अभी तक 45 हजार लोगों को बीसीजी की वैक्सीन लग चुकी है। इसके साथ ही जांच के दौरान जिस भी व्यक्ति को टीबी की बीमारी मिलती है उसका पहले एक महीने तक इलाज किया जाएगा और उसके बाद मरीज को वैक्सीन लगाई जाएगी। अस्पताल में अब एमडीआर ( टीबी रोग का एक रूप ) के मरीजों का भी इलाज किया जा रहा है। जिन मरीजों को बलगम आने की शिकायत है उन्हें एक किट दी जा रही है। जिसमें उन्हें एक डीबा, साथ में एक कैमिकल दिया जा रहा है। मरीज उस डीबे में कैमिकल डालकर उसमें बलगम करें। इसमे 24 घंटे बाद बलगम में मौजूद कीटाणु मर जाते हैं और उसके बाद उस बलगम को फेंक सकते हैं। उप सिविल सर्जन ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में अभी 100 के करीब टीबी जांच के मरीज आ रहे हैं। और जिन मरीजों को ज्यादा दिक्कत है उन्हें टीबी वार्ड में दाखिल भी किया जा रहा है।
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अभी तक 45 हजार लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। हर सोमवार व शुक्रवार को बस संभावित मरीजों को ये वैक्सीन लगाई जा रही है। बाकी दिन रूटीन में मरीजों का चेक किया जा रहा है। अस्पताल में मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा रहा है। अभी तक 59 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। विभाग का उद्देश्य जिले की और भी ग्राम पंचायतों का टीबी मुक्त करना है। विभाग की ओर से टीबी से बजाच जागरुकता कार्यक्रम के तहत लोगों को कैंप लगाकर, सोशल मीडिया के माध्यम से भी जागरूक किया जा रहा है।
- डॉ. सुमन विश्वकर्मा, उप सिविल सर्जन, भिवानी।
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वहीं विभाग की तरफ से एक विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है। जिसमें ईंट भट्ठों पर काम करने वालों मजदूर की जांच की जा रही है। विभाग की टीम ईंट भट्ठों की जगह पर जाकर वहां पर काम करने वाले मरीजों की पोर्टेबल हैंडल्ड एक्स-रे मशीन से स्क्रीनिंग की जा रही। ये मशीन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग करके साथ की साथ रिपोर्ट तैयार करके दे देती है। इससे तुरंत पता चल जाता है कि व्यक्ति को टीबी है या नहीं।
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भिवानी जिले में सात लाख लोगों पर स्वास्थ्य विभाग ने सर्वेक्षण किया है। इसमें घर-घर सर्वेक्षण के दौरान करीब 90 हजार टीबी संभावित लोग वैक्सीनेशन की सहमति भी दे चुके हैं। जबकि संभावित व्यक्ति की बिना सहमति के वैक्सीनेशन नहीं होगा। उप सिविल सर्जन डॉ. सुमन विश्वकर्मा ने बताया कि अभी तक 45 हजार लोगों को बीसीजी की वैक्सीन लग चुकी है। इसके साथ ही जांच के दौरान जिस भी व्यक्ति को टीबी की बीमारी मिलती है उसका पहले एक महीने तक इलाज किया जाएगा और उसके बाद मरीज को वैक्सीन लगाई जाएगी। अस्पताल में अब एमडीआर ( टीबी रोग का एक रूप ) के मरीजों का भी इलाज किया जा रहा है। जिन मरीजों को बलगम आने की शिकायत है उन्हें एक किट दी जा रही है। जिसमें उन्हें एक डीबा, साथ में एक कैमिकल दिया जा रहा है। मरीज उस डीबे में कैमिकल डालकर उसमें बलगम करें। इसमे 24 घंटे बाद बलगम में मौजूद कीटाणु मर जाते हैं और उसके बाद उस बलगम को फेंक सकते हैं। उप सिविल सर्जन ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में अभी 100 के करीब टीबी जांच के मरीज आ रहे हैं। और जिन मरीजों को ज्यादा दिक्कत है उन्हें टीबी वार्ड में दाखिल भी किया जा रहा है।
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अभी तक 45 हजार लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। हर सोमवार व शुक्रवार को बस संभावित मरीजों को ये वैक्सीन लगाई जा रही है। बाकी दिन रूटीन में मरीजों का चेक किया जा रहा है। अस्पताल में मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा रहा है। अभी तक 59 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। विभाग का उद्देश्य जिले की और भी ग्राम पंचायतों का टीबी मुक्त करना है। विभाग की ओर से टीबी से बजाच जागरुकता कार्यक्रम के तहत लोगों को कैंप लगाकर, सोशल मीडिया के माध्यम से भी जागरूक किया जा रहा है।
- डॉ. सुमन विश्वकर्मा, उप सिविल सर्जन, भिवानी।