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ग्राउंड रिपोर्ट : जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के 14 ट्यूबवेलों में नौ का पानी हुआ खरा

Tue, 21 Mar 2023 12:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Tue, 21 Mar 2023 12:10 AM IST
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Ground report: water of nine out of 14 tubewells of Public Health Engineering Department is clean
भिवानी। जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के पुराने जलघर परिसर में लगे 14 ट्यूबवेलों में से नौ ट्यूबवेलों का पानी खारा (पीने लायक नहीं) हो चुका है। जबकि सिर्फ पांच ट्यूबवेल ही ऐसे हैं, जिनका पानी अभी ठीक है। इन ट्यूबवेलों से पुराने जलघर के खाली पड़े टैंकों में पानी डाला जा रहा है, ताकि शहरी पेयजल आपूर्ति को नहरों में पानी आने तक चालू रखा जा सके। हालांकि ट्यूबवेलों का पानी सप्लाई में इस्तेमाल होने से लोगों की जीभ का स्वाद भी बिगड़ रहा है। लेकिन विभाग की भी मजबूरी है कि टैंकों में बचे सिर्फ 20 फीसदी पानी को ट्यूबवेल के पानी के साथ मिलाकर जैसे-तैसे लोगों की प्यास बुझाई जा सके।
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शहर में साढ़े चार लाख लोगों की आबादी की प्यास बुझाने में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के पसीने छूट गए हैं। क्योंकि नहरों में कम पानी, टैंक खाली रह जाने से हालात बिगड़ गए हैं। गर्मी के तेवर के बाद बारिश भी हुई, लेकिन इससे भी न नहरों में पानी आया न टैंकों की हालत सुधरी। ऐसे में महम रोड के पुराने जलघर में चौबीसों घंटे पांच ट्यूबवेल चल रहे हैं, जिनका पानी टैंकों में लगातार डाला जा रहा है। करीब आठ साल पहले जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने जलघर टैंकों के आसपास बोरवेल कर ट्यूबवेल लगाए थे। जिसका पानी गर्मी के मौसम में जरूरत पड़ने पर पानी के टैंकों में डालकर उसे पेयजल आपूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जा सके। लगातार कई सालों तक भूमिगत जल दोहन की वजह से जलघर टैंकों के आसपास लगे नौ ट्यूबवेल अब अधिक टीडीएस वाला जहरीला पानी उगलने लगे हैं। जिसकी वजह से जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने भी इनका इस्तेमाल अब बंद कर दिया है।
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20 फीसदी पानी से 13 दिन चलाना होगा काम
पुराने जलघर में सिर्फ 20 फीसदी पानी है। जबकि नहरों में तीन अप्रैल की शाम तक पानी आएगा। ऐसे में 13 दिन तक पेयजल आपूर्ति का राशनिंग से काम चलाना होगा। भूमिगत पानी को ट्यूबवेल से टैंकों में डालकर क्लोरिनेशन के बाद उसे सप्लाई में देकर शहरी बूस्टरों को भरा जा रहा है। ये पानी लोगों की जीभ का स्वाद तो बिगाड़ ही रहा है साथ ही शरीर में खारिश व खुजली की शिकायतें भी बढ़ा रहा है।
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ट्यूबवेलों से भरे जा रहे हैं पानी के टैंकर
पुराने जलघर परिसर में दो ट्यूबवेल पानी के टैंकर भरने के लिए भी लगाए गए हैं। इन टैंकरों को शहर की बाहरी कॉलोनियों में लोगों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए भेजा जा रहा है। जिस वजह से भी भूमिगत जल दोहन हो रहा है। पहले यहां पुराने टैंक थे, अब नया पक्का टैंक बना है। जिससे भूमिगत पानी का रिचार्ज भी नहीं हो रहा है।


वर्जन:: पुराने जलघर के टैंकों में 20 से 25 फीसदी पानी शेष बचा है। पांच ट्यूबवेल भी लगातार चलाए जा रहे हैं। इन ट्यूबवेलों का पानी ठीक है। जिन ट्यूबवेलों का पानी खराब हो चुका है, उन्हें विभाग ने बंद कर दिया है। नहरों में पानी आने तक पेयजल आपूर्ति चालू रखने के लिए ही ट्यूबवेल का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं।
-सचिन तलेजा, कनिष्ठ अभियंता, शहरी पेयजल शाखा, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग।
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