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Bhiwani News: पोती ने दी दादा की चिता को मुखाग्नि
Fri, 19 Jan 2024 03:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Fri, 19 Jan 2024 03:37 AM IST
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तोशाम। गांव संडवा में पूर्व सैनिक ईश्वर कालीरामण की मौत होने पर पोती ने ही बेटे का धर्म निभाया। सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ते हुए संडवा निवासी आशा ने अपने दादा को मुखाग्नि देकर मिसाल कायम की। पूर्व सैनिक ईश्वर सिंह का बुधवार देर शाम निधन हो गया था जिनका वीरवार सुबह अंतिम संस्कार किया गया।
ईश्वर सिंह के एक ही पुत्र नंदकिशोर था जिनका कई वर्ष पहले युवा अवस्था में ही निधन हो गया था। नंदकिशोर के पुत्र का भी बाल्यावस्था में ही निधन हो गया था, बेटी आशा जो पिछले दिनों पुलिस में भर्ती हुई हैं और फिलहाल हरियाणा पुलिस में ट्रेनिंग पर हैं। बेटे और पोते की मौत के बाद पोती आशा में ही दादा को वंश की आशा दिखाई दी।
अखिल भारतीय कालीरामण खाप के राष्ट्रीय प्रधान महासिंह जींद, पूर्व राष्ट्रीय प्रधान वीरेंद्र संडवा ने कहा कि बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं होता जब बेटे नहीं होते हैं तो बेटियां माता-पिता की सहारा बनती हैं। बेटी आशा ने सही निर्णय लेकर दादा की चिता को मुखाग्नि देकर सराहनीय काम किया है। उन्होंने कहा कि रूढि़वादी सोच से ऊपर उठकर बेटी आशा ने दादा का अंतिम संस्कार कर समाज को सही दिशा दिखाई है। बेटियां भी बेटों से कम नहीं है। संवाद
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ईश्वर सिंह के एक ही पुत्र नंदकिशोर था जिनका कई वर्ष पहले युवा अवस्था में ही निधन हो गया था। नंदकिशोर के पुत्र का भी बाल्यावस्था में ही निधन हो गया था, बेटी आशा जो पिछले दिनों पुलिस में भर्ती हुई हैं और फिलहाल हरियाणा पुलिस में ट्रेनिंग पर हैं। बेटे और पोते की मौत के बाद पोती आशा में ही दादा को वंश की आशा दिखाई दी।
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अखिल भारतीय कालीरामण खाप के राष्ट्रीय प्रधान महासिंह जींद, पूर्व राष्ट्रीय प्रधान वीरेंद्र संडवा ने कहा कि बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं होता जब बेटे नहीं होते हैं तो बेटियां माता-पिता की सहारा बनती हैं। बेटी आशा ने सही निर्णय लेकर दादा की चिता को मुखाग्नि देकर सराहनीय काम किया है। उन्होंने कहा कि रूढि़वादी सोच से ऊपर उठकर बेटी आशा ने दादा का अंतिम संस्कार कर समाज को सही दिशा दिखाई है। बेटियां भी बेटों से कम नहीं है। संवाद
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